दुःखद : विकास की फर्राटा सड़क ने सूनी कर दी पूरे गाॅव की माॅग !

‘हाईवे विधवाओं का गांव’  का दुर्भाग्य है फोर लेन !

Sikandrabad : कहते हैं विकास; विनास की जननी होती है ! इस बात को चरितार्थ होेते देखना है तो तेलंगाॅना के विधवाओं के गाॅव आइये नफरत हो जायेगी । high-way1यहाॅ पिछले 9 सालों से जिम्मेदार सिर्फ तमाशा देख रहे हैं। मीडिया रिर्पोट पर गौर करें तो यहाॅ लोग एक-एक करके रोड एक्सीडेंण्ट का शिकार हुए। सड़कों को जहां देश और राज्य की तरक्की का एक मुख्य आधार माना जाता है वहीं तेलंगाना में  नेशनल हाईवे-44 सड़क ने बर्बादी की ओर जा चुके यहां के पेद्दाकुंता गांव के लिए बर्बादी और मौत का जाल बुन दिया।
पूरे गांव में अब  एक ही पुरूष शेष !
vidhvaनेशनल हाईवे नंबर 44 पर वर्ष 2006 में बनी एक बाईपास सड़क पेद्दाकुंता गांव के बीच से गुजरती है। इस कारण गांववालों के घर एक तरफ रह गए और हेडक्वार्टर दूसरी तरफ पहुंच गया, जहां वे मासिक पेंशन लेने और दूसरे गांवों में काम पाने की उम्मीद में जाते हैं। तब से यह सड़क कई गांववासियों की मौत का कारण बन चुकी है। इस सड़क की वजह से पेद्दाकुंता को ‘हाईवे विधवाओं का गांव’  कहा जाने लगा है, क्योंकि अब वहां बसे 35 परिवारों में सिर्फ एक वयस्क पुरूष ही बचा है। बाकी सभी परिवारों में सिर्फ महिलाएं, बच्चे व लाचार बुजुर्ग ही रह गए हैं।

अब तक  35 पुरूष रोड एक्सिडैट में गवाॅ चुके जान !
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पेद्दाकुंता में अब तक गांव के करीब 35 पुरूष सड़क पार करने के दौरान हादसों में मारे जा चुके हैं। 23 वर्षीय कुर्रा अस्ली के मुताबिक उनके पति की मौत भी सड़क हादसे में हुई और भाई और पिता की भी अब घर में देखभाल करने वाला कोई मर्द नहीं रहा है। स्थानीय लोगों ने चार लेन के हाईवे को सुरक्षित तरीके से पार करने के लिए कई बार पैदलों के लिए पुल या भूमिगत सुरंग बनाने की मांग की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। rajmarg38 वर्षीय के. मानी के मुताबिक, कोई हमारी मदद नहीं करता सब आते हैं, फोटो-वीडियो खींचते हैं और चले जाते हैं। देश की सबसे बड़ी पंचायत में पिछले 9सालों से इस बात की चर्चा नहीं हो पाना दुर्भगयपूर्ण है । यहाॅ मुद्दों की बात नही होती , जबकि गाय- मांस व धर्म पर बिना किसी चर्चा के  बोलने  वालोें की संसद या विधान सभा में  कमी नहीं है। इसका जिम्मेदार कैान है  ? इस बात की चर्चा होते ही नेतागण एसेम्बली मे आरोप-प्रत्यारोप शुरु कर देते हैं। पर क्या यही हल बचा है। वास्तव में आबादी के क्षेत्र में फर्राटा हाइवे को पार करने के लिये क्या  कोई ब्यवस्था सरकार को इतने दिनो में नही करनी चाहिये थी! जब तक हम धर्म-जाति से उपर नहीं उठते, ये कथित विकासवादी,  नेता ऐसे ही गाॅव-शहर को अनाथ बनाते रहेंगे।

Vaidambh Media

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