आठ लकड़हारों के समूह में एकमात्र जिंदा बच गए शेखर, करेंगे खुलासा

 Bureau Office/ Hyderabad : शेषाचलम के जंगलों में कथित मुठभेड़ से किस्मत से बच निकले शेखर से मिलने के लिए दिन भर यहां लोगों की भीड़ जुटी रही। भीड़ ने इसके बाद खराब हो रहे दो शवों को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। दो गांवों में जहां के ये लकड़हारे थे, दिन भर मुर्दनी पसरी रही। इनमें से सात वेट्टागिरिपलयम गांव के रहने वाले थे जो शेषाचलम के जंगलों में कथित मुठभेड़ में दूसरी ओर यहां से 60 किलोमीटर दूर जवाधु की की पहाड़ियों में बसे आदिवासियों के गांव जमुनामाथुर में ग्रामीण चुपचाप चारों शवों के अंतिम संस्कार की तैयारियों में व्यस्त रहे। शवों से आ रख्स की पत्नी और तिरुवन्नामलाई जिले के पोलुर की रहने वाली मुनियमम्मल की अर्जी पर हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि शुक्रवार तक शवों को जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल के मुर्दाघर में रखा जाए। याचिका न्यायमूर्ति एम सत्यनारायणन के समक्ष सुनवाई के लिए आई।  घटनाक्रम के बावजूद पूरे दिन शेखर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। खासतौर से तब जब लोगों को पता चला कि वे वेट्टागिरिपलयम के उन आठ लकड़हारों के समूह में शामिल थे जिसमें सात लोगों को कथित रूप से मुठभेड़ में मार डाला गया।

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कोई नहीं जानता कि कब पुलिस उन्हें उठा ले जाए।

शेखर ने गुरुवार को  बातचीत में फिर उस बात को दोहराया जो उन्होंने अपने परिजनों को मंगलवार को बताया था- कि पुलिस ने उन्हें इसलिए छोड़ दिया कि वे बस में एक महिला के बगल में बैठे हुए थे और उन्होंने समझा कि वो मेरी पत्नी है। शेखर ने कहा कि वे पुलिस या अदालत के समक्ष सभी तथ्यों का खुलासा करने के लिए तैयार हैं। हालांकि उनके करीबियों ने कहा कि वे अदालत या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष अपनी बात रखना चाहेंगे ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। शेखर संभवत: 23 अप्रैल को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने अपनी बात रखेंगे। पर पंचायत अध्यक्ष शांता मूर्ति ने कहा कि तब तक शेखर अगर जिंदा बचे रह जाएं तो उन्हें हैरत होगी। गांव तक आने वाली सड़क पुलिस की गाड़ियों से अटी पड़ी है और ग्रामीणों को ‘सांत्वना’ देने के लिए स्थानीय नेताओं की आवाजाही भी शुरू हो गई है। आठ लकड़हारों के समूह में एकमात्र जिंदा बच गए शेखर ने कहा कि उनके अलावा बाकी सभी लोगों को सोमवार की रात को ही पुलिस ने आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु की सीमा से पकड़ लिया था। उधर, माधवन ने कहा कि उन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। शेखर को सुरक्षा की जरूरत है क्योंकि कोई नहीं जानता कि कब उन्हें कुछ हो जाए या रात को पुलिस उन्हें उठा ले जाए।

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