आतंकवाद से लड़ने में कितनी सक्षम है राज्यों की पुलिस ?

New Delhi : साल बदल गए, सरकारें भी बदलती गईं लेकिन आतंक की दहशत जस की तस ही है।police पंजाब के पठानकोट में एयरफोर्स के बेस कैंप पर हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर से माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। एक बात हमेशा जेहन में दौड़ती है कि इतना पैसा खर्च करने के वावजूद हमारे देश के सुरक्षा बल, खुफिया एजेंसियां इन घटनाओं को रोकने में सफल क्यों नही होती। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 26 सालों में देश ने 136 आतंकी हमले झेले हैं। इसमें पठानकोट हमला भी शामिल है।

 

  • हमले जिनसे हिला देश
  • terr
  • 26/11 मुंबई हमला – 166 की मौत 263 घायल
  • मुंबई सीरियल बम धमाके : 12 मार्च, 1993- 12 जगह पर हुए धमाकों में 257 की मौत व 713 घायल
  • अहमदाबाद अक्षरधाम हमला : 24 जुलाई 2002- 31 की मौत, 80 घायल
  • संसद भवन पर हमला : 13 दिसंबर, 2001- 12 की मौत
  • कोयंबटूर बम धमाके : 14 फरवरी, 1998- 60 की मौत 200 लोग घायल
  • दिल्ली सीरियल धमाके : 29 अक्टूबर, 2005- 63 की मौत, 210 घायल
Police-Modernisation

क्या तकनीकी दक्षता है पुलिस में

14 हमले वीआईपी पर,121 हमले आम नागरिकों पर पर, 2000 हजार से ज्यादा मौत, 6000 हजार से ज्यादा घायल

34 हमले पंजाब में, 27 हमले जम्मू कशमीर में, 18 हमले दिल्ली में

  सबसे ज्यादा पंजाब में

सबसे ज्यादा आतंकी हमलें पंजाब (34) में हुए। जिसमें 1990 से लेकर 1992 में ही 31 हमले हुए। इसके बाद 27 जम्मू-कश्मीर में 18 दिल्ली, 13 महाराष्ट्र व यूपी में 6 हमले हुए।

जयपुर भी अछूता नहीं

13 मई 2008 को शहर के उत्तरी हिस्से बड़ी-छोटी चौपड़। जौहरी बाजार, मानक चौक कोतवाली क्षेत्र में एक के बाद एक 9 बम धमाके हुए। इस धमाके में 63 लोगों की जान गई और 216 से ज्यादा घायल हुए।

राज्यों की पुलिस नहीं तैयार

india_haryana_attacks_reuters_आतंक से निपटने के लिए राज्य सरकारों की ओर से विशेष बल एंटी-टेरर स्कवायड (एटीएस) तैनात किए जाते हैं। कुछ राज्यों में विशेष इकाइयां भी हैं लेकिन वो या तो निष्क्रिय है या उनके पास उपकरणों की कमी है। सिर्फ महाराष्ट्र में एंटी-टेरर यूनिट-फोर्स वन है। वहीं हथियार बनाने वाली एक कंपनी ने अपने रिपोर्ट में बताया कि ज्यादातर राज्यों में पुलिस बल के पास दंगा-रोधी सुरक्षा के लिए साजो-समान मौजूद होते हैं, न कि किसी आतंकी हमले का मुकाबला करने के लिए।

भारत में आतंक से लडऩे की कई स्पष्ट नीति नहीं है। आतंकी घटना के ऊपर पहली पहल राज्य पुलिस करती है लेकिन देश भर में पुलिस बल की हालत खस्ता है। जब तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पुलिस सुधार नहीं होता तब तक पुलिस बल अपंग बना रहेगा। ( R.P.)

लेख पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह

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