प्रदूषण की बादशाहत से कैसे अलग होगी दिल्ली !

दिल्ली में स्वास्थ्य आपातकाल !

New Delhi: भारत की राजधानी दिल्ली को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर का खिताब मिला है।air-pollution1 वैश्विक मानदंडों को छोडि़ए एक समय प्रदूषण के लिए कुख्यात पेइचिंग शहर को भी दिल्ली ने इस मामले में मात दे दी है। इन प्रदूषित कणों की मार नागरिकों के फेफड़ों पर पडऩा लाजिमी है। सेंटर फॉर साइंस ऐंड एनवायरनमेंट के अनुसार भारतीयों की मौत में वायु प्रदूषण पहले ही पांचवें सबसे खतरनाक पहलू के रूप में दर्ज हो चुका है। स्पष्टï है कि दिल्ली में स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति बन गई और यह सुखद है कि सरकार ने उस पर नियंत्रण की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया है।

सड़कों पर धूल की सफाई वैक्यूम क्लीनर से !
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने पिछले हफ्ते तमाम निर्णय लिए। vaqum cleanerइनमें बदरपुर और राजघाट स्थित तापीय बिजली संयंत्र बंद किए जा रहे हैं और राष्टï्रीय हरित पंचाट के समक्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित दादरी संयंत्र को भी बंद किए जाने की याचिका दाखिल की जाएगी। वर्ष 2017 से यूरो-6 उत्सर्जन मानकों वाली कारें ही चलाई जाएंगी। सड़कों पर धूल की सफाई वैक्यूम क्लीनर से की जाएगी। निर्माण गतिविधियों और मौसमी परिस्थितियों के साथ ही पेड़ों की कटाई से भी हवा में धूल की मात्रा बढ़ती है।

शर्दी के दिनो का प्रदूषण बेहद खतरनाक!

मगर सबसे ज्यादा ध्यान सरकार के तात्कालिक कदमों पर गया है, जिसके तहत सड़क पर कारों के लिए अस्थायी व्यवस्था का प्रावधान है, जिसमें सप्ताह के दौरान सम-विषम क्रमांक वाली गाडिय़ां चलाने की इजाजत होगी।

Vehicles sit in traffic on a road shrouded in haze in New Delhi, India, on Monday, Jan. 20, 2014. India, China and Brazil, three of the largest developing nations, joined the U.S. in a list of the biggest historical contributors to global warming, according to a study by researchers in Canada. Photographer: Kuni Takahashi/Bloomberg

Vehicles sit in traffic on a road shrouded in haze in New Delhi, India

हालांकि अभी तक यह स्पष्टï नहीं है कि ये प्रतिबंध कब तक लागू होंगे और उसकी बारीकियों पर अभी काम किया जाना बाकी है। क्या यह दिल्ली में सभी कारों पर लागू होगा, यहां तक कि उन पर भी जो राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्य इलाकों से भी आती हैं? क्या राज्य और केंद्र सरकार की कारों को रियायत मिलेगी? टैक्सियों के बेड़े के लिए क्या व्यवस्था होगी? फिर भी सोशल मीडिया पर इसको लेकर व्यक्त की जा रही चिंता और विरोध समझ में आता है। चूंकि इसके लिए बहुत कम समयावधि दी जा रही है, ऐसे में जिनके पास एक ही कार है, उन्हें इससे ताल बिठाने में संघर्ष करना पड़ेगा। शहर में मौजूदा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की सीमाएं और कानून प्रवर्तित एजेंसियों की सक्षमता को लेकर ये सवाल वाजिब ही हैं कि क्या यह कदम भी आम आदमी के उत्पीडऩ का एक और जरिया बन जाएगा। इस सम-विषम व्यवस्था को अन्यत्र भी आजमाया गया है। नतीजे यही दर्शाते हैं कि जहां भी इसे आजमाया गया वहां कुछ वक्त के लिए प्रदूषण के स्तर में 18 से 20 फीसदी कमी दर्ज की गई लेकिन जब यह स्थायी हो गया तो उसका तोड़ निकाला गया और यह प्रतिबंध निष्प्रभावी हो गया। स्पष्टï रूप से इसे केवल फौरी आपातकाल उपाय के तौर पर अपनाया जा सकता है और खासतौर से सर्दियों के दौरान जब दिल्ली की हवा में धरती प्रदूषित हवा के प्रसार में सक्षम नहीं होती तो यह स्पष्टï खतरा बन जाता है।

फ्लाप रही बस रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर पहल !

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150 करोड़ रुपये की लागत से बना 14.5 किलोमीटर लंबा बीआरटी कॉरिडोर

हालांकि ऐसा कोई भी कदम अशांतिकारक होगा। दिल्ली सरकार कई महीनों से सत्ता में है और वह इसे तार्किक तरीके से लागू करने के लिए लोगों को तैयार कर सकती थी। इसे लागू कैसे करेंगे, उससे जुड़े वाजिब सवाल भी हैं। अन्यत्र जहां भी इसे अपनाया गया, वहां इसके कार्यान्वयन का जिम्मा बुनियादी रूप से पुलिस का रहा। पुलिस दिल्ली सरकार के नियंत्रण में नहीं आती, बल्कि उसके साथ उसका रिश्ता तल्ख रहा है। पिछली सरकार के दौरान बस रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर जैसी पहल पुलिस के सहयोग के बिना नाकाम हो गई। सबसे खराब परिदृश्य यही होगा कि इस कदम को आनन फानन मेें बिना तैयारी के लागू किया जाएगा और हंगामे के बाद पलट दिया जाएगा, जिससे दिल्ली की आबोहवा में कोई सुधार नहीं होगा। दिल्ली को उसकी हवा की गुणवत्ता सुधारने की दरकार है, जिसमें सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना में सुधार के साथ बेहतर नजरिया अपनाना होगा।

Vaidambh Media

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