दिल्ली विधानसभा चुनाव : खग ही जाने खग की भाषा!

0

दिल्ली । विधान चुनाव दो पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व केनिद्रत हो गया है। जो बात नेता घुमा फिरा कर जनता को समझाते रहे वह दिल्ली विधानसभा चुनाव में सीधे संक्षिप्त शब्दों में सुनने को मिल रही है। दोनो के कि्रयाकलाप में भी समानता है। गले में दोनों के परेशानी है। दोनो ही बहुत सजग रहने वाले ब्यकित हैं। किरन बेदी के हाथ में गरम पानी की बोतल तो अरविन्द केजरीवाल गले में मफलर लगाना नही भूलते। कमजोर स्वास्थ्य के बावजूद दोनो ही स्वस्थ सरकार देने का दावा जनता से कर रहे हैं।
चलिए एक सुकून है कि सरकार जिसकी भी बनेगी मुख्यमंत्री पढ़ा लिखा होने के साथ-साथ आंदोलन के गर्भ से निकला हुआ होगा। यह बात और है कि आज उस आंदोलन की असलियत ,साथियों द्वारा मंच से बताने की जरुरत आन पड़ीे। ये कमबख्त रजनीति है ही ऐसी। नौकरशाह से एनजीओ संचालक़..आंदोलनकारी और अब नेता यही पहचान है दिल्ली में स्वयं को भावी मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित कर चुनाव लड़ रहे अरविन्द केजरीवाल व किरण बेदी की। जनता के बीच पड़ताल करने पर दोनो की तस्वीर साफ हो जाती है। जिम्मेदारी से भागते केजरीवाल को मुददों के साथ मैदान में टिक जाने के कारण दिल्ली का विश्वास उनके प्रति बढ़ा है। यही वह कारण है जिसकी काट पीएम मोदी जैसे मायावी के पास भी नहीं है। उनके शब्दजाल यहा नरम पड़ गये हैं। मोदीफोबिया का असर दिल्ली पर नही होता देख कर ही भाजपा के राजनीतिक चिकित्सकों ने आंदोलन के लोगों को भाजपा में जगह देना शुरु किया। विद्वजन समूह जहां होगा वहां गोलबंदी आम है। आम आदमी पार्टी में भी लाबिंग है, इसका फायदा भाजपा ने उठाया। आप के लगभग सभी नराज लोगों को पार्टी मे जगह दी गर्इ। मुख्यमंत्री पद के लायक महिला व दबंग पहचान रखने वाली किरण बेदी का नाम ऊपर लाने के बाद दिल्ली भाजपा व अन्य आगन्तुकों ,सबकी बोलती बंद कर दी गयी। भाजपा के पास मुददों की फोटोकापी है। कांग्रेस के पास सिवाय दोनो पार्टियों को कोसने के अभी दिल्ली में उनके पास कुछ नहीं है । भाजपा सीधे हमला करे या अपने केन्द्र सरकार की उपलबिधंया गिनाये, उसका सीधा लाभ किरण व उनके समर्थक तभी उठा पायेंगे जब जनता के साथ अपने होने का एहसास करा सकेंगे। इस चुनाव में लोग वादों पर कम इरादों पर जादा गौर कर रहें हैं। लोग दोनो नेताओं मे 9-10 का फर्क बता रहें हैं। भाजपा के पास बूथ लेबल कार्यकर्ता हैं जो किसी भी परिसिथति को अपने अनुकूल बनाने मे सक्षम हैं। आप के पास भी कुशल संचालक हैं। दिल्ली को अभेध दुर्ग बनाने के लिये पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल राष्ट्रीय राजनीति से दूर रहे। वहीं लम्बे समय तक आम आदमी पार्टी की समर्थक नही होने की बात कहने वाली किरण,मुख्यमंत्री पद दिये जाने के कथित आश्वासन पर भाजपा में शामिल हो गयीं।
दिल्ली के स्वघोषित भावी मुख्यमंत्री किरण बेदी व अरविन्द केजरीवाल दोनो केा अवसरवादी कहा जा रहा है। एक विद्वान के अनुसार लोकतंत्र की श्रेष्ठता संदेह से परे है,जबकि दिल्ली में जनता के पास संदेह के सिवा कोर्इ विकल्प नही है। दोनो फिलहाल अब नेता हैं और भूल कर भी कोर्इ ये ना पूछना कि उनके एन जी ओ मे पैसे कहा से आता हैं! कितना फण्ड विदेश से मिला और कहा-कहा खर्च हुआ? इस मामले में दोनो एक दूसरे की असलियत जानते हैं इसलिये इसपर खामोश रहना दोनो के लिये बेहतर है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं दोनो एक दूसरे के राजनीतिक सम्बंधाें को उजागर कर रहे हैं जैसे कि आन्दोलन के दौरान किरण बेदी भाजपा के पक्ष में थीं तो केजरीवाल आन्दोलन के समय सोनिया गाधी के साथ रष्ट्रीय सलाहकार परिषद की बैठक में कर्इ बार भाग लेने पहुंचे थे। असल में कहें तो अन्ना आंदोलन ही राजनीति से प्रेरित जान पड़ता है। उसमें भाग लेने वाले सभी प्रमुख लोग राजनीतिक पर्टियों से गहरे जुड़े दिखार्इ देतें है इस राज से पर्दा उठने की शुरुआत स्वामी अगिनवेश-कपिल शिब्बल मोबार्इल वार्ता से हो गयी थी। संंघ परिवार में किसी अभियान को बल देने की जो ताकत है वह रामलीला मैदान पर आंदोलन के दौरान बखूबी देखा गया। आंदोलन का प्रबंधन जिन हाथों में था उसे भी अरविन्द केजरीवाल व किरण बेदी भली-भति जानते हैं।
लब्बेलुआब जो मामला समझ मे आता है उसमे चालें किसी और की है, मोहरे किसी और के । कहना गलत नही होगा कि यदि लोकतंत्र ,सम्पूर्ण जनसमुदाय में निहित है तो ऐसा सपना दिल्ली मे फिलहाल पूरा होता नहीं दिख रहा।

Previous Post
Next Post
No Comments

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher