पनप रहा भ्रष्टाचार का बटबृक्ष

 कानून ताक पर रखकर कुलपति के अजीज, अजीत मिश्र बनाये गये प्रोफेसर
 35 पदों पर 1200 आवेदन, नियुक्त हुए 9

गोरखपुर। महामना मदन मोहन मालवीय को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न‘ दिया गया। देश भर में लोग इसके लिये आभार व्यक्त कर रहें हैं। ऐसे समय मे उनके नाम से सुशोभित संस्थाएं भ्रष्टाचार में आकंण्ठ डूब रही हों, कानून की धज्जियाॅ उड़ा रही हों तो उन्हे आप क्या कहेंगे! देश भर में घूम-घूम कर शिक्षा की अलख जगाने वाले महामना के नाम के पीछे भ्रष्टाचार का बटबृक्ष सरकार के संरक्षण में उगाया जा रहा है, यह शायद ही कोई सहन कर सके।मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय गोरखपुर में भ्रष्टाचार के विशालकाय बटबृक्ष का पोषण स्वयं कुलपति द्वारा किया जा रहा है। विश्वविद्यालय को अस्तित्व में आये अभी एक वर्ष मात्र हुये। बीते एक वर्ष में शिक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त रखना, नवागत कुलपति आंेकार सिंह यादव के लिए एक चुनौती थी। उन्होंने पूरे वर्ष सफल संचालन कर व्यवस्था को सुचारू रखा। इस सफल कृत्य के साथ-साथ विश्वविद्यालय में अनियमितता, भ्रष्टाचार तथा कुप्रशासन भी अपनी जड़े जमाता गया । पूर्व मे इंजीनियरिंग कालेज के प्राचार्य रहे डा. सिंह के कार्यकाल में जिस तरह 39 पदों पर बसपा सरकार में सारे नियम कानून ताक पर रखकर मनमाने ढंग से अपनांे को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई उसी तरह की पुनरावृत्ति वर्तमान सरकार के कार्यकाल में जारी है। बिना स्वीकृत बाइलाज के भर्ती प्रक्रिया,आवेदन के बाद प्रबंध समिति द्वारा अहर्ता मे बदलाव, आरक्षण को परे रखकर शिक्षको का चयन इसके अलाॅंवंा आवेदकों के साथ भेद-भाव कर 1200 अभ्यर्थियों में से मात्र 9 का चयन करना यह सभी विश्वविद्यालय में ब्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं।

विश्वविद्यालय का कार्यकाल अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ कि यहां अनियमितता का बोलबाला हो गया। कानून व्यवस्था को परे रखकर मनमानेपन का खेल विश्वविद्यालय प्रबंधन बोर्ड द्वारा खेले जाने का मामला संज्ञान में आया। बिना सरकार के अनुमोदित बाइलाज के ही विश्वविद्यालय अपने विभिन्न विभागों में शिक्षण कार्य के लिए भर्ती करना प्रारम्भ कर दिया। हालांकि इस संबंध में कुलधापति, मुख्यमंत्री तथा प्रावधिक शिक्षा मंत्री सबके कार्यालय को पत्र के माध्यम से लोगों ने शिकायत दर्ज करा दी। बावजूद इसके अनैतिक भर्ती प्रक्रिया रोके जाने के बजाय आबाध चलती रही। भर्ती प्रक्रिया में भी अपनांे को ही लाभ पहुंचाने का खासा ख्याल रखे जाने की जानकारी सूत्रों के माध्यम से प्राप्त हुयी है। भर्ती में साक्षात्कार तिथि के पूर्व ही इस बात की प्रामणिकता हो गयी थी कि अजीत कुमार मिश्रा जो डीएबी कानपुर में शिक्षण कार्य देख रहे हैं उनका चयन यहां कुलपति के व्यक्तिगत रूचि से किया जाना है। भर्ती प्रक्रिया में चल रहे साक्षात्कार के बाद इनका चयन कर लिया गया। जो स्पष्टतया प्रमाणित करता है कि विश्वविद्यालय में पदों की भर्ती को लेकर गोलमाल जारी है और इसमें सरकार तथा मंत्री भी संलिप्त हैं। अब तक एमबीए, इलेक्ट्रानिक्स, आईटीआरसी, कम्प्यूटर साइंस, एप्लायड, सिविल जैसे विभागों में भर्ती के लिए पद रिक्त हैं। विश्वस्त सूत्रों की माने तो 20 दिसम्बर को प्रबंधन बोर्ड की बैठक के साथ ही जिन अभ्यर्थियों के साक्षात्कार हुए उसमें मात्र 9 लोगों का चयन किया गया जबकि इस कैडर में रिक्त पद संख्या 35 थी। कुल 59 पदों के लिए 1200 आवेदन आए थे। ऐसे में प्रश्न उठना लाजिमी है कि चयन बोर्ड तथा कुलपति ने मात्र 9 लोगों का ही चयन क्यों किया। भर्ती प्रक्रिया को कहीं से भी पारदर्शी नहीं रखा गया है। यदि पारदर्शिता होती तो 1200 आवेदन पत्रों के बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी जबावदेही तय कर पाता। जिन लोगों का चयन साक्षात्कार के दौरान किया गया उसमें सिविल में कार्यरत सैम अली जावेद को प्रमोशन देकर प्रोफेसर बनाया गया जबकि उनसे योग्य लोगों को दरकिनार कर दिया गया। जबकि अंग्रेजी में अजीत कुमार मिश्रा डीएवी कालेज कानपुर को एसोसिएट प्रोफेसर पर नियुक्त किया गया। इसी प्रकार मैकनिकल में 4 अस्टिेण्ट प्रोफेसर, इलेक्ट्रिकल में 2 तथा सिविल में 2 लोगों का साक्षात्कार के आधार पर चयन किया गया। सूत्रों की माने तो अजय कुमार मिश्रा को चयनित करने के लिए कुलपति ने अर्हता चार्ट को ही संशोधित कर दिया जिससे तीन लोगों में सबसे नीचे रहने वाले अजय प्रथम स्थान पर आ गये और उन्हें चयनित कर लिया गया। विश्वविद्यालय में पारदर्शिता का अभाव प्रबंधन बोर्ड का कुलपति की जीहुजूरी मेें फैसला लेना मदन मोहन मालवीय के सम्मान को ठेस पहुॅचाना है, साथ ही साथ योग्य लोगों की जगह अपनों को स्थान दिलाने की प्राथमिकता जैसी परम्परा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान के लिये बहुत ही घातक साबित हो सकती है। कुलपति की भी अपनी कहानी है जो दर्शाती है कि यहाॅ तो पूरी दाल ही काली है–

क्रमशः-

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