अदाणी पावर समूह : घाटे के बावजूद अधिग्रहण की रफ्तार बरकरार !

New Delhi:  यह महज संयोग है कि गौतम अदाणी द्वारा प्रवर्तित अदाणी पोट्र्स और स्पेशल इकनॉमिक जोन ने 16 मई, 2014 को 5,500 करोड़ रुपये के धामरा बंदरगाह modi-adani2 खरीदने की घोषणा की, ठीक इसी दिन नरेंद्र मोदी को आम चुनावों में शानदार जीत हासिल हुई। यह सौदा दो सालों से भी अधिक समय से बंदरगाह की क्षमता को बढ़ाकर 10 करोड़ टन करने को लेकर पर्यावरणीय अनुमति की वजह से लटका हुआ था। पूर्व मालिकों टाटा स्टील और लार्सन ऐंड टुब्रो के साथ किए गए इस सौदे के लिए पर्यावरणीय मंजूरी पूर्व शर्त थी और यह मंजूरी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के आखिरी वक्त में मिली।

अधिग्रहणों को लेकर अदाणी की बढ़ चली चाहत  !

उसके बाद से अधिग्रहणों को लेकर अदाणी की चाहत बढ़ती चली गई। अगस्त, 2014 में अदाणी पावर ने लैंको इन्फ्राटेक से उडुपी में 6,000 करोड़ रुपये के 1,200 मेगावॉट के तापीय ऊर्जा संयंत्र का अधिग्रहण किया।  gautamadanimodiइसके बाद अवांता समूह से कोरबा पश्चिम में 600 मेगावॉट के तापीय ऊर्जा संयंत्र का अधिग्रहण 4,200 करोड़ रुपये में किया गया। इस बीच अदाणी पावर के कर्ज में भी इजाफा दर्ज किया गया और मार्च, 2015 में 44,742 करोड़ रुपये से यह कर्ज बढ़कर सितंबर, 2015 में 48,477 करोड़ रुपये हो गया। उडुपी संयंत्र के अधिग्रहण की वजह से कंपनी का ऋण-इक्विटी अनुपात 8.4 के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया। उम्मीद है कि दिसंबर तिमाही में कोरबा पश्चिम का अधिग्रहण पूरा होने के बाद इस अनुपात में गिरावट आएगी। मार्च, 2015 में कंपनी का ऋण इक्विटी के मुकाबले 7.25 गुना था और मार्च, 2011 में यह 2.75 गुना था। परिणामस्वरूप अदाणी पावर की बाजार मूल्य सितंबर के आखिर में गिरकर 7,251 करोड़ रुपये रह गया जबकि मार्च, 2015 में यह 13,584 करोड़ रुपये था और मार्च, 2011 में यह 24,590 करोड़ रुपये था।

ऋण-इक्विटी अनुपात को लेकर अदाणी का  लक्ष्य क्या है?

मुंबई की प्रॉक्सी सलाहकार कंपनी इंस्टीटï्यूशनल इंवेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज के प्रबंध निदेशक अमित टंडन का कहना है, ‘उन्हें निवेशकों को बताना चाहिए कि ऋण-इक्विटी अनुपात को लेकर उनका लक्ष्य क्या है ADANI? उसे हासिल करने की उनकी योजना क्या है?  ‘ अदाणी पावर ने सवालों का जवाब तो नहीं दिया लेकिन कंपनी की पिछले साल की सालाना रिपोर्ट इसके बारे में बताती है, ‘कंपनी ने 150 करोड़ रुपये की बैंक को जाने वाली दो प्रमुख किस्तों को क्रमश: 53 और 30 दिन के लिए टाल दिया है।’ इसी अवधि के दौरान कंपनी ने 10,200 करोड़ रुपये के अधिग्रहण किए। निवेशक इन अधिग्रहणों की वजह से चिंतित हैं क्योंकि अदाणाी पावर पिछले चार सालों से घाटे में है और विश्लेषकों को आशंका है कि वर्ष 2015-16 में भी कंपनी को नुकसान ही सहना पड़ेगा। जेपी मॉर्गन सिक्योरिटीज के विश्लेषक सुमित किशोर का कहना है, ‘समूह निजी खदानों द्वारा सुस्त उत्पादन, बदतर ईंधन सुरक्षा, कमजोर रुपये, परियोजनाओं की बढ़ती लागत और निश्चित दरें अस्थायी कमाई मॉडल के रूप में परिवर्तित हो जाती हैं।’

पाॅवर उद्योग मे पूरी क्षमता से लगा है अदानी समूह!

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NCP chief Sharad Pawar (centre) and Adani Group chairman Gautam Adani

अदाणी पावर को सितंबर, 2015 के आखिर में छह महीनों के दौरान 786 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जबकि कंपनी को मुंद्रा (गुजरात), तिरोडा (महाराष्टï्र) और कवई (राजस्थान) के अपने संयंत्रों से हरजाने के बदले 1,500 करोड़ रुपये की आय हुई। हरजाने की दरों से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई बिजली अपीलीय पंचाट या उच्चतम न्यायालय में होती है। कंपनी का कुल हरजाना फिलहाल 5,740 करोड़ है जो कंपनी की कुल हैसियत 5,205 करोड़ रुपये से भी अधिक है।

 

 राजस्थान में  59,400 करोड़ रुपये का निवेश

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Gautam Adani’s picture with Robert Vadra

जेपी मॉर्गन सिक्योरिटीज के किशोर का कहना है, ‘भविष्य में होने वाली कमाई को बरबाद करने से बचने के लिए अदाणी पावर को हरजाने की पूरी वसूली करनी होगी।’  इन चिंताओं के बावजूद समूह ने अपने अधिग्रहणों की रफ्तार सुस्त नहीं पड़ी। अदाणी पावर एक बार फिर मध्य प्रदेश में 1,260 मेगावॉट के संयंत्र की खरीद के लिए अवंता समूह से बातचीत कर रही है। कंपनी ने राजस्थान सरकार के साथ 50:50 अनुपात में एक 10 गीगावॉट सौर ऊर्जा पार्क के लिए संयुक्त उद्यम बनाया है जिसमें 59,400 करोड़ रुपये का निवेश होगा। अदाणी पावर ने छत्तीसगढ़ सरकार से भी दो परियोजनाओं में 26,400 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी ने बांग्लादेश में 1,600 मेगावॉट की क्षमता वाले दो कोयला आधारित संयंत्रों को स्थापित करने की योजना बनाई है जिसकी पूंजीगत लागत 9,900-13,200 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य 2020 तक 20 गीगावॉट क्षमता तक पहुंचने की है। ऐसी ही तेजी समूह की अन्य कंपनियों में भी देखने को मिल रही है। (B.S.)

V.N.S.

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