क़ुरबानी: सत्य के मार्ग में अपनी प्रियतम वस्तु न्योछावर करने का प्रण !

हमारा देश विश्व में अनूठा है। यहाॅ पग -पग पर परिव्रर्तन देख सकते हैं,  हम विविधता के पर्याय हैं। देश भर से भेजे गये हमारे संवाददाताओं के रिर्पोट पर एक नजर डालिये ; आापको देश की उस ताकत का अंदाजा लग जायेगा जो विविधता में हमे एक कर जाती है….!

सौहार्द: अयोघ्या में  ईद पर,  तीन दिनों के लिए  हटा लिया जाता है मीट पर प्रतिबंध !

 Ayodhya: मीट पर प्रतिबंध मसले पर जब पूरे देश से कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रहीं हों, वैसे में ayudhyaअयोध्या में मीट को लेकर उठाया गया कदम दूसरे इलाकों के लिए मिसाल बन गया है। मंदिरों की नगरी होने के नाते यहां पूरे साल भर मीट की बिक्री और पके हुए मीट के वितरण पर प्रतिबंध रहता है पर यह प्रतिबंध ईद के मौके पर तीन दिनों के लिए अनाधिकारिक रूप से हटा लिया जाता है।

 

   राजनीति:  दंगे ने  संत कबीरनगर  के मुसहरा में कुर्बानी पर लगवा दिया प्रतिबंध  !

sant kabeer nagar    दूसरी ओर यहां से सिर्फ 100 किमी दूर स्थित संत कबीर नगर के मुसहरा के लोग ईदुल-जुहा के मौके पर कुर्बानी की रस्म के लिए अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। वर्ष 2007 के दंगे के बाद संत कबीरनगर प्रशासन ने मुसहरा में कुर्बानी पर प्रतिबंध लगा दिया था। अयोध्या म्युनिसपल बोर्ड के आदेश के तहत यहां ईद के तीन दिनों को छोड़कर मीट की बिक्री और पके हुए मीट के वितरण पर प्रतिबंध रहता है। पर ईदुल-जुहा के मौके पर मुसलमान यहां कुर्बानी करते हैं और मीट बांटते हैं। अयोध्या के मुस्लिम कहते हैं कि किसी भी साधु या महंत ने कभी भी इस पर आपत्ति नहीं जताई। यहां रहने वाले मुस्लिम कहते हैं कि वे पीढियों से बिना किसी अड़चन के कुर्बानी की रस्म अदायगी करते आ रहे हैं। कभी कोई समस्या नहीं हुई। अयोध्या म्यूनिसपल बोर्ड के कॉरपोरेटर हाजी असद अहमद कहते हैं कि जहां तक हमें याद है हम हमेशा से कुर्बानी करते रहे हैं। मुसलमान परिवार बिना किसी भय के यह कुर्बानी देते हैं।

               ईद-उल-जुहा:  ईदगाह में मुख्य नमाज 

Jaipur : अल्लाह की राह में अपनी प्रिय वस्तु कुर्बान करने के लिए शुक्रवार को ईद-उल-जुहा मनाई जाएगी। चीफ काजी खालिद उस्मानी शुक्रवार सुबह 8.45 बजे दिल्ली बायपास स्थित ईदगाह में मुख्य नमाज अदा कराएंगे। जौहरी बाजार जामा मस्जिद समेत अन्य मस्जिदों में भी नमाज होगी।
 हज और ईदुल अज़हा

faizabadहज यात्रा के दौरान मक्का (सऊदी अरब का एक शहर) और उसके आस-पास कई कार्य किये जाते हैं। हज जि़लहिज्जा महीने की 8 तारीख़ से 13 तारीख़ के बीच सम्पन्न होता है। हाजी अपना इहराम (सफैद वस्त्र) पहन कर तल्बियह “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक……ज् (हाजि़र हूँ, ऐ अल्लाह मैं हाजि़र हूँ, मैं हाजि़र हूँ, तेरा कोई साझी नहीं मैं हाजि़र हूँ, बेशक सारी प्रशंसा तेरी ही है और तेरा ही अनुग्रह है और बादशाही भी तेरी ही है, तेरा कोई साझी नहीं है) का उच्चारण करते हुए हरम (पवित्र परिसर) में प्रवेश करते हैं। 8 ज़िलहिज्जा को मिना पहुँचते हैं वहाँ ईश्वर का स्मरण करते दिन बिताते हैं।

49 कंकरियाँ : प्रत्येक कंकरी के साथ  अपनें अंदर की बुराइयों को त्यागने का प्रण !
1 ज़िलहिज्जा को अराफ़ात पहुँचते हैं और वहाँ खड़े रह कर ईश्वर की आराधना करते हैं जिसे “वकूफ़ अल अराफ़हज् कहते हैं। खड़े रहना अनिवार्य नहीं है, हाजी यहाँ बैठते, बातें करते और खाते-पीते भी हैं। कुछ लोग निकट की पहाड़ी “जबल-अर्रहमहज् पर चढ़ जाते हैं। इसी पहाड़ी के दामन में खड़े हो कर अन्तिम ईश-दूत हज़रत मुहम्मद स. ने अपना प्रसिद्ध भाषण च्ख़ुत्बा-ए-हज्जतुल विदाज् दिया था।
वापसी में मुज़्दलिफ़ा में रात बिताते हैं जहाँ से 49 कंकरियाँ एकत्रित करते हैं। दूसरे दिन (10वीं तारीख़) सुबह मिना की ओर कूच करते है जहाँ तीन खम्भे नुमा आकृतियों को मुज़्दलिफ़ा से चुनी गई कंकरियाँ मारते हैं। इस क्रिया को च्रमी-ए-जिमारज् कहा जाता है। ईशदूत हज़रत इब्राहीम जब अपने पुत्र को बली देने के इरादे से ले कर जा रहे थे तो शैतान ने उन्हें तीन बार रोकने का प्रयत्न किया था। ये खम्भे उन्ही तीन स्थानों पर बने हुए हैं जिन पर कंकरियाँ मार कर हाजी यह प्रकट करते हैं कि वे शैतान के नहीं इबराहीम अलैहिस्सलाम के रास्ते पर चलेंगे। प्रत्येक कंकरी के साथ वे अपनं अंदर की बुराइयों को त्यागने का भी प्रण करते हैं।
   विदाई तवाफ़ (परिक्रमा) के साथ पूरा होता है हज  !

Gate_of_Ka-bahजि़लहिज्जा को क़ुरबानी की जाती है, इसी दिन को “ईदुल अज़हाज् या “ईदुद्दुहाज् कहते हैं। यह क़ुरबानी इबराहीम अलैहिस्सलाम के उस महान त्याग की याद में की जाती है जिसमें वे अल्लाह की राह में अपने इकलौते पुत्र को क़ुरबान करने के लिये तैयार हो गये थे, परन्तु इस से पहले ही ईश्वर ने दुम्बा (भेड़ जैसा एक जानवर) भेज कर उसकी बलि देने का आदेश दिया था। यह क़ुरबानी वास्तव में इस बात का प्रण है कि आवश्यकता पड़ी तो सत्य के मार्ग में अपनी प्रियतम वस्तु भी न्योछावर कर देंगे। इसके बाद हाजी अपना इहराम उतार कर साधारण वस्त्र पहनते हैं और सिर मुंडवाते हैं।
फिर सात बार काबा की परिक्रमा की जाती है और सफ़ा व मरवा पहाडियों के बीच दौड़ लगाई जाती है। 11 और 13 तारीख़ों के बीच फिर से मिना जाते हैं और बची हुई कंकरियां जमरात को मारते हैं फिर विदाई तवाफ़ (परिक्रमा) के साथ हज पूरा होता है।

…जब शिया और सुन्नी बकरीद के मौके पर एक साथ इमामबाड़ा में पढ़ेेंगे नमाज !
 Lucknow: राजधानी में ऐसा पहला मौका होगा जब शिया और सुन्नी बकरीद के मौके पर एक साथ lucknowइमामबाड़ा में नमाज पढ़ेेंगे। शोल्डर टू शोल्डर नाम की मुहिम के तहत इसका आयोजन किया जा रहा है, जिसका मकसद आपसी विवाद को मिटाकर पूरी दुनिया को एकता और भाईचारे का संदेश देना है।
बकरीद के एक दिन पहले गुरुवार को शहर के बाजारों में खूब रौनक रही। लोगों ने जमकर खरीदारी की। नक्खास, चौक, डालीगंज और अमीनाबाद जैसे बड़े बाज़ारों में पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी खूब खरीदारी की। इस दौरान बाजार सिंवई, मेवा, ज्वैलरी शॉप और कपड़ों की दुकान खरीदारों से भरी रही। इस बकरीद पर जहां महिलाओं में कुर्ते के साथ प्लाजो और स्कर्ट पहनने का ट्रेंड है, वहीं पुरुष बजरंगी भाईजान फैशन के कुर्ते-पैजामे और नागरे पसंद करते नज़र आ रहे हैं।
यहां अदा होगी……. ईद-उल-अजहा की नमाज़
दारुल उलम अनवारे रमजान नगर तेलीबाग़ में 6 : 45
सदर जामा मज़्ज़िद तेलीबाग़ बाजार लखनऊ में 9 बजे
नूरी मज्जिद आजाद लेन तेलीबाग़ में 8 बजे मज्जिद कैलाश पूरी डी गली नंबर 4 जेल रोड आलमबाग में 8 बजे
मज्जिद कालम वाली तोपखाना कैंट 8 : 30 बजे
कुरैशी मज्जिद मोहमद नगर CRPF कॉलोनी बिजनौर में 8 बजे
ईदगाह तोप खाना बाजार कैंट में 9 बजे
ईदगाह नगराम थाना नगराम में 9 बजे
अमर मज्जिद PGI में 9 बजे

ईद की खुशियां हुई दूनी !

New Delhi:  ईद की खुशियों का संग आज दाऊदी बोहरा समाजजनों की हज भी पूरी हो गई। एक eid-ul-adha-in-india-7साथ दो खुशियां पाकर पूरा समाज उत्साहित दिखाई दिया। सभी ने एक दूसरे को गले मिलकर मुबारक बाद दी। बुधवार सुबह 6.30 बजे शहर के बुरहानी मोहल्ला, सेफी मोहल्ला, कलीमी कॉलोनी, लक्कड़पीठा, फ्रीगंज, बैंक कॉलोनी, नजपपुरा आदि मोहल्ला में स्थित मस्जिदों में ईद की नमाज अदा की गई। आमील साहब शेख तैय्यब भाई मदार, शेख अलीअसगर भाई पूनावाले एवं मुल्लाह हुसैन भाई के सान्निध्य में दाऊदी बोहरा समाजजनों ने मुल्क में अमन और शांति की दुआ की। इसके बाद परम्परानुसार कुर्बानी की रस्म अदा हुई।

चांदनीचौक क्षेत्र में बच्चों ने लगाया  मेला  !

chandani chukसमाज के सलीम आरिफ ने बताया कि बुधवार को दाऊदी बोहरा समाज की ईद उत्साह पूर्वक मनाई गई। सुबह नमाज के बाद एक दूसरे से गले मिलकर मुबारक बाद दी गई। साथ ही आज मक्का मदीना में जो भी यात्री गए थे, उनकी भी हज पूरी होने की खुशियां मनाते हुए बधाई संदेश भेजे गए।
बच्चों के लिए लगा मेला ईद के मौके पर बच्चों के लिए चांदनीचौक क्षेत्र में मेला लगाया गया। जिसमें झेलू, बलुन खेल खिलौनों के साथ खान-पान की लगी स्टॉलों का उन्होंने जमकर आनंद उठाया। नवीन वस्त्र पहने बच्चे परम्परागत टोपियां पहने सज-धज कर मेला परिसर में मित्रों के साथ घुमते नजर आए। कोई गोलगप्पे तो कोई चाट का आनंद उठा रहा था।
मुस्लिम समाज की ईद 25 को !
काजी अहमदअली साहब ने बताया कि मुस्लिम धर्मावलंबी ईद नमाज 25 सितंबर को पुरानी ईदगाह पर सुबह 9 बजे अदा करेंगे। सुबह 8 बजे काजी हाउस से चल समारोह निकलेगा, जो विभिन्न मार्गों से होता हुआ ईदगाह पहुंचेगा। यहां ईद की नमाज के बाद कुर्बानी की रस्म अदा की जाएगी। इसी प्रकार नई ईदगाह पर हाफीज इस्माईल साहब द्वारा सुबह 8.30 बजे ईद की नमाज अदा करवाए जाएगी .

Vaidambh Media

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