धर्म बेंचकर तिजोरी भरनेवाले हवश के पुंजारियों से सावधान !

 संत, फकीर और आध्यात्मिक गुरुओं  के देश में नंगा होता धर्म  !

New Delhi:भारत को पूरे विश्व में विभिन्न धर्मों, आस्थाओं, नाना प्रकार के विश्वास और India's Prime Minister Narendra Modi, center, empties a container of holy water into the crater lake of Grand Bassin (also known as Ganga Talao) as part of a Hindu religious ceremony during the second day of his visit to the Republic of Mauritius Thursday, March 12, 2015. According to the Indian Prime Minister's website Modi is leading a delegation on a three nation tour of Seychelles, Mauritius and Sri Lanka to strengthen ties between the countries. (AP Photo/George Michel)अध्यात्मवाद के लिए जाना जाता है। इस देश की धरती ने जितने महान संत, फकीर और आध्यात्मिक गुरु पैदा किए उतने संभवत: किसी अन्य देश में नहीं हुए। आज भी हमारे देश में जब कभी राजनीतिक और प्रशासनिक उथल-पुथल के चलते यहां की जनता विचलित होती है तो वह निराश होकर यही कहती है कि यह देश तो भगवान और पीरों-फकीरों की बदौलत ही चल रहा है। और यही वजह थी कि भारत को विश्वगुरु कहा जाता था। पर बदलते समय के साथ-साथ जहां जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में ह्रास की स्थिति देखी जा रही है, वहीं धर्म और अध्यात्म का क्षेत्र भी अब दागदार होने लगा है। ऐसे पाखंडी गुरु और स्वयंभू देवी-देवता और तथाकथित भगवान अपने दुष्कर्मों के चलते सुर्खियों में बने रहते हैं। जेलों में अपने कर्मों का फल भुगत रहे हैं या फिर पुलिस से लुकाछिपी करते फिर रहे हैं।

 स्वयं को अवतार बताने वालों के अनुयायी भी कम नहीं !

rampal-gurmeet-धर्मभीरु लोगों की भावनाओं का लाभ उठा कर धर्म के कुछ धंधेबाज स्वयं को भगवान, देवी-देवता या उनका अवतार घोषित कर उन्हें ठगने पर तुले हुए हैं। दूसरी ओर, ऐसे लोगों के प्रति आस्था रखने वाली जनता उनके मोहपाश में इस कदर जकड़ी हुई है कि उसे अपने गुरु या स्वयंभू भगवान के विषय में खुलती हुई हर पोल एक साजिश नजर आती है। और भी हैरत की बात यह है कि बहुत-से उच्चशिक्षित लोग, कई आला अफसर और कई राजनीतिक भी इन फरेबी गुरुओं के आगे माथा टेकने पहुंचते रहते हैं। वहां उनके दुनियादारी के तमाम काम भी सधते हैं। यही कारण है कि अवैध रूप से जमीन हथियाने और धन की हेराफेरी से लेकर कई तरह के गलत कामों का संदेह होने पर भी धर्म के ये खोटे सिक्के चलते रहते हैं।

 ये साजिश नहीं हकीकत है ! जेलों में अपने  पापों की सजा भुगत रहे स्वयंभू संत

asaram_bapu_case_deepak_rana_blogयह कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि आज पूरे देश में इस प्रकार के सैकड़ों स्वयंभू संत, तथाकथित अवतार और नकली भगवान जो कि विभिन्न धर्मों से संबंध रखते हैं, अलग-अलग जेलों में अपने पापों की सजा भुगत रहे हैं। ऐसे ही कई लोग विभिन्न अपराधों के आरोपी हैं और फरार होकर पुलिस से आंख-मिचौली खेल रहे हैं। किसी पर बलात्कार का आरोप है, कोई ‘अध्यात्म’ की राह पर चल कर अकूत धन-संपत्ति का मालिक बन बैठा है, कोई हत्या का आरोपी है, कोई अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित करने का दोषी है, कोई सैक्स रैकेट चलाता है, कोई हवाला कारोबारी है तो किसी पर अपने ही शिष्यों और शिष्याओं के यौन शोषण का आरोप है। जाहिर है, आम अपराधियों की तरह ऐसे स्वयंभू संत, तथाकथित भगवान और अवतार भी अपने-आपको बेगुनाह या अपने विरोधियों की साजिश का शिकार बता रहे हैं।

धर्म या अध्यात्म क्या है समझना होगा !

dharam usa     यहां एक सवाल यह जरूर उठता है कि आखिर प्राचीन और मध्य काल में, यहां तक कि आधुनिक युग में जन्म लेने वाले शिरडी वाले सार्इं बाबा तक पर कोई व्यक्ति इस प्रकार के घटिया और अपमानजनक आरोप क्यों नहीं लगा सका? निश्चित रूप से इसीलिए कि वे सब वास्तविक संत थे। अवतारी महापुरुष थे। उनमें सांसारिक मोहमाया के प्रति कोई लगाव या आकर्षण नहीं था। वे धर्म या अध्यात्म की जीती-जागती प्रतिमूर्ति थे। radhe-maa1पर आज के जमाने में तो संभवत: अध्यात्म की परिभाषा ही बदल गई लगती है। पाखंड, अपराध, स्वार्थ, मायामोह, अय्याशी, धन-संपत्ति संग्रह, राजनीतिक संरक्षण, आडंबर और दिखावा ही धर्म या अध्यात्म बनता जा रहा है। आए दिन साधु या साध्वी का वेश धारण करने वाले किसी न किसी पाखंडी, स्वयंभू देवी या देवता को मीडिया द्वारा बेनकाब किया जा रहा है। पर उनकी अंधभक्ति और ‘आस्था’ में डूब चुके उनके भक्त यही कहते दिखाई देते हैं कि हमारे गुरुया हमारे अवतारी देवी या देवता को फंसाया जा रहा है। उनके विरुद्ध षड्यंत्र रचा जा रहा है। पर कुछ समझदार शिष्य ऐसे भी होते हैं, जो अपने इन पाखंडी और अनाचारी स्वयंभू देवी-देवताओं के बेनकाब होने के बाद ऐसे लोगों से पीछा छुड़ाने में ही अपनी भलाई समझते हैं।

आखिर कौन है  इन गुरुओं के  महिमामंडन का जिम्मेवार  ?

dhongiसवाल यह है कि ऐसे लोगों को गुरु बनाने, उन्हें अवतारी महापुरुष मानने और उनका महिमामंडन करने का जिम्मेवार आखिर है कौन? शिखर पर बैठने की इच्छा आखिर किसमें नहीं होती? अपनी पूजा-स्तुति कौन नहीं करवाना चाहता? खासतौर पर हमारे देश में तो जिसे देखो वही व्यक्ति अपना महिमामंडन कराने, खुद को गुरु कहलवाने या स्वयंभू रूप से उपदेशक बनने के रोग से पीड़ित है। यहां ऐसे तमाम लोग देखे जा सकते हैं जिन्हें स्वयं ज्ञान हो या न हो, पर वे ज्ञान की गंगा बहाने को आतुर दिखाई देते हैं।fake-baba1स्वयं दुश्चरित्र व्यक्ति दूसरों को चरित्रवान होने का पाठ पढ़ाता नजर आता है। धर्म और अध्यात्म से जिसका दूर-दूर तक का कोई वास्ता नहीं, यहां तक कि धर्म और अध्यात्म की परिभाषा भी न जानता हो, ऐसा व्यक्ति धर्म और अध्यात्म का ज्ञान बांटता दिखता है। जो परिग्रह में जुटा हुआ है और अथाह धन-संपत्ति का मालिक बन बैठा है वह अपरिग्रह और त्याग का उपदेश देता फिरता है। सच्चा धर्म सदाचार में अभिव्यक्त होता है। पर यहां तो सदाचार का दूर-दूर तक निशान नहीं। इसका उलटा अवश्य दिखता है।वैसे भी हमारे देश में अपनी झूठी प्रशंसा सुनने और सुन कर गुब्बारे की तरह फूल जाने का काफी चलन है। किसी सिपाही को दरोगाजी कहिए तो वह खुश हो जाता है। जाहिर है, ऐसे में जनता की कमजोरी का फायदा उठाने में उन शातिर लोगों को ज्यादा देर नहीं लगती, जो भीड़ बटोरने और अपनी पूजा करवाने के साथ-साथ धर्म और अध्यात्म के माध्यम से धन-संपत्ति भी अर्जित करना चाहते हैं, अय्याशी की जिंदगी बसर करना चाहते हैं।

कैसे  बेकारी में फॅसा ब्यक्ति अचानक धर्म और ज्ञान बाॅटने लगता है  ?

niramalआज देश के अधिकतर शहरों और कस्बों में अनेक ऐसे अनपढ़ लोग देखे जा सकते हैं जिन्हें कथित रूप से देवियों की चौकियां आती हैं। यह भी देखा जा सकता है कि इस प्रकार की तथाकथित चौकी आने से पहले ऐसा परिवार जो रोटी तक से मोहताज था, वह ‘देवी कृपा’ से संपन्न हो जाता है। जाहिर है शरीफ, निश्छल और आस्थावान लोगों द्वारा की जाने वाली धनवर्षा ऐसे निठल्ले लोगों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बना देती है। और ऐसे लोगों को देख कर दूसरे लोग भी कोई व्यवसाय या कामकाज करने के बजाय इसी पाखंड की दुनिया में प्रवेश कर अपना भाग्य आजमाने लग जाते हैं। sadhu-baba-kissing-actress-shilpa-shetty ऐसे में जरूरत इस बात की है कि हमारे देश की भोली-भाली और आस्थावान जनता अपने-अपने धर्म, समुदाय और विश्वासों के उन्हीं धर्मगुरुओं, देवी-देवताओं, पीर-पैगंबरों, ऋषियों-मुनियों, संतों और फकीरों, महापुरुषों और अपने-अपने धर्मग्रंथों का ही अनुसरण करे और उन्हीं को अपना प्रेरणास्रोत समझते हुए सद्मार्ग पर चलने की कोशिश करे। हमारे देश में किसी भी धर्म से संबंध रखने वाला कोई भी सद्गुरु ऐसा नहीं मिलेगा, जिसने अपने भक्तों से धन-दौलत की उम्मीद रखी हो। किसी भी धर्म का कोई भी सच्चा गुरु या मार्गदर्शक ऐसा नहीं मिलेगा जिसने अपने भक्तों से धन ऐंठ कर अपने लिए आलीशान आश्रम, बंगला या फार्म हाउस बनाए हों। कोई भी अवतारी पुरुष या स्वयं को देवता बताने वाला कोई महापुरुष ऐसा नहीं था, जो वासना का भूखा रहा हो और जिसने ऐशपरस्ती को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया हो।

आस्था व विश्वास को तुच्छ हाथों में ना सौपें !

sadhu babaसभी धर्मों के संतों, फकीरों, अवतारों और देवी-देवताओं ने अपने शरीर पर बड़े से बड़े कष्ट झेल कर, स्वयं को संकट में डाल कर, अपने समय की बुरी ताकतों का विरोध कर और उनकी यातनाएं सह कर समाज को जीने का सलीका सिखाया है। खुद फटे कपड़े पहन कर, भूखे रह कर आर्थिक संकट के दौर से गुजर कर अपने भक्तों के मंगल और उनके उज्ज्वल भविष्य की कल्पना की है। हमारा देश ऐसे ही वास्तविक महापुरुषों के आध्यात्मिक जीवन की बदौलत विश्वगुरु कहा जाता रहा है। लिहाजा, लोगों को चाहिए कि वे आजकल के इन स्वयंभू देवी-देवताओं और पाखंडी अवतारों को अपना गुरु और अपनी आस्था का केंद्र बनाने से परहेज करें।

                                                                                                                     निर्मल रानी

                                                                                                                 Vaidambh Media

 

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