नरेन्दर भाई राम-राम,मै भारत का मतदाता हूॅ ,मुझे कुछ कहना है

आदरणीय नरेन्द्र दामोदर भाई मोदी जी
नमस्कार,
सर्व प्रथम आपको बधाई, नया पदभार ग्रहण करने के लिये ,जिस पर पिछले दस वर्ष से लालकृष्ण आडवाणी जी स्थायी तौर पर विराजमान थे। ये विश्व मे अपने तरह का अनूठा पद है। एन चुनाव में भाजपा द्वारा सृजित किया जाता है। बड़े शान से कार्यकर्ता कहते है-अबकी हमारे पीएम इन वेटिंग नरेन्द्र मोदी जी हैं ,प्यार से नमो टी भी पिलाते हैं। मोदी सरकार के पोस्टर तो किसी भारी भरकम बजट वाली फिल्म के प्रमोशन की तरह लगे । अच्छे दिन आने वाले है पंच ने तो कमाल कर दिया । मेरे दो साल के बच्चे के दिमाग में बस गया है वह जब मूड मे आता है तो आप का प्रचार शुरू कर देता है। वाह क्या बात है, आपकी कारपोरेट सादगी के सब कायल हो गये हैं, बड़ी उम्मीदें हैं आपसे!
संविधान मे पीएम इन वेटिंग पद का वर्णन नही होने से संविधानवेत्ता थोडे भ्रमित हैं लेकिन आप सही है आप लगे रहिए। आपका नमो ब्रांण्ड तो चल निकला इस नाम से आप चाय उद्योग में हाथ आजमाये तो लहर है निकल जायेगा। अरे! क्षमा करेंगे आप उद्योगपति थोड़े ही हैं, आप तो नेता हैं। अवगत कराना था कि गुजरातियों के लिए हमारे देशवासियों में अपार श्रद्धा है क्योंकि जब-जब मामला सत्ता या कुर्सी का रहा,उन लोगों ने सेवा को चुना और सत्ता से अलग हो गये गाॅधी जी के लिये सत्ता का मजा सेवा मे ही था। यह पहला मौका है जब आप अधिकार पाने का हर सम्भव प्रयास कर रहे है। यानी कोई गुजराती भाई अपने बुजुर्गाे से अलग अब 21वीं सदी में अधिकार पाने की कोशिश कर रहा हैै तो ठीक ही है ना। हम आपके उतावलेपन की कद्र करने को विवश हैं क्योंकि हमारे आस-पास का खुदरा जनमत आपके साथ है। सुना है आजकल अदालत में फैसले भी जनदबाव मे लिये जा रहें है। फिलहाल आपको लोग चमत्कारी पुरूष बता रहे हैं,साथ ही विराट भी। मुझे लगता है कि यदि आपको कुछ चमत्कार आता है तो अपने पार्टी के बुजुर्गों का हाजमा ठीक करिये, आपकी एकल दावेदारी पर सर उठा रहे सिपहसालारों को अनुकूल करिये, मुसलमानें को कुछ भी सब्जबाग दिखाने के बजाय उनके बीच जाकर उनका दर्द बाॅटिये। जो परिवार विपक्ष के बहकावे में पड़ कर मुकदमा लड़ रहे हैं या आपके कुशल नेतृत्व में भी स्वयं को असुरक्षित पा रहे हैं उनके पास पहुॅचकर अपने विराट हृदय मे उन्हे स्थान देते हुए स्वयं को चरितार्थ कीजिए। आप कहते हैं यह 21वीं सदी है हम कहाॅ हैं? पर हम देख रहे हैं कि नेताओं की इच्छाशक्ति जिसमे आप भी शामिल हैं, 18वीं सदी में ही अटकी पड़ी है। आपके गुजरात में दलित,आदिवासी, मजदूर व किसान मीलों पीछे छूट गये, जिस टेक्नाॅलजी से आप विदेश का विश्वास जीतना चाहते हैं उसी ने गुजरात का सामाजिक मानव विकास अवरूद्ध कर रखा है और सारी मलाई खा जाने वाला लघु अत्याधुनिक दायरा देश भर मे गुजरात माॅडल के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। मोदी जी आप भली-भाॅति जानते हैं भारत एक संघीय गणराज्य है, विभिन्नता मे एकता का सूत्र। लगभग राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी सत्ता में है यदि सब अपने माॅडल का प्रदर्शन करने लगे तो देश के बजाय क्षेत्रवार चुनावी एजेण्डा तैयार होने लगेगा जो राष्ट्रहित में नहीं होगा। हम संविधान की मर्यादा बनाये रखें तो कोई बुराई तो नहीं। देश के सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों से निरन्तर बात करते रहना होगा, उनके दुःख-दर्द को समझते हुए क्रिया-प्रति क्रिया करनी होगी। आशा है आप पीएम बन जाॅय तो ये बाते भी याद रहेंगी।
एक बात कहूॅ, आप द्वारा उधार के कवितापाठ पर खूब वाह-वाह हो रही है,ऐसे में अटल जी की अपनी कविताओं का जिसमें जोश भरने की अद्भुत शक्ति है उस पर आपने ध्यान नही दिया, जाने दीजिये हो सकता है इसमे भी कोई राज नीति रही हो। फिलहाल बात देश की है आप प्रधानमंत्री बनते हैं तो औद्योगिक विकास में बृद्धि होगी, ऐसा क्यांे होगा इसके जवाब में आप कहते हैं कि टेक्नोलाजी का प्रयोग जितना बढ़ेगा,मानवीय हस्तक्षेप उसी हिसाब से कम होगा और विदेशों मे भारत का विश्वास बढ़ायेगा। 60 साल की काॅग्रेस सरकार को कोसने वाले आप महोदय से निवेदन है कि जो लोग आपको चुनेंगे वे स्वदेशी होंगे कृप्या उनका विश्वास लोकतंत्र में बढ़ाने की सोचिये! हम अपने गोला बारूद अपनों पर चलाने को आतुर हैं ,बातचीत का दायरा बढ़ाईये , सत्ता की धोखेबाज परम्परा को तोडि़ये, गरीब को संसाधन चाहिये उद्योगपति नही। उपभेाक्ता नही किसान को कृषि उद्यमी का दर्जा चाहिए वह भी ’िबना सरकारी एहसान के । नक्सलियों ,आदिवासियों, वनटांगियाॅ को अन्य वंचित समूहों को कथित आतंकियो का खिलौना बनने से रोकिये। इससे देश की प्रगति को पंख लगेंगे। धरातल पर राजनीति नही होगी और हम विदेशों का विश्वास जीतने मे लगे रहे तो चीटियां भी पहाड़ चालकर जमींदोज कर देंगी। उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाना देश हित में है लेकिन ऐसा बरगद भी न लगाइये कि आस-पास की जमीन बंजर हो जाय। हम याद दिलाना चाहते हैं कि लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने वारदोली में किसानों के हक के लिये सरकार के विरूद्ध विजय प्राप्त की क्योकि सरकार स्वार्थी अद्योगपतियों से मिल गई थी। सरदार पटेल स्पष्ट कहते थे कि किसान और उद्योगपति का सम्बंध दूध व पानी का है इसे मजबूत बनाये रखना नेतृत्व की जिम्मेदारी है। इस देश में कृषि व उद्योग साथ-साथ विकसित होने चाहिए। आप के मतदाताओं को जिनसे मैं अब तक मिला हूॅ वे आप से बहुत बड़े उलट फेर की उम्मीद रखते हैं। 10 करोड़ युवा इस अर्थयुग में आपको एक उद्धारक के रूप मे देख रहा है।ं भ्रष्टाचार एक मुद्दा है, लेकिन उसे हमने स्वयं की जिंदगी में अपना लिया है। इसलिये इस पर अकेले सरकार को कटघरे में रखना ठीक नही,विपक्ष को भी जिम्मंदारी लेनी पड़ेगी। हर ब्यक्ति को ईमानदार बनना पड़ेगा। निवर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बेईमान नहीं पर दूतक्रीड़ा के भीष्म की तरह इतिहास उन्हे अपमानित करता रहेगा। पर आप मोदी जी गुजरात के सरकारी आंकड़ों व शहरी चमक से विकास की गवाही मत कराइये क्योंकि कई बार झूठ जोर-जोर से बोलने पर सत्य जैसा लगने लगता है। सरदार पटेल का कहना था कि विजय चाहते हो तो सहनशक्ति बढ़ाओ, चिल्लाहट मचाने वाले अनियंत्रित हो भंवर में फॅस जाते हैं। नेताओं के गाल बजाने पर गाॅधी जी ने आपके इसी बनारस में 6परवरी 1916 को हिन्दू विश्वविद्यालय के उद्घाटनोत्सव पर बौद्धिक जनता को सावधान किया था जो आज भी प्रासंगिक है। उनके थेाडे़ अंश बताना चाहूॅगा-“हम भाषण देने की कला के शिखर पर जा पहुॅचे हैं। अब तो हमारे मनों मे स्फुरण और हाथ-पाॅव हिलने चाहिए।’ शहरीकरण पर उनका कहना था- शहरों मे लोग गलियों से गुजरते हैं,उन्ही गलियों की मकानों से लोग गली में पान थूकते और कूड़ा फेकते हैं। गहनों से लदे उमरावों को भारत के लाखेंा गरीब आदमियों से मिलाता हूॅ तो मुझे लगता है कि मैं इन अमीरों से कहूॅ – जब तक आप अपने जेवरात नही उतारते और इन्हें गरीबों की धरोहर मानकर नही चलते,तब तक भारत का कल्याण नहीं।“ ऐसी सच्ची और साफ बातें आज देशहित में बहुत जरूरी हैं।
आप के नये शहर निर्माण का जवाब गाॅधी जी के कथन में स्पष्ट है। आप से हार्दिक अनुरोध है ,हमारे गाॅवों का विकास करिये हम सबसे आगे होंगे। मोदी जी भारत किसानों का गाॅव है जो जरूत से जादा धरती का कभी दोहन नही करता।यदि आप निष्पक्ष हैं तो आपको गाॅधी तथा देश का सम्मान बचाने के लिये इसी नीति पर चलना होगा। मोदी जी मौखिक पुरूषार्थ नही आपको वास्तव में कुछ कर दिखना होगा। जय हिंद!
प्रेसक:
आपका शुभेच्छु
एक देशवासी जो गर्व के साथ भारतीय कहलाना पसंद करता है।

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