गीताप्रेस: काॅरपोरेट ट्रष्ट में आन्दोलन पर मजदूर !

     गीताप्रेस नाम ही  पूर्ण परिचय है !

 Gorakhpur: गीताप्रेस’ – यह नाम ही अपनेमें पूर्ण परिचय है। भगवदीय सत्संकल्प ही प्रेरक बनकर ‘गीताप्रेस’के रूपमें मूर्तिमान् रूपसे अवस्थित है। इसका नामकरण भगवान् श्रीकृष्णचन्द्रकी अमोघ एवं कल्याणमयी वाणी gita press prakashan‘गीता’के नामपर हुआ है। उपनिषद के दो वाक्य इसके मुख्य द्वार पर अंकित हैं.- ‘सत्यं वद’ और ‘धर्मं चर’। यह एक विशुद्ध आध्यात्मिक संस्था है।  अपने सुदीर्घ अन्तरालमें यह संस्था सद्भावों एवं सत्-साहित्यका उत्तरोत्तर प्रचार-प्रसार करते हुए भगवत्कृपासे निरन्तर प्रगतिके पथपर अग्रसर रही। आज न केवल समूचे भारतमें अपितु विदेशों में भी यह अपना स्थान बनाये हुए है। गीताप्रेसने निःस्वार्थ सेवा-भाव, कर्तव्य-बोध, दायित्व-निर्वाह, प्रभुनिष्ठा, प्राणिमात्र के कल्याणकी भावना और आत्मोद्धारकी जो सीख दी है, वह सभीके लिये अनुकरणीय आदर्श  है। पिछले कुछ वर्षों में निरन्तर विरोध के स्वर संस्था में मुखरित हुए हैं , आज प्रबंधन व कर्मचारी आमने -सामने हैं; यहाॅ सत्य की तलाश  कठिन है पर जल्दी ही पूरा सच सामने रखने का प्रयास वैदम्भ- मीडिया रिसर्च टीम करेगी !

गीताप्रेस गोरखपुर में प्रबंधन-कर्मी गहण !
150902172359_geeta_press_gorakhpur_books_libreriहिंदू धार्मिक और आध्यात्मिक पुस्तकों की प्रकाशक गीता प्रेस में 92 साल के इतिहास में पहली बार अस्तित्व बचाए रखने का संकट आ गया है । प्रकाशन कंपनी वेतन बढ़ोतरी, कर्मचारियों के निलंबन और उनकी बर्खास्तगी मुद्दों पर कर्मचारियों के हड़ताल से जूझ रही है। गीता प्रेस प्रकाशन कंपनी , श्रीमद्भगवत गीता और रामचरित मानस सहित लगभग 58 करोड़ हिंदू धार्मिक पुस्तकें विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित कर , अब तक बेच चुकी है।

सामान्य हल नहीं ,आरोप- प्रत्यारोप के सहारे निपटने की कोशिश !

gita press majdoor hadtalप्रबंधन के मुताबिक़, कर्मचारियों ने सहायक प्रबंधक मेघ सिंह चौहान के साथ दुर्व्यवहार और हाथापाई करने की कोशिश की थी, जबकि कर्मचारी इसे ग़लत बताते हैं.कर्मचारियों का कहना है कि पहले प्रबंधन ने बिना शर्त वार्षिक वेतन वृद्धि लागू करने की बात कही थी, लेकिन सात अगस्त को जब पता चला की इसके साथ अगले पांच साल वेतन वृद्धि की मांग न करने और मुक़दमों को वापस लेने जैसी शर्तें हैं तो कर्मचारियों ने चौहान से इस बारे में बात की और उनका इस्तीफ़ा माँगा. कर्मचारियों का दावा है की उनके द्वारा कोई दुर्व्यवहार नहीं हुआ, लेकिन अगले दिन दोपहर बाद नोटिस बोर्ड पर निलंबन और सामूहिक वेतन कटौती की नोटिस लगा दी गई.कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें एक समान वेतन और अवकाश तो दिया ही जाए, साथ ही प्रबंधन द्वारा ऋषिकेश में संचालित संस्थाओं के कर्मचारियों की तरह उन्हें भी पूरे वेतन पर 10 प्रतिशत वृद्धि, 100 रुपए की विशेष वृद्धि और 10 प्रतिशत एचआरए दिया जाए.
कर्मचारी नही मानें तो गोरखपुर से स्थनान्तरित हो जायेगा प्रकाशन !

plice in gitapress

कर्मचारियों को समझाती पुलिस

GITA-PRESSपिछले महीने गीता प्रेस प्रबंधन ने 12 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था और अनुबंध पर काम करने वाले 5 कर्मचारियों की सेवाएं कथित अनुशासनहीनता और सहायक प्रबंधन की पिटाई के कारण समाप्त कर दी गई थी। प्रेस में करीब 200 स्थायी और 337 अस्थायी अनुबंध पर कर्मचारी काम करते हैं। निलम्बन के जवाब में कर्मचारी अपने साथियों की सेवाएं बरकरार रखने की मांग लेकर हड़ताल पर बैठ गए । अब तक प्रबंधन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला है। दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े हुए हैं। गोरखपुर के सांसद महंथ् आदित्यनाथ, जिनका इस क्षेत्र में धार्मिक मामलों पर खासा प्रभाव है , वह भी मुद्दे के समाधान के लिए हस्तक्षेप कर चुके हैं। हालांकि गत 4 सितंबर को प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच हुई बैठक का कोई नतीजा नहीं निकल पाया। इस बीच, खबर हैं कि प्रबंधन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच वार्ता विफल रहने की स्थिति में गीता प्रेस गुजरात या महाराष्टï्र स्थानांतरित किया जा सकता है। गीता प्रेस ट्रस्ट बोर्ड के प्रमुख राधे श्याम खेमका ने मीडिया को बताया, ‘हमने प्रेस उत्तर प्रदेश से किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करने का प्रस्ताव हो सकता है, हालांकि यह आखिरी विकल्प होगा।’ खेमका गीता प्रेस से ही प्रकाशित होने वाली आध्यात्मिक पुस्तक कल्याण के संपादक भी हैं।
कर्मचारी व प्रबंधन में गतिरोध जारी

_gitaगीता प्रेस की पुस्तकों की छपाई गोरखपुर में होती है लेकिन 15-20 लोगों की संपादकीय टीम वाराणसी में बैठती है। गीता प्रेस गोविंद भवन कार्यालय की इकाई है जो सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 (वर्तमान में पश्चिम बंगाल सोसाइटीज अधिनियम, 1960 के तहत संचालित) के तहत पंजीकृत है। खेमका ने बताया कि, ‘वार्ता के दौरान प्रबंधन ने कर्मचारियों का निलंबन समाप्त करने की वास्तविक मांग स्वीकार कर ली थी। अब कर्मचारी वेतन बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं जिसके जवाब में हमने कहा है कि स्थिति सामान्य होने पर अगले 2-3 महीने में इस मांग पर विचार किया जाएगा। लेकिन कर्मचारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।’ उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खेमका ने दावा किया कि मुठ्ठी भर लोगों ने कर्मचारियों को हड़ताल के लिए उकसाया है। कुछ महीने पहले भी इसी तरह का संकट खड़ा हो गया था लेकिन जिले के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझ गया था।

 Vaidambh Media

Previous Post
Next Post

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher