पठानकोट : रक्षा केन्द्रों पर हमला, जिहादी समूहों का नया हथियार !

  सवाल है ; किस प्रकार निपटा गया ?

 New Delhi : पठानकोट में भारतीय वायु सेना के ठिकाने पर चल रही आतंकवाद निरोधक कार्रवाई पूरी तरह निपट जाने के बाद यह सवाल अवश्य उठेगा कि इससे किस प्रकार निपटा गया?pthankot AP_GunBattle_ इस प्रश्न का जवाब भी निश्चित तौर पर तलाशना होगा। हम इस बार भाग्यशाली थे और हमले के 12 से 24 घंटे पहले हमारे पास दो अलग-अलग खुफिया जानकारी थीं जिनसे आतंकियों और उनके संभावित निशाने का अनुमान लगाया जा सकता था। लेकिन इसके बावजूद यह कार्रवाई जितनी लंबी चली और जिस तरह इसमें कई सुरक्षाकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, उसे देखते हुए गंभीर आत्मालोचन तो करना ही होगा, साथ ही जवाबदेही भी तय करनी होगी।

सरकार को खुद से यह सवाल  पूछना चाहिए !

दोहराव रोकने की समुचित तैयारी भी की जानी चाहिए !

हाल के वर्षों में यह पहला मौका नहीं है जब जिहादियों के किसी छोटे समूह ने इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की हो और रक्षा प्रतिष्ठïान पर हमला किया हो।jetaly निश्चित तौर पर यह राहत की बात है कि पाकिस्तान में हुए कुछ ऐसे ही हमलों से इतर वायु सेना की बड़ी परिसंपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा। लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है। अगर हालात से निपटने में गलती हुई है तो उसे पहचाना जाना चाहिए और उनका दोहराव रोकने की समुचित तैयारी की जानी चाहिए। इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि आतंक निरोधक कार्रवाई के संचालन की कमान पर्याप्त सुसंगत ढंग से तैयार की गई थी या नहीं। कमान को लेकर उत्पन्न भ्रम ने ही इस हमले, 26/11 और ऐसी तमाम अन्य कार्रवाइयों में हमें नुकसान पहुंचाया है। सरकार को खुद से यह सवाल भी पूछना चाहिए कि हमलों को लेकर खबरों से निपटने का उसका तरीका सही था या नहीं। समय पर, पारदर्शी ढंग से और एक सूत्र के हवाले से ब्रीफिंग की जाती तो बिना किसी खास जानकारी के खबरों को लेकर की जा रही तमाम बातें सामने न आतीं।

सुरक्षा प्रतिष्ठाानों की  सुरक्षा के लिये अलग से सोचना होगा !
दो बड़े सवाल भी हैं जिनसे निपटना होगा। पहला सवाल ऐसे हमलों की स्थिति में देश की तैयारी से संबंधित है, जिसमें ऐसी कोई गलती न दोहराई जाए जो इस घटना में देखने को मिली है। Terrorist-attack-Pathankot-attack-अगर पठानकोट जैसे हमले पाकिस्तान से संचालित होने वाले जिहादी समूहों का नया हथियार हैं तो सीमा के निकट स्थित रक्षा प्रतिष्ठïानों की सुरक्षा के लिए कौन सा तरीका अपनाया जाना चाहिए? स्पष्ट है कि बुजुर्ग सुरक्षा कर्मियों से भरी डिफेंस सिक्योरिटी कोर पर भरोसा करना मात्र पर्याप्त नहीं होगा। स्थानीय राज्य पुलिस बल और सीमा सुरक्षा बल के साथ करीबी तालमेल भी जरूरी होगा।
अब संवाद प्रक्रिया का क्या होगा?
दूसरा, भारत और पाकिस्तान के बीच की संवाद प्रक्रिया का क्या होगा? stopआखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में क्रिसमस के दिन अनिर्धारित ढंग से पाकिस्तान के लाहौर शहर में रुककर और वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात कर इसे उच्चतम स्तर पर गति दी है। निश्चित तौर पर जब ऐसा करने का निर्णय लिया गया होगा तो इस संभावना को भी ध्यान में रखा गया होगा कि पाकिस्तानी रक्षा प्रतिष्ठïान में पैबस्त भारत विरोधी ताकतें जिहादियों का इस्तेमाल कर इस प्रक्रिया को हतोत्साहित करने का प्रयास करेंगी।modi-nawaz_ पठानकोट हमला उसी आशंका का फलीभूत होना है। अफगानिस्तान में मजारे शरीफ में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला भी इसी कड़ी का हिस्सा हो सकता है। इस सच्चाई को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान से स्पष्टïीकरण मांगा जाना उचित ही है। लेकिन मोदी को अपने दल समेत सभी संबंधित लोगों को यह स्पष्टï कर देना चाहिए कि अभी भी उनका इरादा संवाद प्रक्रिया को जारी रखने का है। अभी तक प्रधानमंत्री समेत सरकार की ओर से उच्च स्तर पर बहुत संयमित बयान ही सामने आए हैं जो इस धारणा को ही बल देते हैं।(B.S.)

V.N.S.

 

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