खाद्य संकट के मुहाने पर नेपाल !

संविधान में भेद- भाव का विरोध !

 Lumbinee (Nepal) :  भारत का सबसे नजदीकी पड़ोसी राष्ट्र नेपाल अपना संविधान लागू करके सफल लोकतंत्र संचालन करनें में जुटा हुआ है , पर उसके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा उसका अपना भूगोल और उसमे निवास करने वाले लोग हैं । नेपाल के उत्तर मे चीन का स्वायत्तशासी प्रदेश तिब्बत है india-nepal-road-tripऔर दक्षिण, पूर्व व पश्चिम में भारत अवस्थित है। नेपाल के ८१ प्रतिशत नागरिक हिन्दू धर्मावलम्बी हैं। नेपाल विश्व का प्रतिशत आधार पर सबसे बड़ा हिन्दू धर्मावलम्बी राष्ट्र है। नेपाल की राजभाषा नेपाली है और नेपाल के लोगों को भी नेपाली कहा जाता है।नेपाल की कुल लम्बाई करीब 800 किलोमीटर और चौड़ाई 200 किलोमीटर है। नेपाल का कुल क्षेत्रफल 147181 वर्ग किलोमीटर है। नेपाल भौगोलिक रूप से तीन भागों में विभाजित है– पर्वतीय क्षेत्र, शिवालिक क्षेत्र और तराई क्षेत्र ।इसका भैगोलिक विस्तार समझने के बाद स्पष्ट होता है कि मैदानी क्षेत्र के लोग देष के लिये कितने अहम हैं। ऐसे में वर्तमान संविधान से असंतुष्ट मैदानी क्षेत्र के लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिये लम्बी अवधि से आन्दोलन कर रखा है। पर सरकार इनके विरोध को नजरंदाज कर इन पर जबरिया कानून थोप रही है जो इन्हे मंजूर नहीं।
 संविधान संशोधन की मांग , बंद किया पहाड़ी इलाकों का हुक्का पानी !

अब संविधान संशोधन की मांग को लेकर मधेसियों ने नेपाल के पहाड़ी इलाकों की नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। मधेसी संगठन जगह-जगह धरना प्रदर्शन कर लोगों को नाकेबंदी में भाग लेने की सलाह दे रहे हैं। nepal madheshiइसके चलते पहांड़ों पर जाने वाले खाद्य पदार्थों व अन्य जरूरी चीजों का अभाव हो गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार काठमांडू में सिर्फ एक सप्ताह के लिए पेट्रोल का भंडार बचा है।
मधेसियों की हड़ताल के 51 वें दिन सोमवार को तराई के इलाकों में मधेसी संयुक्त मोर्चा व अन्य संगठनों द्धारा नाकेबंदी का एलान कर दिया गया है। इसके तहत भारत से होकर कोई भी सामान नेपाल के उत्तरी दलाके में नहीं जाने दिया जा रहा है . नेपाल को नमक सब्जी से लेकर पेट्रो पदार्थ आदि सभी कुछ भारत के सोनौली, बढ़नी, रुपईडीहा बीरगंज आदि बार्डर से भेजा जाता है। मगर अब मधेसी संगठन इन बार्डरों पर नजर रख रहे हैं। वह कोई भी ट्रक नेपाल के अंदरूनी हिस्से में नहीं जाने दे रहे है। इसके चलते नेपाल के काठमाडू, पोखरा, मुगलिंग, स्यागंजा, साल्यान आदि पहाड़ी इलाकों में कोई भी सामान नहीं पहुंच पा रहा है।

काठमांडू में र्सिफ एक सप्ताह के लिए बचा है पेट्रोल !
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राजधानी काठमांडू व पोखरा जैसे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थलों पर जरूरी चीजों की भारी कमी महसूस की जा रही है। सर्वाधिक संकट डीजल व पेट्रोल का है। नेपाल के वरिष्ठ अधिकारी के.पी. थापा के मुताबिक काठमांडू में र्सिफ एक सप्ताह के लिए पेट्रोल बचा है। खबर है भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय समस्या के हल के लिए काठमांडू पहंच गये हैं। कल उन्होंने मधेसी बहुल क्षेत्र तौलिहवा का दौरा किया, लेकिन मधेसी अपने फैसले पर अटल है। मधेसी संयुक्त मोर्चा के नेता सहसराम यादव का कहना है कि नेपाल के नीति निर्माताओं को सबक सिखाने का यही एक तरीका बचा है । नकेबंदी को लेकर समूचे तराई बेल्ट में बार्डरों पर धरना और ग्रामीण इलाकों में जनजागरण जारी है। शनिवार को कपिलवस्तु में धरना हुआ तो शुक्रवार को रजत प्रताप शाह के नेतुत्व में बहादुरगंज इलाके में साइकिल यात्रा निकली।  फिलहाल नेपाल खादृय संकट के मुहाने पर आ पहुॅचा  है।

 शिवपूजन नेपाली

VaidambhMedia

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