देह व्यापार के चंगुल में नेपाली लडकियां

उत्तर प्रदेष के बस्ती जिले का रेड लाइट मुहल्ला अन्तर्राश्ट्रीय देह व्यापार के लिए जाना जाता है। बस्ती रेलवे स्टेषन से सटा मुख्य मार्ग पर मात्र 25 मीटर की दूरी पर स्थित इटैलिया मुहल्ला देह धंधा करने वाली लडकियांे से गुलजार रहता है। यहां के देह धंधे के बारे में एक कहावत प्रसिद्ध है कि ‘‘बस्ती में लडकी सस्ती’’

यहां के रेड लाइट मुहल्ले में करीब 500 महिलायें सेक्स के धन्धे में लिप्त है। जहां नेपाल, कलकत्ता, मुम्बई जैसी जगहों की महिलायें देह धन्धे में लगी हुई है। चूंकि यह बस्ती का नेपाल के करीब होने के कारण यहां नेपाली महिलाओं की संख्या अधिक है। यह धीरे-धीरे महिलाओं के खरीद फरोख्त का अड्डा बनता जा रहा है। यहां गरीब, मजबूर व लाचार महिलाओं को जबरदस्ती देह धन्धे में ढकेला जाता है लेकिन बस्ती रेलवे स्टेषन पर जाने वाली सडक पर खडी महिलाओं के मेकअप किये मुस्कराते चेहरे व लटको झटकों को देखकर यह नही लगता कि इन लोगो के भीतर कितना दर्द छिपा होगा।
देह धंधे के इस केन्द्र पर बस्ती के जिला प्रषासन या पुलिस की नजर कभी नही जाती कि यहंा कि महिलाये अपनी मर्जी से इस धंधे में लगी है या जबरदस्ती लायी गयी।
यहां पर महिलाओं से जबरदस्ती देह धंधा करवाये जाने का एक मामला हाल ही में प्रकाष में आया जब नेपाल कलिय थाना क्षेत्र के ग्राम माधुरी के रहने वाले हबीब खान नाम के एक षख्स ने 11 जनवरी 2014 की रेड लाइट एरिया से मात्र 300 मीटर दूर स्थित पुरानी बस्ती थाने में यह षिकायत की साढे चार वर्श पूर्व उसकी पुत्री मैनब से कुछ लोगो द्वारा जबरदस्ती देह धंधा करवाया जा रहा है। जो अपने ससुराल बिहार के रक्सौल के आधापुर सिरसिया गांव से अपने पति से नाराज होकर बस्ती तक आयी और यही से गायब हो गयी थी। हबीब खान की इस षिकायत पर थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने पुलिस टीम के साथ छापा मारकर मैनब और उसके दो मासूम बच्चों को मुक्त कराया।
पुलिस द्वारा देह धन्धे से मुक्त करायी गयी मैनब ने जब यहां की असलियत बयान की तो यहां के देह धन्धे की असलियत सामने आ गयी। मैनब ने बताया कि वह साढे चार वर्श पूर्व बिहार स्थित अपने ससुराल से नेपाल अपने मायके जाने के लिए निकली थी लेकिन अकेली होने की वजह से वह अपने दो बच्चों के साथ बस्ती रेलवे स्टेषन पर भटककर आ गयी। जहां उसे पुरानी बस्ती के रसूलनगर मुहल्ले का जावेद नामक युवक मिला। उसने नेपाल जाने वाली गाडी पर बैठाने के लिए अपने आगे पर बैठाया और पहुचा दिया बस्ती के बदनाम मुहल्ले में, जहां उसने मैनब को जबरदस्ती देह धन्धा करने के लिए प्रताडित करना षुरू कर दिया। जब वह देह धन्धे के लिए तैयार नही हुई तो उसे मारा पीटा जाने लगा। जिसके वजह से मैनब टूट गयी और मजबूर होकर वह देह धन्धे में उतर गयी और धीरे-धीरे यहां की अन्य महिलाओं की तरह ग्राहक फंसाने के लटके झटको को सीख गयी लेकिन वह मन से इस धन्धे को नही अपना पायी। मैनब ने बताया कि वह कई बार यहां से भागने की कोषिष की लेकिन उसके दो मासूम बच्चों को जावेद अलग स्कूल में पढने भेजता था। इसलिए बच्चों और यहां के गुण्डों की वजह से नही भाग पायी।
साढे चार वर्शो से इस धन्धे में काम करते हुए उसे एक दिन उसके मायके के व्यक्ति से उसकी मुलाकात हो गयी। तब उसे लगा कि वह उस युवक के माध्यम से अपने पिता तक अपना संदेष पहुंचा सकती है। उस व्यक्ति ने उसकी बात उसके पिता से फोन द्वारा करा दी। उसके पिता हबीब बेटी से बात करने के अपने को रोक नही पाये और 10 जनवरी 14 को वह अपनी बेटी को खोजते हुए बस्ती आ गये। जहां से वह ग्राहक बनकर बस्ती रेड लाइट मुहल्ले में आये यहां पर उन्होंने जब अपनी बेटी केा देह धंधा करते हुए देखा तो बाप बेटी फफक कर रो पडे लेकिन जब अपनी बेटी मैनब को इस दलदल से मुक्त कराना चाहा तो हबीबखान का यहां के गुण्डो की वजह से एक नही चली। इसके वह पुरानी बस्ती थाने के इंचार्ज प्रदीप सिंह से मिलकर अपनी बेटी व उसके बच्चों को मुक्त कराया।
बस्ती रेड लाइट ऐरिया से निकलने के बाद मैनब ने बताया कि यहां पर वह पिछले साढे चार वर्शो से नरक की जिन्दगी जी रही थी। जहां पर दिन रात उसके षरीर को 5-10 ग्राहकों द्वारा रौदा और नोचा खसोटा जाता था। मैं इस जिल्लत भरी जिन्दगी से तंग आ चुकी थी। जब मैनब से उसकी तरह की अन्य लडकियों के यहां होने की बात पूछी गयी तो वह चुप्पी साध गयी। उसके आंखो का भय देखकर सहज ही यह अंदाजा लगाया जा सकता था कि बस्ती जिले के इस बदनाम मुहल्ले में कितनी मजबूर औरते अपने षरीर को नुचवाने पर विवष होगी।
पुलिस ने मैनब की षिकायत पर जबरदस्ती उससे देह धन्धा करवाने वाले जावेद के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जेल भेज दिया गया। यह वाकया रेड लाइट ऐरिया के लिए एक प्रष्न चिन्ह खडा कर दिया है कि कहीं ऐसा तो नही बस्ती नेपाल का करीबी जिला होने की वजह से महिलाओं के जिस्म के खरीद फरोख्त की अन्तर्राश्ट्रीय मण्डी तो नही बन गया है।
उधर हबीब का कहना है कि मैने तो अपनी बेटी को मरा समझ कर भुला दिया था लेकिन मेरी बिटिया मुझे इस अवस्था में मिलेगी मुझे नही पता था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यहां पर महिलाओं की तस्करी भी की जाती है। यह तभी साबित हो सकता है जब पुलिस प्रषासन यहां के मुद्दे पर संवेदित हो लेकिन पुलिस प्रषासन भी यहां के नाम पर पल्ला झाडती है। उधर पुलिस की एंटी ह्नयूमन टैªफिक सेल भी नजर डालने की कोषिष नही करता। पता नही यहां के सेक्स के धंधे कितनी और मैनब फंसी होगी। इस मुद्दे पर पुलिस अधीक्षक वी0पी0 श्रीवास्तव का कहना है कि यहां पर षिकायत के आधार ही कार्यवाही की जा सकती है। सवाल यह है कि मैनब के पिता हबीब ने तो उसे अपना लिया लेकिन क्या यहां की अन्य महिलाओं को स्थिति में पाने पर उनके परिवार वाले अपना पायेगें जो एक अनकहे सवाल के रूप् में खडा है।
लेख-
वृहस्पति कुमार पाण्डेय
जनपद- बस्ती (उ0 प्र0)
मो0- 09454309514

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