गायों की कोख किराए पर लेकर गंगातीरी की प्रजाति बचायेगी सरकार

  गंगातीरी नस्ल की 290 गाय बनेंगी सरोगेट मदर !

लखनऊ:  आपने सरोगेसी के बारे में तो सुना होगा। देश में नि:संतान दंपतियों के लिए यह वरदान cow babyसाबित हुई है, लेकिन यहां हम आपको इंसान के नहीं बल्कि जानवरों की सरोगेसी के बारे में बता रहे हैं। यूपी में गाय की गंगातीरी प्रजाति खत्म होती जा रही है। किसी जमाने में यह प्रजाति इलाहाबाद से बलिया तक गंगा के किनारे मिलती थी, लेकिन इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। ऐसे में रोज 10 से 15 लीटर दूध देने वाली गंगातीरी गायों को बचाने के लिए राज्य के पशुधन विकास विभाग ने 290 गंगातीरी नस्ल की गायों की कोख किराए पर लेने का फैसला किया। यह गायें सरोगेट मदर जैसी होंगी, जिनसे पैदा होने वाले बछड़े और बछिया गंगातीरी की नस्ल को आगे बढ़ाने के काम आएंगे। यूपी सरकार ने गाय की खास नस्ल को बचाने के लिए सरोगेसी का सहारा लेने का फैसला लिया है। गाय की इस खास नस्ल का नाम ‘गंगातीरी’ है। पशुधन विकास विभाग ने 290 गंगातीरी नस्ल की गायों की कोख किराए पर लेगा। यह गायें सरोगेट मदर जैसी होंगी, जिनसे पैदा होने वाले बछड़े और बछिया गंगातीरी की नस्ल को आगे बढ़ाने के काम आएंगे।

प्रेगनेंसी के बाद पशुधन विकास विभाग करेगा  गंगातीरी गायों की देखभाल 

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गंगातीरी गायों की संख्या बढ़ाने में एक  शोध संस्थान मदद देगा। संस्थान के निदेशक सूर्यकांत जालान ने बताया कि उनके यहां अभी दो हजार गंगातीरी नस्ल की गायें हैं। इनमें से 290 की कोख को पशुधन विकास विभाग ने सरोगेसी के लिए रिजर्व कराया है। प्रेगनेंसी के बाद आठ महीने तक पशुधन विकास विभाग इन गायों की देखरेख करेगा। बछड़ा होने पर उसे विभाग रखेगा और बछिया सुरभि शोध संस्थान को दे दी जाएगी। हर गाय की देख-रेख के लिए राज्य सरकार एक हजार रुपए हर महीने देगी। साथ ही गायों के पोषण और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाएगा।

हर मौसम में बढ़िया दूध देती हैं गंगातीरी गायें

doodhसूर्यकांत जालान के मुताबिक गंगातीरी गायें हर मौसम में रहने की अनुकूल होती हैं। मौसम चाहे गर्म हो या कड़ाके की ठंड पड़ रही हो, इनके दूध देने पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। 10 से 15 लीटर दूध यह देती ही हैं। इस वजह से गंगातीरी गायों की संख्या यदि बढ़ेगी, तो प्रदेश भी दुग्ध उत्पादन में आगे बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि गंगा के किनारों पर मिलने वाली गायों की ये नस्ल विलुप्त हो रही थी, जिसकी वजह से सरकार ने यह कदम उठाया है।

400 साल पुरानी है गंगातीरी नस्ल !

GANGATIREE GAYशोध संस्थान के  जालान के मुताबिक, गंगातीरी गायों की नस्ल करीब 400 साल पुरानी है। यह गायें यूपी में इलाहाबाद से बलिया तक ही मिलती हैं। गंगातीरी गायों में हरियाणा और साहीवाल गायों की खूबियां मिली हुई हैं। इस वजह से इनके मिलने वाले इलाके को वैज्ञानिक पूरब का हरियाणा भी कहते हैं। खास बात यह है कि गंगातीरी गाय की नस्ल सिर्फ सुरभि शोध संस्थान की गोशाला में ही मौजूद है। इस नस्ल की गाय हरियाणा की गाय से थोड़ी छोटी होती हैं। साथ ही इसकी प्रतिरोधक क्षमता भी ज्यादा होती है। खेती में भी इस नस्ल के बैल ज्यादा उपयोगी होते हैं।

किराए पर कोख का ऐसा है अनुबंध

gangatiriसूर्यकांत जालान के मुताबिक, गंगातीरी गायों की कोख किराए पर लेने के लिए हुए अनुबंध में गाय का नाम, रंग, ऊंचाई और सींग की लंबाई का जिक्र किया जाएगा। हर गाय के लिए अलग-अलग अनुबंध होगा। जल्दी ही सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। गायों के गर्भाधान के लिए 200 सांड हैं। इनका सीमेन इकट्ठा कर लिक्विड नाइट्रोजन में -190 डिग्री के तापमान पर रखा जाएगा। वक्त होने पर इस सीमेन से गाय का गर्भाधान कराया जाएगा।

Vaidambh Media

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