कामगारों पर कसा शिकंजा : अब यूनियन बनाना मुश्किल

नेपाल में आये भूकम्प क्षेत्र में मजदूरों को कर्तब्य याद नही दिलाना पड़ा, 1 मई को भी काम पर डटे हैं..

importentअंतर्राष्ट्रीय मई दिवस पर मजदूरों के हित की र्चचा चहुॅओर की जायेगी। विश्व भर के लोग जिन्हे मजदूरों की सबसे अधिक जरुरत है उनके हितों की बात करेंगे। सरकार और कारपोरेट के बीच में पिसता मजदूर अपनें पुराने घाव पर अभी मरहम नहीं लगा पाया होता है तब तक दूसरा घाव बना दिया जाता है ताकि वह अपने अभावग्रस्त जीवन में घावों से ही परेशान रहे। तकनीक के युग में मानव श्रम को दोयम बताने वाले सफेदपोश पूरे विश्व में एक साथ है पर दुर्भाग्य हे कि मजदूर आज भी मजबूर है। 

  NewDelhi:  कामगारों के लिए यूनियन बनाना अब मुश्किल होने वाला है। कम से कम बड़ी कंपनियों में तो इसकी गुंजाइश खत्म ही हो सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों को कुछ खासा परिस्थितियों में कंपनी परिसर अथवा प्रबंधन अधिकारियों के आवास पर विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत भी नहीं होगी। दरअसल केंद्र सरकार एक प्रस्ताव ला रही है, जिसके मुताबिक यूनियन बनाने के लिए कुल कामगारों में से 10 फीसदी अथवा कम से कम 100 कामगारों की जरूरत होगी। अभी किसी कामगार संगठन के 7 अथवा अधिक सदस्य मिलकर यूनियन बनाने की अर्जी डाल सकते हैं, चाहे उनकी कंपनी कितनी भी बड़ी या छोटी हो।

mazdurअब केवल कंपनी में काम करने वालों को ही यूनियन बनाने की मंजूरी होगी और असंगठित क्षेत्र में बाहर के केवल दो लोग यूनियन में शामिल हो सकते हैं। जिन कारखानों में 70 कर्मचारी काम करते हैं, उनमें कामगार यूनियन बनाने के लिए कम से कम 7 कर्मचारियों की जरूरत होगी। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने मजदूर यूनियन अधिनियम, औद्योगिक विवाद अधिनियम और औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम को मिलाकर औद्योगिक संबंधों का एक ही कानून बनाने का प्रस्ताव रखा है।

यूनियन बनाने की गुंजाइश ही नहीं बचेगी

स्वाभाविक रूप से मजदूर संगठन इसे कर्मचारी हितों के विरुद्घ बता रहे हैं। राष्टï्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्घ भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष एम जगदीश्वर राव ने कहा, ‘केंद्र कामगारों के हितों की अनदेखी कर रहा है। कई राज्य सरकारें पहलेbangaru datta ही ऐसे प्रस्ताव रख चुकी हैं और अब केंद्र भी यही कर रहा है। यह प्रस्ताव मंजूर किया गया तो यूनियन बनाने की गुंजाइश ही नहीं बचेगी। इसके लिए 100 कामगारों को लेकर श्रम विभाग तक जाना आसान नहीं होगा।’ अलबत्ता उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि कामगारों के तमाम नुमाइंदे होते हुए भी भारत कामगारों के हितों की रक्षा में काफी पीछे है। टीमलीज की सह-संस्थापक एवं वरिष्ठï उपाध्यक्ष ऋतुपर्णा चक्रवर्ती कहती हैं, ‘देश में ढेरों कर्मचारी यूनियन भी कामगारों के हितों की रक्षा नहीं कर सके हैं। हमें जिम्मेदार यूनियनों की जरूरत है।’ भारत में पिछले कुछ वर्षों में श्रमिक संघों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 1991-93 तक भारत में 2,21,871 पंजीकृत यूनियन थे, लेकिन 2005-08 में आंकड़ा करीब 55 फीसदी बढ़कर 3,47,330 हो गया।यह आंकड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट ने अपनी ‘इंडिया लेबर ऐंड इंप्लॉयमेंट रिपोर्ट 2014’ के लिए जुटाया था।

 हड़ताल अवैध !

केंद्र सरकार इन प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए 6 मई को श्रमिक संगठनों और उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगी। india-and-child-labor1राव ने कहा कि श्रमिक संगठन एक स्वर में इस कदम का विरोध करेंगे। कामगार यूनियन बनाने में देरी रोकने के लिए एक अन्य प्रस्ताव है कि अगर सरकार के समक्ष आवेदन करने के दो महीने में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन को खुद ही पंजीकृत माना जाएगा। श्रमिकों और प्रबंधन के बीच बातचीत के दौरान कर्मचारी जानबूझकर काम की गति ‘कम’ नहीं कर सकेंगे, नियोक्ताओं का घेराव नहीं कर सकेंगे और परिसर या नियोक्ता के घर के बाहर प्रदर्शन भी नहीं कर सकेंगे। ऐसा हुआ तो उसे ‘अवैध हड़ताल’ करार दिया जाएगा। सीटू के अध्यक्ष ए के पद्मनाभन ने कहा, ‘श्रम कानूनों के लिए विभिन्न संहिता तैयार करने का मकसद श्रमिकों के लिए प्रावधानों को बहुत नरम बनाना है।’

        D.J.S.

Previous Post
Next Post

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher