अॅानलाइन शाॅपिंग करतें हैं तो टैक्स के लिये रहें तैयार !

       दोहरा कराधान !

    New Delhi: आप अपने पसंदीदा कलाकार के एलबम को उसकी वेबसाइट से खरीदने और इसे Online-shoppingअपने डिवाइस में सेव करने के लिए 250 रुपये तो चुकाते ही हैं, नए कराधान नियमों के मुताबिक आपको इसके लिए कर भी चुकाना होगा। हालांकि जो रकम काटी जाएगी, उसका हिसाब करना अपने आप में समस्या है। आयकर अधिनियम (चैप्टर 17 बी) के हिसाब से जो कर बनता है और चुकाई गई रकम के 20 फीसदी में से जो भी ज्यादा हो, वही कर की राशि मानी जाएगी। देनदारी का हिसाब लगाते समय आपको यह भी देखना पड़ेगा कि भारत ने उस देश के साथ दोहरा कराधान निषेध संधि जैसा कोई समझौता तो नहीं किया है।

विदेशी वेबसाइट से खरीददारी का नहीं दिया ब्यौरा  तो जुर्माना एक लाख रुपया !

Hand with credit card and a small shopping cart coming from  laptop screen isolated in white

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सीएनके ऐंड एसोसिएट्ïस में पार्टनर गौतम नायक कहते हैं, ‘कानून कहता है कि किसी कंपनी या अनिवासी भारतीय को रॉयल्टी देने वाले व्यक्ति को लेनदेन के दौरान कर काटना होता है।’ उनके अनुसार इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति या कारोबार अगर किसी विदेशी वेबसाइट से सॉफ्टवेयर, म्यूजिक एलबम, ई-बुक, कंप्यूटर गेम खरीदता है तो उसे जरूरी कर काटना होगा क्योंकि कलाकार, लेखक और कंपनी के पास उस उत्पाद का कॉपीराइट है। मामला और भी पेचीदा हो गया है क्योंकि व्यक्तियों और कारोबारों को निवासी भारतीय अथवा कंपनी के साथ होने वाले किसी भी लेनदेन की जानकारी देनी होगी। यानी अगर आप ऐपल ऐप स्टोर, आईट्यून्स, एमेजॉन की वैश्विक वेबसाइटों अथवा ईबे ग्लोबल ईजीबाई से सामान खरीदते हैं तो आपको रिटर्न दाखिल करते समय प्रत्येक सौदे की जानकारी कर अधिकारियों को देनी होगी चाहे उसमें रकम कितनी भी हो। आप इस पर अमल नहीं करते हैं तो कर आकलन अधिकारी आप पर 1 लाख रुपये का जुर्माना थोप सकता है।

लेनदेन 50,000 रुपये से अधिक हो तो दें आयकर को जानकारी !

tax-noticeयदि आप इस बात का पता नहीं लगा पा रहे कि भुगतान सीधे विदेशी कंपनी को किया गया या किसी भारतीय कंपनी के जरिये वहां तक पहुंचा है तो कर विशेषज्ञों के मुताबिक आपको अपने बैंक अथवा क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट का सहारा लेना चाहिए। उनमें स्पष्टï तौर पर बताया जाता है कि सौदा घरेलू था या अंतरराष्टï्रीय। संशोधन आय कर अधिनियम की धारा 195 (6) का हिस्सा है। डेलॉयट हास्किन्स ऐंड सेल्स में पार्टनर विश्वेश्वर मुडिगोंडा कहते हैं कि धारा बदली गई है, लेकिन इस धारा की विशेषताएं जिस नियम (37बीबी) के अंतर्गत आती हैं, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है और फॉर्म (15 सीए और 15सीबी) भी नहीं बदले गए हैं, जिनमें यह ब्योरा दिया जाना है। इससे पहले लोगों और कारोबारों को लेनदेन की जानकारी तभी देनी होती थी, जब कोई एक लेनदेन 50,000 रुपये से अधिक का होता था या साल भर में ढाई लाख रुपये से अधिक के लेनदेन होते हैं।

कर विश्लेषकों ने  नये संशोधनों को ‘अव्यावहारिक’ और ‘अतार्किक’ करार दिया !

incometaxमुडिगोंडा कहते हैं, ‘इससे बड़ा भ्रम हो गया है। आप चाहकर भी कानून का पालन नहीं कर सकते क्योंकि उसके लिए इंतजाम ही नहीं किया गया है।’ उन्होंने कहा कि शुक्र है, सरकार ने पिछले बजट में कर से रियायत में तब्दीली नहीं की। चिकित्सा आपात स्थिति, दान, उपहार, व्यवसाय संबंधित यात्रा के लिए भुगतान छूट के दायरे में बना हुआ है। हालांकि कर विश्लेषकों ने इन संशोधनों का ‘अव्यावहारिक’ और ‘अतार्किक’ करार दिया है, लेकिन इन सभी ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्टï करेगा, क्योंकि यदि कोई व्यक्ति कानून का पालन करने का निर्णय लेता है तो वह ऐसा करने में तब तक सक्षम नहीं हो सकता जब तक कि सरकार नियम और फॉर्म के संबंध में बदलाव नहीं लाती। करदाताओं को वे अभी इंतजार करने की सलाह देते हैं।

    तिनेश भसीन

Vaidambh Media

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