जुर्म के महल में घुसता चला गया राजेन्द्र (छोटा राजन) !

मोहन कुमार, नाम के पासपोर्ट पर सात साल से  ऑस्ट्रेलिया में था छोटा राजन !

NewDelhi: अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की इंडोनेशिया में गिरफ्तारी हो गई । छोटा राजन, इंडोनेशिया के बाली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार होने के बाद उसे भारत लाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं । वह मोहन कुमार नाम के पासपोर्ट पर पहुंचा था।RAJAN PASSPORT सात साल से वह ऑस्ट्रेलिया में था। अब उसे भारत लाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। वहीं गिरफ्तारी के बाद छोटा राजन का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में राजन के हाथों में हथकड़ी लगी हुई है। वहीं एक निजी चैनल से बातचीत में राजन कहता है कि वह किसी से भी डरता। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि राजन भारत नहीं आना चाहता है।

जरायम की दुनिया मे राजन !
dawood-gang- छोटा राजन की कहानी उस फिल्मी डॉन की तरह ही है जो छोटी बस्तियों से निकल कर टिकट ब्लैक करने के रास्ते जुर्म के महल में घुसता है। मुंबई के उपनगर चेंबूर में उसका जन्म दलित परिवार में हुआ था। उसके पिता नगर निगम में चपरासी थे पर उसके सपनों की उड़ान काफी ऊंची थी। राजेन्द्र (छोटा राजन) ने हाजी मस्तान, करीम लाला और वरदा भाई की बढ़ते असर को ध्यान में रखा और उसी राह पर चल पड़ा। चेंबूर और घाटकोपर राजन नायर का बड़ा नाम था और इसी के लिए राजेंद्र सिनेमा में टिकट ब्लैक करने लगा। उसका कद बढ़ता गया और फिर राजेन्द्र, राजन नायर उर्फ बड़ा राजन के साथ छोटा राजन हो गया।

जब छोटा राजन ने अंडरवर्ल्ड के  दाऊद इब्राहिम का थामा हाथ !

80 का दशक शुरू होते-होते राजन सुपारी लेकर हत्या करने के धंधे में आ गया।dawoodइसके बाद राजन का भी अपना एक नाम हो गया और अंडरवर्ल्ड में वह डॉन छोटा राजन के नाम से जाने जाना लगा। भले ही छोटा राजन विदेश में रहकर अपनी गैंग चला रहा था, लेकिन उसके परिवार ने कभी भी चेंबूर इलाका नहीं छोड़ा। आज भी राजन का परिवार इसी इलाके में रहता है। वहीं छोटा राजन का एक और नाम था, उसे नाना कहकर भी बुलाते थे। यह नाम उसे गुजरात के बिल्डर्स ने दिया था। इसके बाद छोटा राजन ने अंडरवर्ल्ड के सबसे बड़े नाम दाऊद इब्राहिम का हाथ थामा । 90 के दशक के शुरूआत तक दाऊद इब्राहिम और राजन एक दांत काटी रोटी खाते थे।

राजन उस समय दाऊद की आंख और कान था !

राजन- दाऊद को पूजता था। वह चैम्बूर के शंकर सिनेमा में टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग करते हुए आगे बढ़ा और दाऊद का दायां हाथ बन गया। दाऊद के दूसरे करीबियों को राजन का ऊपर उठना रास नहीं आया।chota-rajan राजन और दाऊद के बीच पहली बार जुलाई 1992 में इब्राहिम पारकर की दिनदहाड़े अरूण गवली के आदमियों द्वारा हत्या के बाद दरार आई। इब्राहिम,  दाऊद की बहन हसीना का पति था और हसीना से दाऊद बहुत स्नेह करता था। दाऊद उस समय बहुत बड़ा नाम बन चुका था, लेकिन बावजूद इसके इब्राहिम की हत्या का बदला नहीं लिया गया। राजन उस समय दाऊद की आंख और कान था, लेकिन उसने हत्या का बदला लेने के लिए कुछ नहीं किया। इसके बजाय वह शराब, शबाब और गानों में डूब गया। दाऊद और राजन के बीच अविश्वास के बीज बोए जा चुके थे। इसके बाद दाऊद के निशाने पर छोटा राजन आ गया, क्योंकि छोटा शकील और सुनील सावंत ने दाऊद के मन में राजन के खिलाफ जहर घोल दिया था । इसके बाद छोटा राजन और सुनील ने इब्राहिम की मौत का बदला लेने के लिए प्लान बनाया, हालांकि उनके निशाने पर छोटा राजन ही था। 1993 में छोटा शकील ने एक पार्टी का आयोजन किया, जिसमें छोटा राजन को भी बुलाया गया। हालांकि पार्टी एक बहाना था, आखिर मकसद राजन का खात्मा थी। लेकिन राजन को इस बात की भनक लग गई और वह पार्टी में नहीं गया। इसके बाद 2000 में एक बार फिर राजन पर जानलेवा हमला हुआ, लेकिन किस्मत ने उसे फिर बचा लिया। वहीं, छोटा राजन ने अपने गिरोह के शूटरों से दाऊद को दुबई और पाकिस्तान में मारने की कोशिश की, लेकिन राजन को सफलता नहीं मिल सकी। हालांकि छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद इस गैंगवार का अंत हो गया।

अजित डोभाल ने तैयार की  गिरफ्तारी की  रणनीति !

Adobhalपुलिस और गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक छोटा राजन को इंडोनेशिया में गिरफ्तार करवाने की पूरी रणनीति राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने तैयार की थी। यह गिरफ्तारी उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत भारत के मोस्ट वॉन्टेड डॉन दाऊद इब्राहिम को पकड़ने की तैयारी की जा रही है। छोटा राजन खुद को “देशभक्त डॉन” कहकर प्रचारित करता रहा है। कहा तो ये भी जाता है कि सरकारी एजेंसियां राजन का इस्तेमाल दाऊद के खिलाफ करती आई हैं। सूत्रों का कहना है कि दाऊद के गुर्गो को मारने के लिए राजन की “सेवाएं” ली गई।

  लगभग खत्म हो चुकी है राजन की गैंग !

राजन की गैंग अब लगभग खत्म हो चुकी है और उसकी गैंग में अब केवल एक ही आदमी बचा है। पुलिस का कहना है कि राजन की गैंग में अब केवल सिंधुदुर्ग का रहने वाला संतोष उर्फ अबू सावंत इकलौता सदस्य है।chota- 46 वर्षीय संतोष की गैंग को चलाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना हैकि संतोष ही फिरौती से लेकर रियल इस्टेट मे निवेश तक का कामकाज देखता है। वह गैंग का इकलौता जाना माना नाम है जो राजन के साथ अब भी जुड़ा हुआ है।बाकी सबने अपनी अलग गैंग बना ली। संतोष पर पांच केस चल रहे हैं और इनमें से एक मकोका के तहत भी है। वह अभी फरार है। संतोष साल 2000 में चेम्बूर में एक प्रोपर्टी की डील को लेकर राजन से मिला। उसके पिता एक रियल इस्टेट एजेंट हैं। इसके बाद से वह ऊपर बढ़ता गया और 2005 तक वहीं राजन के लिए पैसों का इंतजाम करने, बिल्डर्स को धमकाने, अधिकारियों को डराने और गैंग सदस्यों के परिवार का ख्याल रखने का काम करता था। 2006 में मुंबई पुलिस के साथ काम कर रहे ईडी के एकअधिकारी ने संतोष को बता दिया कि उसे मकोका के तहत गिरफ्तार किया जा सकता। इसके बाद संतोष देश से बाहर भाग गया। इस दौरान राजन के अन्य साथी ओपी सिंह, बालू डोकारे, भरत नेपाली, हेमंत पुजारी, एजाज लकड़ावाला और रवि पुजारी में से कुछ मारे गए और कुछ ने अपनी अलग गैंग बना ली। जबकि संतोष अपने बॉस के साथ ही था और उसकी तबीयत का ख्याल रखता था

एजेंसियों ने पिछले सप्ताह ही राजन को पकड़ने का फैसला किया !

छोटा राजन को पकड़ने के लिए ऑपरेशन दो महीने पहले से शुरू कर दिया गया था। इसमें सीबीआई, इंटरपोल और ऑस्ट्रेलियन फेडरल लॉ एंफॉर्समेंट शामिल थे।chota लगातार निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर तीनों एजेंसियों ने पिछले सप्ताह राजन को पकड़ने का फैसला किया। इसके बाद राजन के रविवार को डेनपासार एयरपोर्ट पर पहुंचने पर उसे पकड़ लिया गया। सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि दाऊद इब्राहिम की गैंग के हमले के बाद राजन सितम्बर के पहले सप्माह में बैंकॉक से ऑस्ट्रेलिया चला गया था। हालांकि हमले के वक्त वह कहीं ओर था लेकिन उसे पता चल गया कि अब बैंकॉक में वह सुरक्षित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद उसने वहां रहने का समय बढ़ाने की अर्जी डाली। उसके पास मोहन कुमार पुत्र दामोदर के नाम का पासपोर्ट था।

Vaidambh Media

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