जाली ग्राम सभा प्रस्ताव से महान कोल ब्लॉक को मिली पर्यावरण मंजूरी

सिंगरौली। राज्य प्रशासन और पुलिस के सौतेल व्यवहार के खिलाफ और महान में चल रहे वन सत्याग्रह के समर्थन में कई संगठन एकजुट हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग किया कि अमिलिया में आयोजित फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाय। उन्होंने चार वन सत्याग्रहियों को पुलिस ने जिस तरह से गिरफ्तार किया उसकी निंदा की। साथ ही, उन्होंने महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता बेचनलाल साह के रिहाई की मांग की है। अमिलिया निवासी बेचनलाल को महान जंगल को बचाने के प्रयास करने की वजह से जेल में रखा गया है। संगठनों ने स्पष्ट किया कि अब पुलिस सामाजिक कार्यकर्ताओं को फर्जी केस में नहीं फंसा सकती। समिति के कार्यकर्ता विजय शंकर सिंह भी उन चार वन सत्याग्रहियों में शामिल थे जिन्हें पुलिस हिरासत में लिया गया था । उन्होंने कहा कि इन फर्जी केस से हमलोग डरने वाले नहीं हैं और हम अपनी लड़ाई को जारी रखेंगे। इस तरह की धमकियों से हम और मजबूत होते हैं। हमलोग मांग करते हैं कि बेचनलाल जी को तुरंत रिहा किया जाय और फर्जी ग्राम सभा मामले में एफआईआर दर्ज हो।

राज्य प्रशासन जाली ग्राम सभा के प्रस्ताव के बारे एमएसएस सदस्यों की लगातार शिकायतों पर अपने पैर खींच रहा है। इसी ग्राम सभा के आधार पर केन्द्रीय सरकार ने महान कोल ब्लॉक को दूसरे चरण की पर्यावरण मंजूरी दी है। हालांकि इसी महीने पुलिस ने आधी रात को नींद से जगाकर चार वन सत्याग्रहियों को गिरफ्तार करने में कोई देरी नहीं की। 40 घंटे की पुलिस हिरासत के बाद चार वन सत्याग्रहियों में से तीन को जमानत दे दिया गया जबकि बेचनलाल साह अभी भी जेल में ही हैं।

ग्रीनपीस इंडिया की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई ने कहा कि जिस तरह से महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, उससे स्पष्ट है कि पुलिस और प्रशासन राज्य की शक्ति को महान कोयला खदान के खिलाफ चल रहे आंदोलन को दबाने के लिए उपयोग कर रही है। हमलोग पिछले तीन महीनों से फर्जी ग्राम सभा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसपर कोई सुनवाई नहीं हुई है। लेकिन फर्जी केस में सामाजिक कार्यकर्ताओं को फंसाने का काम सिर्फ एक दिन में ही हो गया। मध्यप्रदेश पुलिस का इस तरह का रवैया हमें पूरी तरह से अस्वीकार है।अमिलिया के निवासी उजराज सिंह खैरवार, हिरामणी सिंह गोंड और प्रिया पिल्लई ने फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव के खिलाफ माडा थाना में शिकायत दर्ज करवाया है। साथ ही पुलिस अधिक्षक के पास भी आवेदन दिया गया लेकिन अभी तक कोई कार्यवायी नहीं की गयी। हालांकि खबर है कि कलेक्टर ने इस मामले को देखने की बात कही है।

किसान आदिवासी विस्थापित एकता मंच की तरफ से  एकता ने कहा कि, “प्रशासन का काम जनता की सेवा है लेकिन बढ़ते औद्योगिकरण के साथ ही उसने पूंजीपतियों की सेवा को चुन लिया है। विकास के नाम पर कंपनियों द्वारा हजारों आदिवासियों और दूसरे ग्रामीणों के अधिकारों को छीनने में उनकी मदद कर रही है। इस कंपनी-प्रशासन गठजोड़ ने स्थानीय समुदायों में इस तरह की अराजकता लेकर आया है कि न्याय, शांति, समानता या स्वतंत्रता जैसे शब्द अपने अर्थ खो चुका है”।

 

 

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