कौन है नगर-निगम मे काम-काज ठप कराने का जिम्मेदार!

गोरखपुर। नगर निगम प्रशासनं से शहरी जनता को हर क्षंण काम रहता है। जन्म से मृत्यु, कर, सुविधा आदि बहुत सारे मामलों का निस्तारण यहाॅ होता है। यहाॅ जनता द्वारा बहुमत के आधार पर चुनकर प्रतिनिधि आते हैं जो जनता से तमाम वादे करके यहाॅ पहुॅचते हैं। नगर निगम गोरखपुर बड़े राजस्व वाला महानगर है। यहाॅ जनप्रतिनिधि (पार्षद) अपने बाहुबल का प्रयोग बड़े अधिकारी अथवा कर्मचारी पर कर दे ंतो बात बहुत मामूली समझा जाता है। यदि ऐसा कोई दृश्य आपके सामने इस परिसर में नजर आए तो इसे आम बात मानकर भूल जाइएं। पार्षदगण के अनुशासन की झलक सदन की कार्रवाई में भी अक्सर देखी जा सकती है। नगर निगम में पार्षद यदि इतने उदण्ड हैं तो कर्मचारी भी उनसे किसी भी मामले में कम नहीं है। जैसे ही मौका मिलता है किसी फाइल में अपनी करामात दिखा देते हैं। लिहाजा दोनों के बीच एक लकीर बराबर खिंची रहती है। पिछले दिनो पार्षदों का समूह कर्मचारियों के विरोध में बाहर नारेबाजी कर रहा था और कर्मचारी सभी विभागों में तालाबंदी कर हडताल पर थे। बीते बुधवार को महाशिवरात्रि पर्व की छुट्टी मनाकर जब पुनः कर्मचारी व पार्षदगण नगर निगम परिसर पहुंचे तो तालाबंदी और जिन्दाबाद-मुर्दाबाद के नारों के सिवाय यहां कोई और काम नहीं हुआ। जनता के पास सप्ताह भर निराश लौटने के सिवा कोई चारा नही था। इस बीच निगम के आला अधिकारी कार्यालय आते जाते रहे लेकिन उन्होंने इन मामलों में हस्ताक्षेप जरूरी नहीं समझा। सप्ताह भर काम ठप रहने के बाद महापौर डा. सत्या पाण्डेय की संवेदना जगी उनको लगा कि जनता का काम बाधित हो रहा है जिसने हमें समस्या का निपटारा करने के लिये चुन के भेजा है। उन्होने मामले का संज्ञान लिया । दोनों तरफ से अपने-अपने पक्ष को लेकर नारे लग रहे थे। महापौर ने मुस्कराकर कहा कि ‘अभी तुम्हारी अंगडाई…’ ठीक करते हैं यह अंदाज भी कर्मचारियों के लिए किसी धमकी की तरह लगा। इस पर कर्मचारी उग्र हो गये। पार्षदों ने समझा कि महापौर ने उनका सहयोग किया है। फिर कुछ चापलूस पार्षद ताला तोड़कर चैम्बर हथियाकर बैठ गये। इस पर कर्मचारियों को लगा कि उनकी मान-हानि हुयी है। वे महापौर के सामने पहुंचकर नारे लगाने लगे, यह ड्रामा घंण्टों तक चलने के बाद प्रशासन व पुलिस मौके पर पहुंची आखिरकार दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर जब प्रशासन व महापौर यह समझाने में सफल हुए कि पार्षद व नगर निगम कर्मचारी एक दूसरे के सहयोग पर आधरित है , मान-सम्मान दोनो पक्षांे का रखना होगा , तब जाकर नगर निगम का वातावरण पुनः सामान्य हुआ। कब तक ऐसा रहेगा, इसके बारे में कोई दावा नहीं किया जा सकता।

nagar nigam
क्यों था नगर निगम मे धरना का माहौल?
नगर निगम के एक पार्षद की गत 12 फरवरी को निगम के एक कर्मचारी से हाथापाई हो गई थी। पार्षद का आरोप था कि उक्त कर्मचारी और उसके कुछ सहयोगी सरकारी सेवक होने के बावजूद ठेकेदारी कर रहे हैं। इससे नगर निगम और उससे जुड़ी जनता का कार्य प्रभावित हो रहा है। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई थी। उस समय तो बीचबचाव कर मामला शांत हो गया। बाद में कर्मचारियों और पार्षदों की अलग अलग बैठक हुई। इसमें बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया गया । दूसरे दिन नगर निगम के कर्मचारी लामबंद हो गए। उन्होंने उक्त पार्षद के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग करने लगे। इसको लेकर निगम के कर्मचारियों ने सभी अनुभागों यहां तक कि मेयर और पार्षद चैम्बर में ताला जड़ दिया था। बुधवार को पार्षद एक जुट होकर नगर निगम पहुंचे और अपने चैंबर में लगे ताले को तोड़कर अंदर जाकर बैठ गए।इस बात को लेकर निगम के कर्मचारियों का हंगामा शुरू हो गया। फिलहाल अब स्थिति सामान्य है, गुरूवार को कर्मचारियों ने कामकाज किया। पार्षद भी अपने कक्ष में दिखाई दिये। हालांकि कुछ अधिकारी पार्षदों से घण्टों अपने कार्यालय में इधर-उधर की बातें सुनते और सुनाते मिले।

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