काम के छः महीने बाद भी नहीं मिली मनरेगा मज़दूरी

ब्यूरो ,भदोही।  जनपद के सुरियावां ब्लॉक के महदेपुर ग्राम पंचायत के मनरेगा के मजदूरों की काम के समाप्ति के 6 माह बाद भी पूरी मजदूरी का भुगतान ना होने के कारण समस्त मजदूरों मे आक्रोश व्याप्त है । एकता परिषद ,जन सहयोग मंच तथा सामाजिक संस्था विडियो वाँलंटियर्स के अगुवाई में उपरोक्त मामले को लेकर आयोजित मनरेगा पंचायत में आज महदेपुर गाँव में भारी संख्या में मनरेगा मजदूरों ने एकजुट होकर सुरियावां ब्लाक के अधिकारियों पर अपना आकोश व्यक्त करते हुये इस घटना के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के सहित ग्राम प्रधान को जम कर कोसा । 

एकता परिषद ग्राम कमेटी के मुखिया यशूलाल सरोज ने पूरे मामले पर प्रकाश डालते हुये बताया कि सुरियावां ब्लॉक के महदेपुर ग्राम पंचायत में 160 मनरेगा मज़दूरों से 23/12/2013 से 21/02/2014 तक गाँव में बन रहे तालाब में मनरेगा अधिनियम के तहत तालाब की ख़ुदवाई का काम करवाया गया था । परंतु बहुत अफसोश की बात है कार्य पूरा हो जाने के पश्चात इनकी मज़दूरी के भुगतान हेतु जिम्मेदार अधिकारियों के निरंकुशता, लापरवाहियों तथा संवेदनहीनता के चलते इन मज़दूरों की मज़दूरी का वित्तीय वर्ष 31 मार्च-2014 के समाप्ति तक भुगतान ना हो सका जिससे इन मजदूरों ने बेचैन होकर प्रधान से लेकर ब्लाक के अधिकारियों तक के चक्कर काटने शुरू किये । 

 16 अप्रैल को  अनिल की अगुवाई मे 15 पीड़ित मज़दूरों ने बी॰ डी॰ ओ॰ साहिबा को लिखित प्रार्थना पत्र देकर उनसे मजदूरी के भुगतान हेतु अनुरोध किया परन्तु ब्लाक से सिवाय आश्वासन के कुछ भी नही मिला ।  इन मजदूरों की कही भी सुनवाई ना होते देख  सामाजिक संगठनो ने  इन मज़दूरों की लड़ाई को अपना समर्थन देते हुये उपरोक्त संस्थाओं तथा मजदूरों के 20 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल के माध्यम से जुलाई के प्रथम सप्ताह में जिलाधिकारी कार्यालय में जाकर जिलाधिकारी को एक मांग पत्र देकर उपरोक्त मामले में दखल का अनुरोध किया ।  तत्पश्चात इन मजदूरों की मजदूरी का भुगतान तो हुआ लेकिन पूरी मजदूरी नहीं मिली ।  अब एक तिहाई से भी कम मजदूरी मिलने से अब इन मज़दूरों में घोर निराशा तथा जबर्दस्त आक्रोश है । 

एकता परिषद उत्तर प्रदेश के संचालक सदस्य द्धिजेन्द्र विश्वात्मा ने कहा कि जब इस मामले में लगातार संघर्ष के बाद ये हाल है तो इस ब्लाक में बाकी मनरेगा के मजदूरों का क्या हाल होगा ।  उन्होंने पूरी मजदूरी ना मिलने पर इस घटना के जिम्मेदारो पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुये कहा की ऐसे ही निरंकुश और लापरवाह अधिकारियों के कारण ये अतिमहत्वाकांक्षी मनरेगा कानून सिर्फ कागज़ी कानून बन कर रह गया है । ऐसे लापरवाह लोगो के करण मजदूरों का मनरेगा से मोह भंग होता जा रहा है और वो शहरों की ओर पलायन कर रहे है । सूखे और अकाल के बीच मनरेगा का ये हाल वंचित समुदायों की बेबसी का मज़ाक उड़ा रही है। उन्होंने कहा की हम सरकार से माग करते है की मजदूरों की समस्त मजदूरी का तत्काल भुगतान किया जाय । 

विडियो वाँलंटियर्स के राज्य समन्वयक अंशुमान सिंह ने कहा  कानूनन कार्य समाप्त होने के 15 दिनों के अंदर इस मज़दूरी का भुगतान हो जाना चाहिये था । ऐसे अधिकारियों को तो तत्काल बर्खास्त कर दिया जाना चाहिये । 

 

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