पूरी जायदाद ; वारिसों के नाम करने के लिए करें बीमा का इस्तेमाल !

 भारत में  बीमा का चलन पकड़ रहा है जोर !

  New Delhi : भारत में बीमा पॉलिसी लेने के पीछे आम तौर पर दो मकसद होते हैं – कर की बचत और निवेश। वास्तव में यह जोखिम से जुड़ी योजना होती है, जो पॉलिसीधारक और उसके परिजनों को मौत, बीमारी और दुर्घटना के कारण होने वाली विकलांगता जैसी अनिश्चितताओं से बचाती है। अगर नौकरी चली जाए तो यह आय का वैकल्पिक साधन भी बन जाती है। लेकिन आप शायद यह नहीं जानते होंगे कि अपनी पूरी जायदाद अपने वारिसों के नाम करने के लिए भी आप बीमा का इस्तेमाल कर सकते हैं। भारत में धनाढ्य वर्ग इसे समझता है और उसमें इस तरह के बीमा का चलन जोर पकड़ रहा है।
धनाढ्य वर्ग में है इसकी डिमांड !
पिछले कुछ समय से लगातार ऐसा देखा जा रहा है कि धनाढ्य (एचएनआई) वर्ग इस तरह का बीमा करा रहा है। एडलवाइस टोकियो लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक दीपक मित्तल कहते हैं, ‘हम एचएनआई को अक्सर ‘प्रोटेक्शन प्लान’ खरीदते देखते हैं, जिनकी अवधि 60 साल से ज्यादा और कभी-कभी तो 80 साल तक भी होती है। pradhan-mantri-suraksha-bima-yojana-ऐसी पॉलिसी का मकसद अपनी हिफाजत करना भर नहीं होता है। वे अपनी संपत्ति अपने वारिस को देने से जुड़ी तमाम दिक्कतें सुलझाने के लिए भी ऐसा करते हैं।’  मिसाल के तौर पिता का कारोबार किसी एक पुत्र या पुत्री को मिल रहा है। ऐसे में पिता कारोबार से होने वाले मुनाफे के एक हिस्से का इस्तेमाल बीमा पॉलिसियां खरीदने के लिए कर सकता है ताकि उससे उसकी दूसरी संतानों या उसके आश्रितों के लिए संपत्ति तैयार हो सके। इन पॉलिसी में पूरे जीवन के लिए बीमा पॉलिसी भी हो सकती हैं और यूनिट लिंक्ड प्लान (यूलिप) भी हो सकते हैं। इनके अलावा एंडाउमेंट पॉलिसी और पार्टिसिपेटिंग अथवा नॉन पार्टिसिपेटिंग योजनाएं भी ली जा सकती हैं। आम तौर पर धनाढ्य लोग कई बीमा कंपनियों में अलग-अलग प्रकार की कई बीमा पॉलिसी खरीदते हैं ताकि अलग-अलग किस्म के लाभ हासिल हो सकें। इन पॉलिसियों की अवधि अलग-अलग होती है। इनके प्रीमियम भी 2.5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये के बीच होते हैं और हरेक पॉलिसी में बीमित राशि भी 25 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच होती है। मित्तल कहते हैं, ‘हमने देखा है कि कारोबारी 7 से 10 पॉलिसियां खरीद लेते हैं। उनके जरिये वे अपने वारिसों के लिए 5 से 10 करोड़ रुपये की रकम पक्की कर देते हैं।’

इनमें ऐसी पॉलिसी हो सकती हैं, जिनके लिए प्रीमियम बहुत कम वक्त के लिए भरना पड़ता है, लेकिन बीमा की मियाद बहुत लंबी होती है। एकल प्रीमियम बीमा पॉलिसी इन्हीं में शामिल होती है। पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के संस्थापक नवल गोयल कहते हैं, ‘एकल प्रीमियम योजना इस लिहाज से अच्छी योजना मानी जाती है। धनाढ्य निवेशक ने जो संपत्ति इक की है, उसके एक हिस्से का इस्तेमाल कर वह एक बार प्रीमियम चुका सकता है। इससे उसके वारिसों को उसकी मौत होने की सूरत में बीमा के सारे फायदे मिलेंगे और अच्छी खासी रकम भी उनके हाथ आ जाएगी।’बैंकबाजार डॉट कॉम में सलाहकार पराग माथुर का कहना है कि जीवन बीमा ऐसी वित्तीय योजना होती है, जिसकी मियाद खासी लंबी होती है, इसलिए उत्तराधिकार की अपनी योजना में यानी रकम और संपत्ति अपने वारिसों को देने की योजना में इसे शामिल करना समझदारी की बात होगी। इसके लिए सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस का सहारा लिया जा सकता है, जिसके साथ पारंपरिक एंडाउमेंट प्लान और यूलिप को भी मिलाया जा सकता है। टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी बेहद सस्ती होती है और बीमित व्यक्ति की मौत होने पर परिजनों को मोटी रकम दे जाती है। एंडाउमेंट पॉलिसी टर्म इंश्योरेंस के मुकाबले महंगी होती है, लेकिन इससे आप तय कर सकते हैं कि आपको या आपके वारिस को जीवन के किस चरण में कितनी रकम मिलेगी। इसके साथ ही इसमें जीवन बीमा का फायदा भी मिलता है।LIFE

माथुर कहते हैं, ‘आप पहले ही योजना तैयार कर सकते हैं और बीमा पॉलिसी से मिलने वाले रिटर्न का इस्तेमाल जीवन की प्रमुख घटनाओं या जरूरतों के वक्त होना सुनिश्चित कर सकते हैं। उत्तराधिकार की योजना में बीमा को शामिल करने का सबसे बड़ा फायदा यही है। हालांकि बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले आपको यह भी समझना चाहिए कि प्रीमियम का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है, उसमें कितने शुल्क शामिल हैं और बीमा कंपनी आपको किस तरह की गारंटी दे रही है। इन्हीं से तय होता है कि आपको बीमा के जरिये कितना रिटर्न मिलेगा। अगर आप इन्हें समझने में गलती कर बैठे तो आपकी बीमा पॉलिसी आपके लिए उतनी फायदेमंद नहीं रहेगी, जितना आपने सोचा होगा।’ अपनी संपत्ति अपने वारिसों के हाथ में सौंपने के लिए बीमा पॉलिसी का इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कर नहीं चुकाना पड़ता। पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के गोयल कहते हैं, ‘ब्याज, लाभांश अथवा पूंजीगत लाभ की शक्ल में जो भी रिटर्न मिलता है, उस पर कर नहीं चुकाना पड़ता। इसलिए आप कर की चिंता किए बगैर ही अपनी संपत्ति वारिसों को सौंप सकते हैं।’

भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस में एक्चुअरी मुदित कुमार कहते हैं कि परिपक्वता के बाद मिलने वाली रकम ही कर से मुक्त नहीं होती बल्कि जो प्रीमियम भरा जाता है, वह भी कर में छूट दिलाता है। वह कहते हैं, ‘संपत्ति तैयार करने के इरादे से या अपनी संपत्ति अगली पीढ़ी को देने के लिए बीमा का इस्तेमाल करने का फायदा यह है कि परिपक्वता के बाद मोटी रकम तो मिलती ही है, बीमा की अवधि के दौरान पॉलिसीधारक को जीवन सुरक्षा भी मिलती है।

मगर ध्यान रहे..

अगर विरासत देने के लिहाज से बीमा लिया जा रहा है तो पॉलिसीधारक को नॉमिनेशन के मामले में सावधानी बरतनी चाहिए। अगर नॉमिनेशन करा दिया जाता है तो कानूनी वारिस और सामान्य वारिस के बीच में अंतर करना आसान हो जाता है। मित्तल कहते हैं, ‘नॉमिनेशन कर दिया जाए तो विवाद होने का खटका बहुत कम हो जाता है क्योंकि नॉमिनी का पूरा ब्योरा स्पष्टï रूप से दिया गया होता है।’

कुमार कहते हैं कि बीमा योजना खरीदते वक्त पॉलिसीधारक के दिमाग में यह बात जरूर रहनी चाहिए कि पॉलिसी पूरी होने के बाद मिलने वाली रकम से उसके अपने वित्तीय मकसद पूरे होने चाहिए। उसे प्रीमियम भरने की अवधि पर गौर करना चाहिए और यह भी देखना चाहिए कि हर साल वह कितना प्रीमियम भर सकता है। इसके साथ ही पॉलिसी के जोखिम भी उसे समझने चाहिए और यह भी जानना चाहिए कि प्रीमियम नहीं भरने की सूरत में क्या हो सकता है। उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि नॉमिनी के बारो में पूरी और एकदम सही जानकारी प्रदान की जाए।BIMA

बीमा कंपनियां पूरे जीवन के लिए बीमा यानी होल लाइफ प्लान उन्हीं लोगों के लिए लाती हैं, जो इससे मिलने वाली रकम अपने वारिसों को ही देना चाहते हैं। इन योजनाओं के तहत दो तरीके से रकम दी जाती है। एक तो बीमित रकम होती है, जो तरह-तरह के बोनस के साथ तब दी जाती है, जब बीमा की अवधि पूरी हो जाती है। उसके अलावा एक अन्य बीमित रकम होती है, जो पूरे जीवन के लिए होती है। हाल ही में रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस ने लाइफलॉन्ग सेविंग्स प्लान बाजार में पेश किया है। एचडीएफसी लाइफ और आईडीबीआई फेडरल भी इससे मिलती जुलती बीमा योजना लाई हैं। इस तरह की योजनाओं के पीछे विचार यही है कि कोई भी व्यक्ति 30 साल की उम्र में पॉलिसी खरीद ले। उस समय उससे बहुत कम प्रीमियम लिया जाएगा। उसके बाद पूरी उम्र वह बीमा कवर का फायदा उठाए और उम्र पूरी होने पर अपने परिवार के लिए कुछ रकम भी छोड़ जाए। सामान्य बीमा या टर्म प्लान में इस तरह के फायदे हासिल नहीं होते। हालांकि आप खर्च का हिसाब-किताब लगाने बैठेंगे तो आपको पता चलेगा कि पूरे जीवन के लिए बीमा की योजनाएं शुद्घ बीमा योजनाओं के मुकाबले खासी महंगी पड़ती हैं। जितना प्रीमियम कोई पॉलिसीधारक अदा करता है, उसके हिसाब से उसे रकम नहीं मिलती है। यही वजह है कि वित्तीय योजनाकार इस तरह की पॉलिसी की सलाह आम तौर पर नहीं देते। बिगडिसीजंस डॉट कॉम के सह संस्थापक और परिचालन प्रमुख गौरव राय कहते हैं, ‘होल लाइफ प्लान में आपको परिपक्वता का लाभ भी मिलता है और जीवन बीमा का फायदा भी मिलता है। चूंकि बीमा की अवधि पूरा होना भी निश्चित है और पॉलिसीधारक की मौत भी निश्चित है, इसीलिए इसमें अधिक प्रीमियम वसूला जाता है। दूसरी पॉलिसी में दोनों फायदे एक साथ होना मुश्किल है, इसीलिए उनके प्रीमियम भी कम होते हैं।’

राय बताते हैं कि संपत्ति तैयार करने और उसे उत्तराधिकारी को सौंपने के जरिये से ही बीमा पॉलिसी लेने का चलन भारत में ज्यादा नहीं है। हालांकि विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम के तहत पॉलिसी लेकर ऐसा करने का प्रावधान है। अगर पॉलिसी इस कानून के तहत ली गई है तो उससे मिलने वाली रकम पर कोई और दावा नहीं कर सकता, चाहे वह कर्ज देने वाला हो या बैंक हो। इस तरह यह सुनिश्चित होता है कि पॉलिसी से मिली रकम का बंटवारा वारिसों के बीच ही हो। पॉलिसीधारक किसी भी तरह की बीमा पॉलिसी को इस कानून के तहत रख सकता है। इसमें टर्म प्लान भी हो सकता है, पारंपरिक बीमा भी और यूलिप भी। राय कहते हैं, ‘हालांकि इसका नाम विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम है, लेकिन इसके अंतर्गत आप पॉलिसी में अपनी पत्नी और बच्चों को नॉमिनी के तौर पर शामिल कर सकते हैं। मगर यह ध्यान रखना चाहिए कि एक बार पॉलिसी इस कानून के तहत दर्ज कर दी गई तो पॉलिसीधारक को आगे उसमें कोई बदलाव करने का अधिकार नहीं मिलेगा क्योंकि उसके बाद वह पॉलिसीधारक की संपत्ति नहीं मानी जाती।’  (B.S.)
प्रिया नायर

 

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