अमेठी में कुछ तो है

जीत की चाहत कैसे हालात बदल देते हैं, इसका उदाहरण पिछले दिनों अमेठी में दि‍खा। बेटे की वि‍रासत पर सि‍यासत भारी पड़ते देख कांग्रेस सुप्रीमों सोनि‍या दस साल बाद अमेठी पहुंच गईं। इंदि‍रा और राजीव की दुहाई दी। हाथ जोड़कर वहां की जनता से राहुल गांधी को वोट देने की अपील की। उनके आने की वजह बेटे का प्रेम था या स्‍मृति‍ और वि‍श्‍वास का बढ़ता जनाधार, यह तो वक्‍त बताएगा। फि‍लहाल दस साल बाद अमेठी में उनकी रैली से कुछ कयासों को बल अवश्‍य मि‍ल गए हैं। लेख को आगे बढ़ाने से पहले जरूरी है कि सोनिया गांधी के उस बयान पर गौर किया जाए- अमेठी के लिए 2004 में ही अपना बेटा दे दिया था। राहुल ने अपनी जिम्‍मेदारी पूरी तरह से निभाई। राहुल को भारी जीत दिलाने के लिए भारी मतदान कीजिए। यह सिर्फ एक भाषण नहीं है बल्कि यह सोनिया गांधी के दिलों-दिमाग में चलने वाला डर भी है। इस भाषण पर चर्चाएं होनी जरूरी भी है क्योंकि यह भाषण जिसके लिए और जो दे रहा था वह ज्यादे महत्वपूर्ण है। दरअसल, यह समझना जरूरी है कि आखिर सोनिया को ऐसी क्या जरूरत पड़ गई कि उन्हें अमेठी जाना पड़ा। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अमेठी में इसबार वि‍पक्षी पार्टि‍यों ने दमदार उम्‍मीदवार खड़े कि‍ए हैं। बीजेपी से स्मृति ईरानी और ‘आप’ से कुमार विश्वास लगातार चुनावी जनसभाएं कर रहे हैं। इन सबको लेकर कांग्रेस सशंकि‍त है। कांग्रेसी जनाधार को बचाने और राहुल गांधी की जीत बरकरार रखने के लि‍ए शायद सोनि‍या भी अमेठी की ओर खिंची चली आईं। एक सच यह भी है कि यह पहली बार है जब अमेठी में कांग्रेस को दमदार चुनौती मिल रही है, जोकि पहले नहीं थी। दस साल में यह पहला मौका है जब अमेठी में राहुल चौतरफा घिरे दिखाई दे रहे हैं। हालांकि राहुल को अमेठी की जनता नकार देगी यह कहना मुश्किल है। इतना जरूर है कि‍ जनता अब वादे के साथ काम चाहती है। इसकी भनक से कांग्रेस संजीदा है। लंबे समय से कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया सही मौके पर चोट करना जानती हैं। इसीलि‍ए उन्‍होंने अमेठी का रुख कि‍या है।

हालांकि‍ यह पहली बार नहीं है कि मुकाबला हाईप्रोफाइल है। इससे पहले भी यह सीट कई रोचक और भावुक मुकाबलों की गवाह रही है। संजय गांधी, राजीव गांधी के बाद राहुल गांधी यहां के सांसद हैं। कांग्रेस के वि‍रासत वाली इस सीट पर देश के पुराने राजनीतिक परिवार की प्रतिष्ठा जुड़ी रही है। पेशे से पायलट राजीव गांधी ने पहली बार यहां से उपचुनाव लड़ा और संसद पहुंचे। इसके बाद वह लगातार 1991 तक इसी सीट से सांसद रहे। 1999 में एक बार फिर यह सीट गांधी परिवार से जुड़ी। इस बार स्वर्गीय राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी ने यहां से चुनाव जीता और पहली बार संसद पहुंचीं।

2004 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी ने यह सीट अपने बेटे राहुल गांधी को सौंप दी और खुद पास की रायबरेली सीट से दावेदारी पेश की। अमेठी की जनता ने गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी के राहुल गांधी को भी जीताकर संसद भेजा। इसके बाद से राहुल गांधी ही यहां संसद चुने जाते रहे हैं और इसबार भी इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

देशभर में अपनी जमीन खिसकने के डर से जूझ रही कांग्रेस राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में भी चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेठी में भाजपा की मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयं सेवक की बढ़ती सक्रियता से ने खुद प्रियंका गांधी वाड्रा को बेचैन कर दिया है। प्रियंका ने चिंता जताई है कि नरेंद्र मोदी ने राहुल को परेशानी में डालने के लिए अपने अहम सिपाहसलार स्मृति ईरानी के लिए बड़े पैमाने पर आरएसएस के कार्यकर्ताओं की गतिविधियां तेज करा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर उन्होंने अब संसदीय क्षेत्र में पार्टी की चुनावी रणनीति को नए सिरे से बदलने की योजना बनाई है। इस नई रणनीति के अब फिर दुबारा पुराने कार्यकर्त्ताओं और मैनेजरों को फिर से लोकसभा सीट में चुनावी कमान सौंपने का निर्णय लिया गया है। राहुल की जीत का अंतर कम करने को लेकर भाजपा की कोशिशों के चलते ही अब राहुल और प्रियंका के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। कहा जा रहा है कि अमेठी में पहले के मुकाबले कुछ नकारात्मक संकेतों को भांपते ही प्रियंका ने सोनिया गांधी की वहां रैली आयोजित करवाई। सोनिया ने वहां पिछले दस साल से कोई रैली नहीं की। यहां से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुमार विश्वास भी मैदान में है। मगर प्रियंका इससे ज्यादा आरएसएस की गतिविधियों से ज्यादा बेचैन हैं।

यानि ऐसा पहली बार हो रहा है या होन लगा है जब संघ अमेठी में सक्रिय है। और सिर्फ इसलिए नहीं कि नरेंद्र मोदी को ‌जीताना है बल्कि इसलिए भी सोनिया गांधी को हराना है। अमेठी की लड़ाई अब सोनिया बनाम मोदी की हो चली है। एक बात तो तय है कि अगर परिणाम राहुल के पक्ष में नहीं आता है तो राहुल के साथ-साथ सोनिया-कांग्रेस की राजनीति का ढलान होगा। तब शायद प्रियंका गांधी राजनीति की मुख्य धारा में आ जाए। इंतजार ‌कीजिए 16 मई का , इंतजार कीजिए अमेठी के परिणाम का।

दीपक कुमार

लेखक अमर उजाला में कार्यरत हैं

9555403291

deepak841226@gmail.com

Previous Post
Next Post
One Comment
hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher