आम धारणा के उलट अमेरिकी जनता सीधे नहीं करती राष्ट्रपति का चुनाव !

8 नवम्बर को है अमेरिकी राष्ट्पति का चुनाव !

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New Delhi : अमेरिका के राष्ट्रपति बनने की दौड़ में शामिल उम्मीदवारों की सूचना  तमाम  समाचार माध्यमों के जरिये रोज सुनने को मिल जाती हैं । रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलैरी क्लिंटन के बीच हुई बहसों ने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरीं। अमेरिकी चुनाव में ट्रंप या हिलैरी में कोई एक ही जीतेगा  , दोनों देश की दो सबसे बड़ी पार्टियों के उम्मीदवार हैं। लेकिन कई अन्य पार्टियों के उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं मसलन गैरी जॉनसन (लिबरटैरियन पार्टी) और जिल स्टीन (ग्रीन पार्टी) इत्यादि।

कैसे चुना जाता है अमेरिका का राष्ट्रपति ?

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में 18 साल या इससे अधिक उम्र का अमेरिकी वोट दे सकता है। 8 नवंबर को अमेरिका के 50 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के मतदाता वोट देंगे। अमेरिकी चुनाव में आम जनता के मत को “लोकप्रिय वोट” कहते हैं।

                                           कौन चुनेगा राष्ट्रपति ?

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आम धारणा के उलट अमेरिकी जनता सीधे राष्ट्रपति को चुनाव नहीं करती। अमेरिकी मतदाता 8 नवंबर को अपने पसंदीदा राष्ट्रपति उम्मीदवार को वोट देते हैं। जिस उम्मीदवार को जिस अमेरिकी राज्य में सर्वाधिक वोट मिलेंगे उस राज्य के सभी इलेक्टर उसे मिल जाएंगे। यानी हर राज्य से किसी राष्ट्रपति पद के किसी एक उम्मीदवार को सारे इलेक्टर मिलते हैं। इसके बाद सभी राज्यों से चुने हुए इलेक्टर राष्ट्रपति चुनते हैं।  चूंकि लोकप्रिय वोटों की गिनती के साथ ही पता चल जाता है कि किस उम्मीदवार के पास कितने इलेक्टर हैं इसलिए ये साफ हो जाता है कि राष्ट्रपति कौन बनेगा लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई उम्मीदवार राष्ट्रपति इलेक्टरों के मतदान के बाद ही बन पाता है।

कैसे तय होती है इलेक्टरों की संख्या ?

अमेरिका के 50 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के कुल  538 सदस्यों से इलेक्टर कॉलेज बनता है। इलेक्टर की संख्या हर राज्य के सांसदों के समानुपाती होती है। अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के 435 (जनसंख्या के आधार पर 1911 में निर्धारित की गई थीं) सदस्य हैं। सीनेट के 100 (हर राज्य का दो) सदस्य और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के तीन।  इस अनुपात में कुल 538 इलेक्टर चुने जाते हैं।

  ये इलेक्टर  कौन  हैं  ?

इलेक्टर राजनीतिक पार्टियों के सदस्य होते हैं।  कोई सीनेटर या रिप्रजेंटेटिव या किसी भी सरकारी लाभ के पद पर आसीन व्यक्ति इलेक्टर नहीं बन सकता।  हर पार्टी हर राज्य के लिए अपने इलेक्टर चुनती है।  मसलन, इलिनॉय राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी के 20 इलेक्टर हैं और रिपब्लिकन के 20 और इसी तरह बाकी पार्टियों के।

इलेक्टर चुने जाने की प्रक्रिया ?
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हर पार्टी चुनाव से पहले संभावित इलेक्टर चुनती है। हर राज्य में इलेक्टर चुनने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। हालांकि डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी जैसी पार्टियां या तो पार्टी की राज्य इकाई द्वारा नामित किए जाते हैं या पार्टी की केंद्रीय कमेटी उनका चुनाव करती है।

राष्ट्रपति चुनने के लिये सभी इलेक्टर अपने-अपने राज्यों में वोट देतें हैं ?

18 दिसंबर को सभी इलेक्टर अपने-अपने राज्यों में वोट देंगे। जनवरी, 2017 में इलेक्टरों के वोट गिने जाएंगे। और 20 जनवरी 2017 को अमेरिका के नए राष्ट्रपति शपथ ग्रहण करेंगे।  अमेरिका में कुल 538 इलेक्टर हैं। राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को कुल इलेक्टरों के आधे से अधिक वोट हासिल करने होते हैं।

स्पष्ट बहुमत नही मिलनें की स्थिति में ?us7

अगर किसी प्रत्याशी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव  शीर्ष तीन प्रत्याशियों में से राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। सीनेट शीर्ष दो प्रत्याशियों में से उप-राष्ट्रपति का चुनाव करती है। अमेरिकी इतिहास में अभी तक केवल एक बार हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव ने राष्ट्रपति चुना है। 1824 में क्विंकी एडम्स इस तरह राष्ट्रपति चुने गए थे।

हार भी सकता है ज्यादा  ‘लोकप्रिय वोट’  पाने वाला प्रत्याशी ?usa3

चूंकि अमेरिकी जनता सीधे राष्ट्रपति पद का चुनाव नहीं करती इसलिए जरूरी नहीं ह कि ज्यादा लोकप्रिय वोट पाने वाला उम्मीदवार ही राष्ट्रपति बने। अगर किसी प्रत्याशी को किसी छोटे राज्य में जीत मिली है लेकिन बड़े राज्य में हार तो उसके मिलने वाले इलेक्टरों की संख्या कम हो जाएगी। इस तरह वो ज्यादा वोट पाने के बाद भी हार सकता है। मसलन, अगर कोई प्रत्याशी कैलिफोर्निया में चुनाव जीत जाता है तो उसे वहां के कुल 55 इलेक्टर मिल जाएंगे।

अभी तक केवल चार बार ‘ लोकप्रिय वोट’ वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति बन पाया है !

अमेरिकी इतिहास में अभी तक केवल चार बार ऐसा हुआ है कि कम लोकप्रिय वोट पाने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति बना। सबसे ताजा मामला साल 2000 का है जब जॉर्ज बुश ने अल गोर को कम वोट मिलने के बावजूद हरा दिया था क्योंकि उनके पास ज्यादा इलेक्टर थे।

(साभार . जनसत्ता)

 

 

 

 

 

 

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