ऐतिहासिक : कृष्णा – गोदावरी का अभूतपूर्व संगम !

  एक नहर के जरिये आपस में जुड़ गई दक्षिण भारत की गोदावरी -कृष्णा

New Delhi: विजयवाड़ा में बुधवार को जब गोदावरी नदी का पानी प्रकाशम बैराज में  नदी से मिला krishna godavari deltaतो वह भारत में सिंचाई के लिए एक ऐतिहासिक अवसर था। दक्षिण भारत की दो प्रमुख नदियां अब एक नहर के जरिये आपस में जुड़ गई हैं। यह नहर गोदावरी नदी पर ताडि़पुड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना से शुरू होती है। जब निर्माणाधीन पोलावरम बांध का परिचालन शुरू हो जाएगा तब पानी को वहां से प्रकाशम बैराज ले जाया जाएगा। इन दोनों नदियों को जोडऩे का उद्देश्य मोटे तौर पर गोदावरी नदी के उस पानी को इस्तेमाल में लाना है जो बेकार में बहकर बंगाल की खाड़ी में मिल जाता है। इस पानी का 10 फीसदी हिस्सा कृष्णा डेल्टा के पानी की कमी वाले इलाके में स्थित धान के खेतों में किया जाएगा। इससे रायलसीमा के पानी की कमी वाले इलाके को सूखे से निजात दिलाने में मदद मिल सकती है।

नदियों को जोड़ने का सफल प्रयोग !

singur Damइस परियोजना के क्रियान्वयन का श्रेय अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को जाता है जिन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं के लगातार विरोध के बावजूद इसे समर्थन देना जारी रखा। पड़ोसी राज्यों, खासतौर पर ओडिशा और छत्तीसगढ़ ने भी इस परियोजना का विरोध किया था। उनको डर था कि इसमें उनका कुछ इलाका भी डूब में आ जाएगा। आंध्र प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने काम की गति तेज करके यह सुनिश्चित किया कि परियोजना के पूरा होने के पहले ही गोदावरी का पानी कृष्णा डेल्टा तक पहुंच जाए। बहरहाल, गोदावरी-कृष्णा नदियों के आपस में जुडऩे से करीब 2,80,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होने की संभावना है। इसके अलावा कृष्णा और पश्चिमी गोदावरी जिलों में इसे औद्योगिक इस्तेमाल में भी लाया जा सकता है। इसके अलावा कृष्णा डेल्टा के लिए गोदावरी नदी के पानी की उपलब्धता कृष्णा के पानी की बचत करेगी जिसे श्रीसेलम बांध में भंडारित किया जा सकेगा। यह जलाशय आम तौर पर खाली रहता है। इससे रायलसीमा इलाके में सूखे का प्रभाव कम करने में सहायता मिलेगी।

सैकड़ों  नदियाॅ जोड़कर देश को सूखारहित बनाना है उद्देश्य !

krishna godavriगोदावरी-कृष्णा नदी जोड़ वास्तव में अपेक्षाकृत महत्त्वाकांक्षी महानदी-गोदावरी-कृष्णा-पेन्नार-कावेरी-वैगई नदी जोड़ परियोजना का ही एक हिस्सा है। यह व्यापक नदी जोड़ परियोजना दरअसल कहीं उस दीर्घावधि योजना का हिस्सा है जिसके तहत 30 प्रमुख नदी जोड़ और 37 अपेक्षाकृत छोटी अंतरराज्यीय नदी जोड़ों की मदद से देशव्यापी स्तर पर एक ग्रिड तैयार किया जाना है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना पहले ही शुरू हो चुकी है। केन-बेतवा नदी जोड़ के दूसरे चरण तथा महाराष्टï्र और गुजरात में दमनगंगा-पिंजाल और पारा-तापी-नर्मदा नदी जोड़ योजनाओं पर काम जल्दी शुरू हो सकता है। उनकी विस्तृत योजना रिपोर्ट पहले ही तैयार हो चुकी है। राष्टï्रव्यापी ग्रिड तैयार होने के बाद देश की सिंचाई क्षमता मौजूदा 13.9 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 17.5 करोड़ हेक्टेयर से अधिक हो सकती है। इसके समर्थकों का कहना है कि इससे पूरा देश सूखारहित हो जाएगा। लेकिन यह तय नहीं है कि गोदावरी-कृष्णा जैसा अपेक्षाकृत सहज क्रियान्वयन देश के अन्य हिस्सों में हो सकेगा अथवा नहीं।

समस्या से भरपूर है नदी जोड़ परियोजना  !

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गोदावरी-कृष्णा नदी जोड़ परियोजना अन्य नदी जल विकास परियोजनाओं की तरह ही दिक्कतों से एकदममुक्त नहीं है। जो सबसे बड़ी दिक्कत सामने आ सकती है उसमें बड़े पैमाने पर जमीन की डूब भी शामिल है। इसमें कृषि योग्य भूमि, ग्रामीण पर्यावास, पुरातात्विक स्थल और कोयला भंडार आदि शामिल हैं। इसके अलावा हजारों लोगों का विस्थापन भी होगा। जो आबादी विस्थापित हो सकती है उसमें बड़ा हिस्सा जनजातियों का भी है जो प्राय: सुविधाओं से वंचित हैं। अगर उनका समुचित पुनर्वास नहीं कराया गया तो कानून व्यवस्था की चुनौती अनिवार्य तौर पर उभरेगी। यह इलाका नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से दूर नहीं है। ऐसे में उनकी आजीविका सुरक्षित करने पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए।

Vaidambh Media

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