अपने दूध में नींबू निचोड़ने वाले विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह

 आदिम सभ्यता की बात छोड़ भी दें तो आज जिस सभ्यतम युग में हम जी रहे हैंए उसमें इस पेशे की कुरूपता बढ़ी ही है जो हमारे ष्सभ्यष् होने को आईने में ज्यादा निर्ममता से दिखाने लगी है। किसी भी पेशे की इस तरह हिकारती तुलना दरअसल अपने चेहरे के दाग को छिपाने की विफल कोशिश होती है। यों कह सकते हैं कि हमारा सभ्य समाज अपने को दक्ष ढंग से सहेज ही नहीं पायाए इसलिए स्त्रियों को यह पेशा करने को मजबूर होना पड़ता है। यों भीए किसी अन्य से तुलना या उपमाएं देना अपने आप में एक कमजोर अभिव्यक्ति मानी जानी चाहिए। हम अक्सर ऐसी तुलनाएं कर बैठते हैं या उपमा दे देते हैंए जिसमें किसी बड़े वर्ग या समूह के प्रति हिकारत का भाव दिखलाई देता है।

Bureau नई दिल्ली :  विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह शायद उन लोगों में से हैं जो बिना जरूरत के अपने दूध में नींबू निचोड़ लेते हैं। सोशल वेबसाइट ष्ट्विटर पर उनकी हाल की एक टिप्पणी फिर चर्चा में रही, जिसमें उन्होंने यमन से भारतीयों को सफलतापूर्वक निकालने को पाकिस्तान दिवस पर पाकिस्तानी दूतावास जाने से कम रोमांचक बताया। इस बात पर मीडिया में जिस तरह की चर्चा सामने आईए उसकी प्रतिक्रिया में उन्होंने पत्रकारों के लिए ष्प्रेस्टीट्यूटष् शब्द का इस्तेमाल कर दिया। शायद उनका इशारा ष्प्रॉस्टिट्यूटष् यानी वेश्या की तरफ था। स्वाभाविक ही इस पर विवाद उठ खड़ा हुआ और उनकी बर्खास्तगी की मांग होने लगी।लेकिन इस सबके बीच जिस वर्ग की महिलाओं की अवमानना हुई हैए उनकी ओर किसी ने ध्यान देना जरूरी नहीं समझा। वेश्यावृत्ति मानव सभ्यता की कड़वी सच्चाई है। मनुष्य को विवेकशील सामाजिक प्राणी माने जाने के बरक्स जो चुनौतियां आज भी खड़ी हैंए उनमें हिंसा के अलावा वेश्यावृत्ति का पेशा भी मुख्य है। सभी जानते हैं कि कोई भी स्त्री अपनी इच्छा से इस पेशे को नहीं अपनाती। हमने समाज व्यवस्था ही ऐसी बनाई कि जिसमें इस तरह की खामियां रह गई हैं।
बहरहाल वीके सिंह ने अपना आपा पहले.पहल तब सार्वजनिक किया, जब वे थलसेना अध्यक्ष जैसे पद पर थे। जिस जन्म तारीख के आधार पर सभी पदोन्नतियां पाकर इस पद तक वे पहुंचे थे उसी के समांतर उन्होंने अपनी दूसरी जन्म तिथि पेश कर उसके आधार पर सेवानिवृत्ति इसलिए चाहीए ताकि उन्हें पद पर बने रहने का एक वर्ष से ज्यादा का समय और मिल जाए। तब यूपीए सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई और उच्चतम न्यायालय ने भी उनके तर्कों को स्वीकार नहीं किया। कहा जाता है इसी का बदला लेने के लिए वे भाजपा में गए। भाजपा को पिछले चुनाव में ऐसे सनसनीखेज व्यक्तित्वों की जरूरत थी! वीके सिंह उम्मीदवार बने और जीत गए। उम्मीद उन्हें कैबिनेट मंत्री की थी लेकिन राज्यमंत्री का पद मिला। इसके बाद से ये जब तब इसी तरह अपनी हताशा जाहिर करते रहते हैं।
पत्रकारीय पेशे को दूध का धुला कहलवाने का मेरा आग्रह नहीं है। इस पेशे में उन लोगों की आमद लगातार बढ़ रही है जो या तो अयोग्य हैं या अपनी प्रतिभा का दुरुपयोग कर रहे हैं। समाज के अन्य हिस्सों में जिस तरह कर्तव्यच्युत होने की होड़ लगी हैए उससे यह पेशा भी कितने दिन मुक्त रहता! लेकिन मीडिया और न्यायपालिका जैसे लोकतंत्र के महत्त्वपूर्ण अंगों से उम्मीद की जाती है कि वे पेशे की गरिमा बनाए रखें। वरना ये अगर पटरी से उतरते हैं तो सबसे ज्यादा जिम्मेदार इन्हें ही ठहराया जाएगा।

Thanks to

दीपचन्द सांखला

Previous Post
Next Post

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher