ग्राम देवता को बचा लो साहेब वह वास्तव में मर रहा है !

    ग्राम देवता पर भगवान व सरकार दोनो का कहर जारी है। राजनीति के तवे पर इस समय किसानों की मौत व मुआवजा की रोटी खूब फुल रही है। फसलों का ब्यापक नुकसान, कर्ज मे डूबा किसान के संघर्षपूर्ण जीवन में नौकरशाह किसी विलेन की भांति कुचाल चल रहे हैें।सरकार के हुक्म में जी हुजूर ! वाले लाट साहेब को किसान का दर्द व स्थलीय जाॅच नही समझ में आती है । मानक व निर्देशों से बॅधें ये आज्ञाकारी ,किसान की मौत और कर्ज में भी गहन जाॅच का बिंदु बताकर फाइल आगे सरकाने में जुटे दिखतेें हैें।सरकार को किसानो की मौत पर भी संदेह है। यह संदेह पैदा करने वाले उनके काबिल अधिकारी ही है जो सरकार को नींद की गोली देने का भरसक प्रयास करते हैं। 2

 

Lucknow: मौसम की मार झेल रहे किसानों के जख्मों पर नमक डालते हुए प्रशासन ने 63 और 84 रुपये के चेक बांटे हैं। फैजाबाद जिला प्रशासन ने ये चेक उन किसानों को दिए हैं, जिनकी फसल बेमौसम बारिश की वजह से तबाह हो गई है। अब सरकार ने  लेखपालों को आनन- फानन में  सस्पेंड कर अपना दामन बचाने मे लग गई  है और फिर से मुआवजा देने का ऐलान किया है। फैजाबाद की  तहसील में एक गांव है- वाजिदपुर। इस गांव में रहने वाले मोहम्मद साबिर के पास 5 बीघा जमीन है। उनकी फसल तैयार थी और बस काटने की तैयारी थी। मगर अचानक हुई भारी बारिश ने पूरी की पूरी फसल ही तबाह कर दी। राज्य सरकार ने ऐलान किया था कि प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। यह जानकर साबिर के परिवार को भी आस बंधी थी। मगर उनके होश तब उड़ गए जब 5 बीघा खेत की फसल बर्बाद होने पर उन्हें मात्र 100 रुपये का मुआवजा दिया गया।एक अन्य किसान मोहम्मद शाहिद को 3 बीघा जमीन के लिए 63 रुपये का चेक मिला है,मोहम्मद मुस्लिम नाम के किसान को 4 बीखा खेत के लिए 84 रुपये का मुआवजा मिला

           हम राष्ट्रीय आपदा राहत फंड की गाइडलाइन्स को ही फॉलो कर रहे हैं।’

   सीडीओ अरविंद मलप्पा बंगारी

        फैजाबाद 

jo bacha wah takdeer

जींद के झमोला गांव में शुक्रवार को किसानों ने सूखे से प्रभावित रबी की फसल के लिए 200 से 400 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मिलने पर जमकर बवाल काटा। किसान चेक को लहराते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और नारेबाजी की। किसानों ने आरोप लगाया कि 100 फीसदी नुकसान होने पर भी सरकार मुआवजा देने में सूखा राहत के नाम पर 200 रुपये थमा रही है जबकि सरकार ने चार हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की घोषणा की थी। किसानों का आरोप था कि गांव के करीब 1600 एकड़ में खड़ी सूखें से प्रभावित फसल में से मात्र 340 एकड़ का ही मुआवजा दिया गया है।गाजियाबाद जिले में रिपोर्ट के अनुसार बारिश से जनपद में करीब 11500 हेक्टेयर कृषि रकबा प्रभावित हुआ है। 3980 हेक्टेयर क्षेत्रफल को 50 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ है। इससे 11,814 किसानों की आधी से अधिक फसल चौपट हुई है।बर्बादी से बेहाल उत्तर प्रदेश के किसानों पर मौसम तरस खाने को कतई तैयार नहीं है। रविवार को पूरे प्रदेश में घने बादल छाए रहे और छिटपुट बारिश होती रही। झांसी में ओलों ने तबाही मचाई। कई जिलों में तेज हवाओं के साथ तेज बारिश भी हुई, जिससे खेतों में बची-खुची फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। इससे गेहूं की कटाई और मड़ाई पर नया संकट खड़ा हो गया है। फसलों की बर्बादी के सदमे से यूपी में 52 और किसानों की जान चली गई। मौसम में बदलाव के साथ ही लखनऊ का तापमान 8 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया है।muaavja

गोरखपुर जिले की गोला व बांसगाॅव तहसीलों मेें प्रशासन ने पहले रिर्पोट मंगा ली और एक दिन बाद बारिस व ओलाबृष्टि शुरु हो गयी किसान की खड़ी फसल बर्बाद हो गई। कौड़िया निवासी 45 वर्षीय किसान को कम पैदावार का ऐसा सदमा लगा कि उसकी एक झटके में ही मौत हो गयी। उधर प्रशासन लेखपालों पर 20 प्रभावित की रिर्पोट पर मुआवजा बनाने का दबाव बना रहा है लेकिन फैजाबाद की घटना के बाद गोरखपुर के लेखपाल अघिकारियों के आदेश के बावजूद आर्थिक क्षति की रिर्पोट देने में हिलाहवाली कर रहे हैं ।

खुदकुशी करने का कारण खेती में लगने वाली लागत

किसानों की इस तरह से मौत होने या खुदकुशी करने का कारण खेती में लगने वाली लागत के मुताबिक पैदावार न होना ही है।शिवचंद के पास महज एक बीघा जमीन थी उसने साढ़े चार बीघा खेत बटाई पर ले रखा था उममीद लगसये था कि फसल 30 से 35 कुंतल होगी लेकिन जब थ्रेसर से मड़ाई कराकर वह अनाज का आंकलन किया तो वह महज 5 कुंतल ही था। सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया उस पर कर्ज अलग से। उसका दिल बैठ गया । 59 वर्षीय किसान बूढ़न सिंह खछ़ेसरी देवरा में बटाई पर खेत लिये थे पैदावार की उम्मीद पर 25 हजार रुपये कर्ज लेकर ख्ेती किया था। महज एक कंुतल पैदावार मिलने पर वह टूट गया रात भर चिंताग्रस्त फौजदार भोर का इंतजार नही कर पाया उसके प्राण शरीर से निकल गयंे।

Vaidambh Media Reasearch Team

 

 

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