खुुशखबरी: चीन खरीदेगा हस्तनिर्मित भारतीय कालीन !

इंडिया कारपेट एक्सपो में चली बात, चीन के बाजारों पर राज करेगी भरतीय कारीगरी!

 Bhadohi :   भारतीय बाजार का प्रतिद्वंद्वी चीन , भारतीय हस्तनिर्मित कालीन को दिल दे बैठा !indian carporate expo    निकट भविष्य में वाराणसी, भदोही और मिर्जापुर के परंपरागत कालीन उद्योग के दिन संवरने जा रहे हैं, क्योंकि यहां के हस्तनिर्मित और उम्दा बुनकारी और कारीगरी वाली कालीन चीन के बाजारों पर राज करने की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए चीन के ब्यूरो ऑफ कॉमर्स ,भारतीय कालीन आयात के लिए कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के साथ शीघ्र ही एक करार पर हस्ताक्षर करने जा रहा है।

भारतीय कालीनों के लिए चीन एक उम्दा बाजार बनेगा !

भारतीय कालीनों के लिए चीन एक उम्दा बाजार बनेगा !corpate varanshi वाराणसी में वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से कालीन निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा आयोजित कालीन मेला (कारपेट एक्सपो 2015) के दौरान परिषद के अध्यक्ष कुलदीप राजबाटल ने वैदम्भ मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि चीन में हस्तनिर्मित कालीन का उत्पादन नहीं होता जबकि चीन में हस्तनिर्मित कालीनों को प्राथमिकता मिलती है, इसलिए भदोही व आस-पास के जिलों में कालीन उत्पादकों को काफी संभावनाएं है ।चीन के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का मेले में उपस्थिति व सहमति ने यहां के निर्यातकों में कारोबार की उम्मीद व उत्साह जगा दिया है। सीईपीसी के अध्यक्ष के मुताबिक , कालीन उद्योग में ईरान भारतीय कालीन उद्योग का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी है लेकिन वह सीमित किस्म के ही कालीन बनाता है जबकि भारत में कालीन उत्पादनों में असीमित कालीन बनते हैं ; जिससे वहां भारत के लिए कई अवसर मौजूद है । उनका मानना है कि जब से कारपेट एक्सपो की शुरुआत हुई तब से हस्तनिर्मित कालीन के निर्यात में मदद मिली है।????????????????????????????????????

30वें इंडिया कारपेट एक्सपो अंतिम दो दिन रहे बहुत  खास !

वाराणसी में आयोजित 30वें इंडिया कारपेट एक्सपो के लिए अंतिम दो दिन बहुत ही खास रहे। मेले में चीन के इवो शहर के ब्यूरो ऑफ कॉमर्स के महानिदेशक वेंग वी रोंग के नेतृत्व में आए 8 सदस्यीय शिष्टïमंडल ने इसकी घोषणा की। इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल ने कालीन निर्माता-निर्यातकों और कारीगरों से मुलाकात पर अपने अनुभव  साझा किए। रोंग ने बताया कि भारत की हस्तनिर्मित कालीनों की दुनिया भर में मांग है। उन्होनें बताया कि भारतीय कालीन , इवो शहर में बेचा जाए तो इसके सार्थक परिणाम निकलेंगे और भारत का निर्यात भी बढ़ेगा।

 नहीं हैं  चीन में भारत जैसे कारीगर  !

carpet makerसीईपीसी के अध्यक्ष कुलदीप राजवाटल के अनुसार चीन में हस्तनिर्मित कालीनों का निर्माण न होने से भारतीय कालीनों के लिए चीन प्रमुख बाजार के रूप में उभर सकता है। चीनी प्रतिनिधिमंडल के मुखिया ने भदोही-मिर्जापुर के कालीन निर्माताओं व निर्यातकों को चीन आने का न्योता भी दिया। सीईपीसी के कार्यकारी निदेशक शिवकुमार गुप्ता ने बताया कि चीन में भारत जैसे कारीगर नहीं हैं। ऐसे में चीन के शहरों में इतनी बारीक कारीगरी वाली उम्दा और मजबूत कालीनें नहीं बनती, उन्होंने बताया कि एमओयू साइन हो जाने के बाद सीईपीसी और चीन के ब्यूरो ऑफ कॉमर्स की मदद से चीन में बड़े मेले का आयोजन किया जाएगा।

मेले में लुभ रही कागज की दरी

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विदेशी व्यापारी भारतीय कालीन डिजाइन देखते हुए

भारतीय कालीन उद्योग को विकास की राह पर गति देने के मकसद से उद्योग में नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘जीरो इफेक्ट जीरो डिफेक्ट’ की राह पर चलते हुए हथकरधा और हस्तशिल्प उद्योग में रेशम, ऊन और सूती साड़ी की कतरन आदि से बने कालीन व दरी के बीच कागज की दरी तेजी से अपनी जगह बना रही है। इस वर्ष वाराणसी में आयोजित कालीन मेले में कागज निर्मित दरी ने विदेशी ग्राहकों का ध्यान अपनी तरफ खींचने में कामयाब हुई। कागज से बनने के बावजूद ऐसी दरियां मजबूत होती हैं।

                                                         Vaidambh Media

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