ग्राम पंचायत लोकतंत्र की आधारशिला !

 प्रदेश में पंचायत चुनाव का मौसम हैं। पंचायत क्या है ! और इसके कार्य व दायित्व क्या है ! यह तो जानान ही चाहिए ! आइये ; हम जानने का प्रयास करते हैं कि क्षेत्रीय सरकार का चुनाव कैसे होता है और उसे धन कहाॅ से प्राप्त होता है तथा वह क्या -क्या कार्य कर सकती है।

 प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था

Lucknow:  प्रदेश के  पंचायती राज व्यवस्था  में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, और जिला पंचायत आते हैं । पंचायती राज व्यवस्था आम ग्रामीण जनता की लोकतंत्र में प्रभावी भागीदारी का सशक्त माध्यम है ।panchayat village पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम, तालुका और जिला आते हैं। भारत में प्रचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्व में रही हैं। आधुनिक भारत में प्रथम बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा राजस्थान के नागौर जिले में २ अक्टूबर १९५९ को पंचायती राज व्यवस्थ लागू की गई। 73वें संशोधन अधिनियम, 1993 में एक त्रि-स्तरीय ढांचे की स्थापना (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति या मध्यवर्ती पंचायत तथा जिला पंचायत) की गई.  पंचायती राज व्यवस्था का शीर्षस्तर ज़िला पंचायत है।  इसका अध्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होता है।

  पंचायती राज में कार्य करते हैं सरकार के 32 विभाग !
73वाँ संविधान संशोधन द्वारा एक सुनियोजित पंचायती राज व्यवस्था स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। OLYMPUS DIGITAL CAMERA

73वां संविधान संशोधन अधिनियम के लागू होते ही प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के पंचायत राज अधिनियमों अर्थात् उ.प्र. पंचायत राज अधिनियम-1947 एवम् उ.प्र. क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम-1961 में अपेक्षित संशोधन कर संवैधानिक व्यवस्था को मूर्तरूप दिया गया । राज्य सरकार द्वारा वर्ष 1995 में एक विकेन्द्रीकरण एवं प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन किया गया था जिसके द्वारा की गई संस्तुतियों के अध्ययनोंपरान्त तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति (एच.पी.सी.) द्वारा वर्ष 1997 में 32 विभागों के कार्य चिन्हित कर पंचायती राज संस्थाओं को हस्तान्तरित करने की सिफारिश की गयी थी। प्रदेश सरकार संवैधानिक भावना के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं को अधिकार एवं दायित्व सम्पन्न करने के लिए कटिबद्ध है।

ग्राम पंचायत 

ग्राम पंचायत लोकतंत्र की आधारशिला है। यह लोकतंत्र की प्राथमिक इकाई हैं। संयुक्त प्रान्त पंचायत राज अधिनियम 1947 दिनांक 7 दिसम्बर, 1947 ई0 को गवर्नर जनरल द्वारा हस्ताक्षरित हुआ और प्रदेश में 15 अगस्त, 1949 से पंचायतों की स्थापना हु ई ।15 अगस्त, 1949 से उत्तर प्रदेश की तत्कालीन पाच करोड़ चालीस लाख ग्रामीण जनता को प्रतिनिधित्व करने वाली 35,000 पंचायतों ने कार्य करना प्रारम्भ किया। indian-village-scene-QM46_lसाथ ही लगभग 8 हजार पंचायत अदालतें भी स्थापित की गई । ग्राम पंचायत के सदस्यों  व  ग्राम प्रधान  , ग्रामपंचायत के बयस्क ; बतौर मतदाता अपना मत देकर निर्वाचित करते हैं।  भारत में करीब 250,000 ग्राम पंचायतें हैं।  प्रदेश में वर्तमान समय में 59163- गाम सभायें व 821- क्षेत्र पंचायत तथा 75- जिला पंचायत है ।  आर्थिक-सामाजिक रुप से कमजोर माने जाने वाले  लोगों को सम्मान के साथ बराबरी व उनकी अभिब्यकित के लिये जातियों और महिलाओं  , अनुसूचित- अनुसूचित जनजाति के लिए  पंचायत के पद आरक्षित किये जाने की ब्यवस्था संविधान में है।

सरपंच अथवा ग्राम प्रधान

gram prdhanसरपंच  या निर्वाचित ग्राम प्रधान की   जिम्मेदारी है …

• टैक्स, उत्सवों और समारोहों मे सभी प्रकार की ब्यवस्था।  स्ट्रीट लाइट, निर्माण और गांवों में सड़कों की मरम्मत  का काम , गांव में बाजारों, मेलों, का आयोजन ,  मे सभी प्रकार की ब्यवस्था। कर संग्रह ; सौहार्द बनाए रखना ।

• गांव में जन्म, मृत्यु और विवाह का  रिकॉर्ड रखना।
• सार्वजनिक स्वास्थ्य , स्वच्छता के लिए सुविधाएं प्रदान करके      स्वच्छता और पीने के पानी सुलभ कराना। सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण।
• नि: शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना।
• ग्राम सभा (ग्रामसभा) और ग्राम पंचायत की बैठकों का आयोजन करने के लिए (ग्रामपंचायत) ग्रामवासियों को सूचना भेजवाना ।
• स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं को उपलब्ध कराना।
• कृषि और पशुपालन से संबंधित विकास योजनाओं को लागू कराना।
• गांव में चारों ओर पेड़ लगाने और पर्यावरण की रक्षा कराना।
•  सार्वजनिक पार्क और खेल के मैदानों का निर्माण व रख -रखाव करना।
• विभिन्न सरकारी योजनाओं  गाॅव में लागू करवाना ।

           पंच
ग्राम पंचायत के प्रत्येक भाग से एक सदस्य चुना जाता है। ये संख्या आबादी के हिसाब से निर्धारित होती है।  gram sadsyaइसमें कम से कम 5 और अधिकतम 21 सदस्य होते हैं। इन्हें ही  “पंच” कहा जाता है। गांव के लोग महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित सीटों में से एक तिहाई के साथ, एक पंच का चयन करते हैं। एक गांव में एक ग्राम पंचायत की स्थापना  के  लिए, गांव की आबादी 300 मतदाताओं के अनिवार्य मानक पर बनाई जाती है।

ग्राम पंचायत के लिए पंच की संख्या
•  300 ( मतदाता आबादी)   : 5 सदस्य
•  600-1500                       : 7 सदस्य
•  1501-3000                     : 9 सदस्य
•  3001-4500                     : 11 सदस्य
•  4501-6000                      : 13 सदस्य
•  6001-7500                       : 15 सदस्य
7500 से अधिक                     : 17 सदस्य

ग्राम पंचायत कार्यालय ,  ग्राम सभा की आय का स्रोत !
प्रत्येक ग्राम सभा में ग्राम्य संसद की परिकल्पना की गई है।gram sansad उसी आधार पर पंचायत भवन का निर्माण किया गया है। यहाॅ ग्राम प्रधान अपने सचिव के साथ बैठ कर ग्राम सरकार चलाता है। इसके निगरानी में सरकार के 32 विभाग आ सकते हैं ।  ग्राम पंचायत की आय का मुख्य स्रोत गांव के भीतर इमारतों और खुली जगह पर लगाया संपत्ति कर है। आय के अन्य स्रोतों पेशेवर कर, तीर्थयात्रा पर कर, पशु व्यापार कर , अनुदान भू-राजस्व के अनुपात में और राज्य सरकार से प्राप्त  अनुदान  शामिल हैं ।

Vaidambh Media

 

 

Previous Post

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher