गणित में फॅस गया न्याय ! विद्वजन हल कर रहे सवाल

 जयललिता की अवैध सम्पत्ति  गणना

                                                                                 jwelary with jayalalita

  कोर्ट के हिसाब से  आय से अधिक सम्पत्ति-     आय की तरह गिन गए लोन- Rs. 18,17,46,000
अवैध सम्पत्ति- Rs. 2,82,36,812
आय से अधिक सम्पत्ति – 8.12 प्रतिशत
                          अगर गलती  सुधारी जाए तो
आय की तरह गिन गए लोन-Rs.4,67,46,000
अवैध सम्पत्ति- Rs. 16,32,36,812
आय से अधिक सम्पत्ति – 76.76 प्रतिशत

“अगर इस गणितीय गलती को सुधारा जाए और साक्ष्यों को भी ध्यान में नहीं रखा जाए, तो ही सारे आरोपियों को दोषी साबित किया जा सकेगा।”

                    – बी.वी. आचार्य

bb acharya abhiyojan tamilnadu  “यह न्याय की जीत है और उनकी हार, जो मेरी और मेरे गुरु एमजीआर की विरासत को बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे.”                पूर्व मुख्यमंत्री                                                                                                                               जयराम जयललिता

बैंगलूरू : विशेष लोकअभियोजक बी.वी. आचार्य का कहना है कि एआईएडहीएमके महासचिव जयललिता, उनके साथी और उनकी कम्पनी कर्नाटक हाईकोर्ट की गलती से निर्दोष करार दिए गए हैं। मंगलवार को बी.वी. आचार्य ने कहा कि जयललिता की द्वारा बैंकों से लिए लोन की गणना में त्रुटि हुई है। उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि हाईकोर्ट इस गलती को स्वयं ठीक कर सकती है या नहीं । m karunanidhi

तमिलनाडु के विपक्षी दलों ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं जिसके तहत अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में निर्दोष करार दिया गया था. इसी से जयललिता के दोबारा तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ़ हुआ है.कम से कम तीन दलों ने जस्टिस सीआर कुमारस्वामी के 919 पेज के फ़ैसले में हिसाब की कथित गड़बड़ियों का ज़िक्र किया है.डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि, पीएमके के डॉक्टर पी रामदौस और कॉंग्रेस अध्यक्ष ई इलान्गोवान ने फ़ैसले पर टिप्पणियां की हैं.

ये सम्बंध भी मायने रखते हैं

modo ammaउधर बी.वी. आचार्य का मानना है कि इस गलती को सही करने से जयललिता की अवैध सम्पत्ति 8.12 प्रतिशत से सीधे 76.76 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। आचार्य का कहना है कि जयललिता द्वारा लिए गए भारी लोन भी उनकी निजी संपत्ति के साथ जोड़ दिए गए हैं। इस तरह जयललिता की कर्ज राशि 10.67 करोड़ रूपए है जबकि कोर्ट ने इसकी गणना 24.17 करोड़ रूपए की है जो कि 12 करोड़ रूपए ज्यादा है। इसके चलते जयललिता की आय से अधिक सम्पत्ति 16.32 करोड़ रूपए हो जाती है ना कि 2.82 करोड़ रूपए। इसी तरह कुल आय भी 34.76 करोड़ रूपए ना होकर 21.26 करोड़ रूपए होती।Chennai_High_Court अपने फैसले में न्यायाधीश सीआर कुमारास्वामीन ने में कहा, “कृष्णानंद अग्निहोत्री (कृष्णानंद अग्निहोत्री बनाम मध्य प्रदेश राज्य) मामले में आय से अधिक संपत्ति 10 फीसदी पाई गई थी और आरोपी को बरी कर दिया गया था। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा जारी एक सर्कुलर के मुताबिक 20 फीसदी तक आय से अधिक संपत्ति को अनुमेय सीमा समझी जा सकती है।” आदेश के मुताबिक, “यह अपेक्षाकृत कम है। इस मामले में आय से अधिक संपत्ति 10 फीसदी से कम है और यह अनुमेय सीमा के भीतर है। इसलिए आरोपी बरी होने का हकदार है।” उन्होंने कहा कि, जब मुख्य आरोपी को बरी किया गया है, तो अन्य आरोपी भी बरी होने के हकदार हैं, क्योंकि मामले में उनकी भूमिका बेहद कम है।JEW jailalita
गौरतलब है कि 1997 में जयललिता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। पुलिस ने उनके घर से 10000 से ज्यादा साडियां, 28 किलोग्राम सोना, 750 जोड़ी जूते और अन्य सामान जब्त किया था। विशेष लोकअभियोजक का कहना है कि जयललिता की संपत्ति में 1000 एकड़ की भू-संपत्ति भी शामिल है। यह संपत्ति जयललिता के 1991 से 1996 के बीच के कार्यकाल के दौरान की अवैध संपत्ति का ही हिस्सा है।                                                                                                      D.J.S.

                                                                                     Vaidambh Research News

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