‘टैक्स हैवन’ मे हवन करने वाले भारतीयों पर लगाम लगायेगी सरकार !

500 से अधिक भारतीयों का ‘पनामा’ से रिश्ता !

प्रधानमंत्री के निर्देश पर बनीं बहुएजेंसीय जांच टीम करेगी जाॅच !

New Delhi : देश के अमीर और प्रभावशाली लोगों द्वारा अपना धन विदेशों में रखे जाने के खुलासे के बाद सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया को समझा जा सकता है।T.H. सोमवार को एक अखबार में खबर छपी जो करीब 1.15 करोड़ लीक हुए दस्तावेज के गहन अध्ययन पर आधारित थी। खबर के मुताबिक 500 से अधिक भारतीयों ने पनामा की एक विधि कंपनी मोजाक फोन्सेका को पैसे देकर ऐसे देशों में कंपनियां स्थापित कीं जो कर बचाने के लिहाज से उपयुक्त माने जाते हैं। पनामा को कर संबंधी उदारता (टैक्स हैवन) के लिए जाना जाता है। पनामा दुनिया भर के अमीर लोगों को ऐसी कंपनियां स्थापित करने में भी मदद करता है जहां वे आसानी से और करमुक्त माहौल में, गोपनीयता के साथ परिचालन कर सकें। वहीं सोमवार को ही प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद सरकार ने एक बहुएजेंसीय जांच टीम गठित कर दी है जो यह देखेगी कि इस मामले में कहीं किसी तरह की अनियमितता तो नहीं हुई है।

विश्व भर के पैसे वाले खेलते हैं ये खेल!

अब तक जो कागजात सार्वजनिक हुए हैं उनके अलावा अभी ढेर सारे नाम सामने आएंगे। ऐसे नाम जब भी सार्वजनिक होंगे तो पता चलेगा कि कितने भारतीयों ने टैक्स हैवन कहे जाने वाले देशों में ऐसी कंपनियां खोली हैं।TAX यह भी सच है कि ऐसी सुविधाओं का इस्तेमाल दुनिया के कई अन्य देशों के प्रभावशाली लोगों ने भी किया है लेकिन हमें यह भी पहचानना होगा कि ऐसे सभी निवेश को अवैध करार नहीं दिया जा सकता है। परंतु भारतीयों समेत दुनिया भर के अमीर और प्रभावशाली लोगों ने बहुत बड़ी संख्या में इस सुविधा का इस्तेमाल किया जो चिंता की बात है। इस बात के लिए सरकार की सराहना की जानी चाहिए कि उसने ऐसे निवेश की जांच के लिए विविध एजेंसियों वाली टीम गठित की। निश्चित तौर पर सरकार की यह त्वरित प्रतिक्रिया इसलिए भी है क्योंकि आम चुनाव के दौरान काले धन से निपटना उसका एक प्रमुख मुद्दा था। ऐसे में वह इस प्रकार के खुलासों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनने दे सकती है। स्पष्टï है कि सरकार का इस पर कदम उठाना वक्त का तकाजा था।

 नियत अवधि के भीतर कोई भी भारतीय अपनी अघोषित संपत्ति की कर सकता है घोषणा

काले धन और कर वंचना को रोकने के प्रयास में ही वर्ष 2016-17 के बजट में एक योजना की घोषणा की गई। इसके मुताबिक कोई भी भारतीय चार माह की नियत अवधि के भीतर अपनी अघोषित संपत्ति की घोषणा कर सकता है, बशर्ते कि वह तकरीबन 50 फीसदी कर चुकाने को तैयार हो। सरकार की काले धन से लड़ाई को केवल कर चोरी करने वालों को अनुपालन अवधि के रूप में राहत देने तक सीमित नहीं रखा जा सकता है। बल्कि उसे कर संबंधी कानूनों का सख्त प्रवर्तन भी करना होगा ताकि मौजूदा व्यवस्था के दुरुपयोग को रोtax havenका जा सके। बहरहाल यह भी अहम है कि कर नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए सरकार पारदर्शी और नियम आधारित कर प्रशासन व्यवस्था भी लागू करे। देश के सुधार के पहले चरण में कर दरों को काफी कम किया गया था ताकि उनको वैश्विक मानकों के अनुकूल किया जा सके। रियायतें समाप्त करने और कर दरों में स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में अभी काफी काम बाकी है। लोगों को कर देने के लिए प्रोत्साहित करने और टैक्स हैवन का रुख करने से रोकने के लिए यह आवश्यक था। लेकिन राजस्व विभाग द्वारा सहज कराधान व्यवस्था का प्रवर्तन भी उतना ही आवश्यक है। विभाग को कर चुकाने वालों के अनुकूल होना चाहिए। कर व्यवस्था को सामान्य और तार्किक बनाने के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं लेकिन अब इस प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता है। अब वैश्विक स्तर पर विदेशी खातों के खुलासों को लेकर लगभग समान मानक हैं। ऐसे में पारदर्शी कर व्यवस्था लागू करने और ऐसी घटनाओं को रोकने में बहुत दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

 Vaidambh Media

 

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