जीवन के प्लेटफार्म पर संघर्ष की डगमग रेलगाड़ी !

सभ्य कहे जाने वाले समाज से प्रतिदिन बच्चे उपेक्षित -वंचित हो शोषण ,हिंसा, नशा , अपराध के हवाले !

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मैं हूं ! साबित करता बचपन.

 Gorakhpur : बचपन ! जीवन का एक ऐसा पड़ाव ; जिस पर हर कोई ठहरना चाहता है ! पर जीवन तो चलने का नाम है वह कहाॅ रुकने वाला ! फिर भी एक बार पुन; बचपन में जाने की ईच्छा सबको रहती है। जिसका कोई बचपन ही ना हो उसकी कल्पना कीजिये ; उसे क्या जीवन का कोई मतलब समझ में आ सकता है? नही ना ! आज हमारे सभ्य कहे जाने वाले समाज से प्रतिदिन बच्चे उपेक्षित -वंचित हो शोषण ,हिंसा, नशा , अपराध के हवाले कर दिये जा रहे हैं।जहाॅ विश्व भर मे तमाम मुद्दों को लेकर सभ्य लोग मार -काट मचाये हुए हैं वही प्रतिवर्ष 1लाख 20हजार मासूमों की तश्करी का भी अनुमान लगाया जा रहा है। जिस राष्ट्र में बच्चों का संरक्षण विफल हो वह कमजोर तो होता है साथ ही बचपन का नकारात्मक प्रभाव वयस्क जीवन पर पड़ता है , जो देश व समाज के लिये घातक सिद्ध होता है। child missing in cxaseआज भारत में 41‐4 करोड़ से अधिक बच्चे हैं। इनमें सभी अपना बचपन जी रहे हैं ? बालपन में मजदूरी का मतलब अशिक्षा को जीवन पर्यंत स्वीकार कर लेना । यह बड़ी चुनौती है ! अनेक प्रकार के अभावों से ग्रस्त भेदभाव ,उपेक्षा, शोषण के सहज शिकार हो ये बच्चे आजीविका के सीमित साधन के बीच ये दूसरी ही दुनियॅा अपने आस-पास बना लेते हैं जो सभ्य समाज के हित में नहीं होता है। इन्हे खुशहाल व सुरक्षित जीवन, क्षमता का पूर्ण उपयोग करते हुए उन्हे बचपन में वापस कर समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाना अत्यावश्क है। दुनियां का भविष्य हमारे बच्चों पर निर्भर है । हम में से प्रत्येक ब्यक्ति को एक दूसरे की जिंदगी बेहतर करने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए ताकि हमें मानवता पर गर्व हो सके ! युनिसेफ के आंकड़े वर्ष 2006 के मुताबिक 1करोड़ 10 लाख बच्चे रेलवे प्लेटफार्म पर जींदगी गुजारते हैं, रेलवे चिल्ड्रेन यूके की बेबसाइट बताती है कि प्रति 5 मिनट पर एक बच्चा अकेले किसी न किसी रेलवे प्लेटफार्म पर उतरता है और इनमें से 12000 बच्चे प्रतिवर्ष स्टेशन को ही अपना घर बना लेते हैं और फिर इनकी जिंदगी गुटखा बेचने ,पानी बोतल , भीख माॅगने , नशा करने , चोरी-छिनैती करनें में ब्यस्त हो जाती है। दवा, शिक्षा ,राशन कार्ड ,मतदान ,सरकार ,मुद्दे ,सामाजिक जीवन सबसे ये दूरी बना लेते हैं।

कौन सुनेगा ये दास्तां !

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रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म के भरोसे बचपन : 25-30 साल पहले घर अकेले छोड़ा अब पूरा परिवार है!

रेलवे प्लेटफार्म पर जिंदगी गुजार रहे बच्चों के पास सुनाने को बहुत सी कहानियाॅ हैं पर सुनने वाले बिरले ही हैं।सेफ सोसाइटी के कार्यकर्ताओं ने अपनी सूझ -बूझ व धैर्य अपना कर अप्रैल 2015 से अब तक 157 परिवार से बिछुड़ गये बच्चों को गोरखपुर रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म से जी आर पी एवं सी डब्लू सी के जरिये उनके परिवार वालों से मिलवाया। रेलवे प्लेटफार्म पर सभी चीजें स्पष्ट दिखाई देतीं हैं। रेलवे प्लेटफार्म पर आने जानें वाले लाखों लोग समाज से वंचित होते बच्चों को देखते हैं। उन्हे असामाजिक बनाने में अनजानें ही सहयोगी बन जाते हैं। क्या आपने कभी एक पल ठहर कर सोचा है कि आपके आगे पीछे स्टेशन प्लेटफार्म पर पानी बोतल या गुटखा बेंचने वाले इस बच्चे की उम्र ये सब करने की है? नशे में धुत्त पड़ी 11 साल की बच्ची प्लेटफार्म पर क्यों औंधे गिरी पड़ी है ?

रेलवे प्लेटफार्म गोरखपुर के प्रथमश्रेंणी गेट पर नींद या नशा !

रेलवे प्लेटफार्म गोरखपुर के प्रथमश्रेंणी गेट पर नींद या नशा !

ये कैसा बचपन है ? जिसे सुरक्षा ,सम्मान व शिक्षा ,स्वस्थ्य से भरपूर हो करोड़ो सपनें और खुशियों के बीच बसर करना था वह आज फुटपॅाथ या रेलवे स्टेशन पर अलग-थलग जीवन गुजारने को मजबूर हैै ?

विश्व का सबसे लम्बा प्लेटफार्म

विश्व का सबसे लम्बा प्लेटफार्म

भारत के संविधान में बच्चों के े अधिकार प्राथमिक है। भारत के संविधान में बाल संरक्षण हेतुे अर्टिकल 21 ए में कहा गया है कि 6 से 14 वर्ष के सभी छात्रों केा निःशुल्क शिक्षा अनिवार्य है। इसी के आर्टिकल 24 में बताया गया है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चो से कोई मजदूरी नहीं करा सकता ! साथ ही साथ देश के प्रत्येक बच्चो को आत्म सम्मान, शिक्षा व स्वास्थ्य के साथ नैतिक माहौल व सुविधायें अनिवार्य रुप से मिलने की बात भी आर्टिकल 39एफ में स्पष्ट कही गयीं हैं। ये संवैधानिक अधिकार प्राप्त देश का भविष्य जब रेलवे प्लेटफार्म पर नशीले पदार्थ का सेवन करते हुए सामाजिक दुनियाॅ को भूल , अपना जीवन संकट में डाल अलग ही दुनियाॅ में जीने की कोशिश करता है तो क्या यह देश तथा सभ्य समाज के सामने एक चुनौती नहीं है? 1‐36 किमी का 10 प्लेटफार्म वाला गोरखपुर रेलवे स्टेशन हजारों बच्चों को आश्रय देकर उन्हे नशे का आदी बना चुका। यहाॅ ट्रेन से उतरकर परिवार से बिछुड़ गये मासूम बच्चों को उनके अभिभवकों से मिलवाने के प्रयास पर सेफ सोसाइटी की ओर से परियोजना निदेशक के तौर पर जो अनुभव हुआ उसे शब्दों में बयां कर पाना कठिन है। जहाॅ संविधान में प्रत्येक ब्यक्ति को बच्चों के प्रति जिम्मेदार बताया गया है वहीं स्टेशन प्लेफार्म का दृश्य इसके ठीक विपरीत है। कभी- कभी इस स्टेशन के प्लेटफार्म पर समाजसेवी भी आधिकारिक क्षेत्र का दावा करने लगते हैं जो किसी भी सूरत में सही नहीं है।

समाज के कुछ कर्तब्य जो अमल में नहीं रहे ! जिम्मेदार कौन ?

platform par golu gutkha bechate huye

ये गोलू रेलवे प्लेटफार्म पर गुटखा की दुकान चला कर इसी उम्र में अपने 3साल की बहन व एक साल के भाई का पोषण करता है।

अधिकार से कहीं ज्यादा जरुरी कर्तब्य है जिसे हमें अवश्य करना होता है। गोरखपुर रेलवे स्टेशन प्टेलफार्म पर परिवार से बिछुड़ गये बच्चों को उनके परिवार से मिलवाने के प्रयास में चल रहे अध्ययन के दौरान मैने पाया कि रेलवे चिल्ड्रेन का स्टेशन पर आने के विविध कारण हैं। किसी ने सौतेले माॅ या बाप के कारण घर छोड़ दिया तो किसी के घर की माली हालत ठीक नहीं , कोई पढ़ाई बहुत अच्छे स्कूल में करने के लिये भागा । इसी तरह कुछ बच्चीयों की कहानी अलग ही बात बयां करती है। मसलन एक बच्ची संगीत सिखना चाहती है लेकिन उसका धर्म व परिवार का रसूख आड़े आ रहा था कुशीनगर जिले के छोटे से गाॅव में रहने वाली ये बच्ची सेफटीम को वन नाईट आउटरिच के दौरान 3 बजे रात को मिली । उसके साथ एक लड़का भी था जो उसे गोरखपुर में ही मिल गया और वह उसे आस्वस्थ कर रहा था कि मुम्बई में उसकी बहुत पहचान है उसे सिंगर बनवा देगा। पूरे परिवार से बगावत कर रात में भागने वाले बच्चे व बच्चियों का पनाहगार भी है स्टेशन प्लेटफार्म। फिलहाल रात की आउटरिच से स्टेशन की जो गतिविधि प्राप्त हुई उससे ये कारण पता चला। सरकार के बाल संरक्षण ब्यवस्था से सम्बंधित विभागों पर एक साथ कई जिम्मेदारी थोप देने के कारण ऐसी एक्टिविटी को बल मिलता देखा जा रहा है जबकि ऐसे मामलों के लिये स्वतंत्र ब्यवस्था होनी चाहिए।

घर से भागे बच्चों को समाज में वापस स्थापित करने की चुनौती !
बच्चियों के घर से भागने वाले मामलों में हमने पाया कि 12 से 16 साल तक के जोड़े चकाचैध से प्रभावित हो घर से भागकर स्टेशन पहुॅच रहे हैं। स्टेशन प्लेटफार्म हर तरह से उन्हे सुरक्षित लगता है।

भटकते बच्चे की काउंसलिंग

भटकते बच्चे की काउंसलिंग

कहीं जाने के लिये सोचने का समय व कम पैसे में अधिक दूरी तय कर जल्दी से मैट्रो सीटी पहुॅचकर जीवन बदल देने की चाह इन बच्चों को यहाॅ भटकने के लिये मजबूर कर देता है। विभिन्न परिस्थितियों से गुजरते ये बच्चे रेलवे स्टेशन को अपना घर बना लेते हैं। यहाॅ सुलेशन ,क्रोशीन ,आयोडेक्स ,पेनकिलर पेस्ट तथा ड्रग्स की लत् लगा लेते हैं। ये बच्चे जो गोरखपुर प्लेटफार्म पर हैं उन्हे समाज में वापस लाने कीे बहुत कठिन चुनौती है।इनकी संख्या पिछले कई वर्षों में बांसे में ले लेती हैं। हलांकि आरपीएफ व जीआरपी अपनी तरफ से पूरी सजग कार्यवाही करती है पर यह समस्या का हल नही शायद ! क्योंकि उनके पास अब कोई अन्य राश्ता भी तो नहीं है। यही हाल नशे वाले 6से 8 स्थानों का है जहाॅ बच्चे प्लेटफार्म पर ही नशा करते हैं। पुलिस से ये लोग काफी सजग व होशियार भी रहते हैं। कुछ तो जेल भी जा चुके हैं पर प्लेटफार्म की छत ही उनका आशियाना है वह उससे अलग नही होते। यहाॅ से बालश्रमिक बनाने के लिये बच्चों को दूसरे शहर ले जाने के भी मामले संज्ञान में आये। एक वर्ष में 10 बच्चे गोरखपुर रेलवे प्लेटफार्म से ट्रैफिकिंग कर ले जाते समय धरे गये। इसमें उन बच्चों के रिश्तेदार भी शामिल थे। बार्डर क्षेत्र के रेलवे स्टेशन पर इन बच्चों का इस्तेमाल स्मगलिंग के लिये किया जाता है। इसके पीछे माफिया काम करते हैं। यहाॅ बोतलों में डीजल पेट्रोल पड़ोसी मुल्क को पहुॅचा देना आम बात है। chotu ये बच्चे बड़े होकर कौन सा समाज हमारे बीच स्थापित करेंगे ! यह बात जाने बिना स्वार्थीलोग देश का भविष्य खुलेआम बरबाद कर रहे है। सेफ के निदेशक वैभव शर्मा के कुशल निर्देशन मेें सेफटीम निरंतर बेहतर व सराहनीय प्रयास कर रही है। इसमे यूके की पाॅल हेमलन फाॅउण्डेशन का सहयोग व शेाधपरक कार्य का कुशल निर्देशन काबिले तारीफ है। बिछुड़े बच्चों के परिवार से मिलकर उनके बच्चे के भगने के कारण , उनकी बृहद केस स्टडी बनवाने का अनूठा कार्य पाॅल हेमलिन के लिये वाह! कहने को विवश करता है! पाॅलहेमलन के निर्देशन में सेफ का यह निरंतर प्रयास एक दिन गोरखपुंर रेलवे स्टेशन को चाइल्ड फे्रंडली बनाने में सफल होगा। सीमित संसाधन व तमाम चुनौतियों के बीच सामाजिक कार्य का कुशल संचालन बहुत कठिन कार्य माना जाता है। ऐसे में सेफ की पूरी टीम जिस तन्मयता व संकल्प के साथ रेलवे प्लेटफार्म पर परिवार से बिछुड़े बच्चों के साथ कार्य कर रही है वह अतिसराहनीय है। भारत के बच्चों के उज्वल भविष्य के लिये कार्मरत लोगों के साथ , जय हिन्द!

Vaidambh Media

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