पैतृक सम्पत्ति का अधिकार !

बाप-दादा की सम्पत्ति में बेटी का हिस्सा !

 New Delhi : आपके पूर्वजों या बाप- दादा से प्राप्त संपत्ति पर सिर्फ आपका ही हक है यह धारणा यदि है तो गलत है।  पूर्वजों से प्राप्त संपत्ति के बंटवारे के लिए कुछ कानून बनें हैं, जिन्हें आम लागों को जानना बहुत जरुरी है। अभी जल्दी ही दिल्ली हाई कोर्ट ने  प्रापर्टी बॅटवारे के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि पिता की पूरी संपत्ति बेटे को नहीं मिल सकती क्योंकि अभी मां जिंदा है और पिता की संपत्ति में बहन  भी हिस्सेदार है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बनाया बेटी को हिस्सेदार।

दिल्ली हाईकोर्ट में जो मामला था उसमें दिल्ली में रहने वाले एक परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति का बंटवारा हुआ । कानूनीं  तौर पर उनकी संपत्ति का आधा हिस्सा उनकी पत्नी को मिलना था और आधा हिस्सा उनके बच्चों  जिसमें एक लड़का और एक लड़की को मिलना था, लेकिन जब बेटी ने संपत्ति में अपना हिस्सा मांगा, तो बेटे ने उसे हिस्सेदार मानने से ईंकार कर दिया । उक्त मुखिया की बेटी नेें हिस्से के लिये अदालत का दरवाजा खटखटाया। मां ने भी बेटी का पक्ष लिया। इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत फैसला सुनाते हुए बेटी को हिस्सेदार स्वीकार किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा ,क्योंकि अभी मृतक की पत्नी जिंदा हैं तो बेटी-बेटे के साथ-साथ मृतक की संपत्ति मे उनका भी समान रूप से हक बनता है। इसके अलावॅा कोर्ट ने बेटे पर एक लाख रुपए का हर्जाना भी लगाया क्योंकि वह इस केस की वजह से मां को आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव  के लिये जिम्मेदार पाया गया। कोर्ट ने  बेटे के दावे को खारिज कर दिया।

पिता की सम्पत्ति में बेटे के साथ बेटी भी समान हिस्सेदार-

विधि विशेषज्ञ बताते हैं कि  अगर किसी पैतृक संपत्ति का बंटवारा 20 दिसंबर 2004 से पहले हो गया है तो उसमें लड़की का हक नहीं बनेगा। क्योंकि इस मामले में पुराना हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम लागू होगा। इस सूरत में बंटवारे को रद्द भी नहीं किया जाएगा। यह कानून हिंदू धर्म से ताल्लुक रखने वालों पर लागू होता है। इसके अलावा बौद्ध, सिख और जैन समुदाय के लोग भी इसके तहत आते हैं। आमतौर पर हमारे समाज में बेटे को ही उत्तराधिकारी माना जाता रहा  है। कहीं-कहीं अपवाद भी इक्का-दुक्का देखने को मिला है जब बेटियों को अधिकार पिता ने देने का साहस किया है। फिलहाॅल  विधि मे वर्ष 2005 के संशोधन  में ये कहा गया कि बेटा और बेटी को संपत्ति में बराबर का हक है। इसके पूर्व  की स्थिति अलग थी और हिंदू परिवारों में बेटा ही घर का मालिक होता था। पैतृक संपत्ति में बेटी को बेटे जैसा दर्जा हासिल नहीं था।

पैतृक संपत्ति क्या  हैं?

सामान्यत: किसी भी पुरुष को अपने पूर्वज से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति, पैतृक संपत्ति कही जाती है। जो बच्चा माता पिता द्वारा जना गया या गोंद लिया गया वह बच्चा अपने जन्म अथवा एडाप्सन के साथ ही पिता की पैतृक संपत्ति का अधिकारी हो जाता है।

सम्पत्ति के प्रकार –

संपत्ति दो तरह की होती है। एक वो जो स्वयं से अर्जित की गई हो और दूसरी जो पूर्वजों से प्राप्त  हो। अपनी कमाई से खड़ी गई संपत्ति स्वर्जित कही जाती है। जबकि बाप दादाओं  से प्राप्त प्रॉपर्टी पैतृक संपत्ति कहलाती है।

पैतृक संपत्ति में वर्तमान में किसका-किसका हिस्सा बनता है?

विधि विशेषज्ञ एडवोकेट नीलम शर्मा बताती हैं कि किसी व्यक्ति की पैतृक संपत्ति में उनके सभी बच्चों और पत्नी का बराबर का अधिकार होता है। अगर किसी परिवार में एक ब्यक्ति के तीन बच्चे हैं, तो पैतृक संपत्ति का बंटवारा पहले तीनों बच्चों में होगा। फिर तीसरी पीढ़ी के बच्चे अपने पिता के हिस्से में अपना हक ले सकेंगे। तीनों बच्चों को पैतृक संपत्ति का एक-एक तिहाई मिलेगा और उनके बच्चों और पत्नी को बराबर-बराबर हिस्सा मिलेगा। वहीं मुस्लिम समुदाय में पैतृक संपत्ति का उत्तराधिकार तब तक दूसरे को नहीं मिलता जब तक अंतिम पीढ़ी का ब्यक्ति जीवित है।

कौन बेंच सकता है पैतृक सम्पत्ति ?

पैतृक संपत्ति  बेचने का  नियम बहुत कठोर हैं। पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार अधिक होते है। यदि सम्पत्ति का विभाजन नही हुआ हो तो कोई भी ब्यक्ति अपनी मर्जी से इसे बेच नहीं सकता। ंएडवोकेट संतोष यादव बतातें हैं कि पैतृक संपत्ति बेचने के लिए सभी हिस्सेदारों की सहमति लेना जरूरी हो जाता है। किसी एक की भी  ब्यक्ति की यदि सहमति नहीं है तो पैतृक संपत्ति बेची नहीं जा सकती है। यदि सभी हिस्सेदार संपत्ति बेचने के लिए राजी हों तो ही पैतृक संपत्ति बेची जा सकती है।

 क्या दूसरी पत्नी के बच्चों को भी समान हक मिलेगा ?

हिंदू मैरिज एक्ट के तहत पहली पत्नी के रहते दूसरे विवाह को वैध नहीं माना जाता लेकिन अगर पहली पत्नी की मौत या सम्बंध विच्छेदन के बाद कोई ब्यक्ति दूसरी शादी करता है तो उसे वैध माना जाएगा। ऐसी स्थिति में दूसरी पत्नी के बच्चों को भी संपत्ति में हक मिलेगा। दूसरी पत्नी के बच्चों को अपने पिता की संपत्ति में तो हक मिलेगा लेकिन पैतृक संपत्ति में उनका हिस्सा नहीं होगा।

जो संपत्ति पैतृक नहीं है, उस पर किसका कितना हक ?

ऐसी प्रॉपर्टी स्वर्जित होती है और संपत्ति का मालिक चाहे तो अपने जीवनकाल में  ही या फिर वसीयत के जरिए मरने के बाद किसी को भी अपनी प्रॉपर्टी दे सकता है।

 वसीयत न हो और सम्पत्तिधारक की मृत्यु हो जाय तो  ?

विधि विशेषज्ञों की राय में पैतृक संपत्ति के अलावा जो सम्पत्ति अपने कमाई गई है, उसमें व्यक्ति की पत्नी, उसके बच्चों का हक तो होता ही है साथ ही अगर व्यक्ति के माता-पिता भी जीविका के लिए अपने बेटे पर निर्भर थे तो उन्हें भी इसमें हिस्सा मिलेगा। यदि माता-पिता  हिस्सा नहीं लेते हैं तो कोई भी उत्तराधिकारी उनका हिस्सा लेकर उनकी जिम्मेदारी उठा सकता है। सीआरपीसी (सिविल प्रक्रिया संहिता) के सेक्शन 125 में मेंटेनेन्स का जिक्र है। इसमें  किसी व्यक्ति पर निर्भर उसकी पत्नी, माता-पिता और बच्चे उससे अपने गुजारे का  विधिक दावा कर सकते हैं।

                                                                                                                                                              Vaidambh Media

 

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