प्रधानमंत्री मोदी कर रहे एक उद्देश्यपूर्ण और ऊर्जावान सरकार का नेतृत्व !

  अटल जी की गठबंधन की तुलना में पीछे है मोदी की पूर्ण बहुमतवाली सरकार !

New Delhi :   15 अगस्त , भारत मे स्वतंत्रता दिवस के दिन अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केन्द्र सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि वह बदलाव के लिए वह अधीर से हैं। उन्होने इस पर जोर देकर कहा कि पिछले साढ़े चार वर्ष में उनके द्वारा कई कठोर निर्णय लिए गये। इन बातों में सच्चाई भी है। हालांकि यह भी सच है कि नोटबंदी के रूप में उठाया गया उनका सबसे सख्त कदम उल्टा प्रभाव डालने वाला साबित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक एक उद्देश्यपूर्ण और ऊर्जावान सरकार का नेतृत्व किया। वह एक महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने से नहीं घबरानें वाली सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। उन लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास भी अनवरत जारी है। अब तक सरकार के प्रचार-प्रसार ब्यय व जोश को देखें तोे सरकार की उपलब्धियों को प्रायः बढ़ाचढ़ाकर पेश किया जाना इस कैबिनेट की कमी मे जोड़ा जा सकता है। अपनें मुॅह मिया मिठ्ठू वर्तमान सरकार न तो वृद्घि दर हासिल करने में सफल रही है और न ही निवेश दर में इजाफा ला पाई है अलबत्ता निवेश दर ही घटी है। हलांकि अन्य वृहद आर्थिक मामलों , मसलन राजकोषीय घाटा , मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे की स्थिति में सुधार हुआ है। इसका श्रेय सरकार को मिलना चाहिए लेकिन इसके लिए कच्चे तेल की कम कीमतें भी काफी हद तक वजह रहीं। विभिन्न योजनाओं की बात करें तो मोदी उनका नाम बदलने, उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने और उनके बारे में चर्चा करने में ज्यादा रुचि दिखाते रहे। यदि सत्यता की ओर मुखातिब हों तो वहीं मोदी सरकार के प्रदर्शन के बारे में कहा जा सकता है कि यह सरकार अपनी पूर्ववर्ती सरकार से बेहतर चलने मे सफल रही है। वर्तमान केन्द्र सरकार का नीतिगत मोर्चे पर बहुत बड़े बदलाव का प्रयास न करना और सन 1991 के बाद के सुधारों के उलट संरक्षणवाद अपनाना निराशाजनक है।सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि निर्यात में आ रही कमी और बढ़ते व्यापार घाटे से जिस प्रकार हो सके निपटने का प्रयास है। पूर्ण बहुमत होने के बावजूद जिस रफ्तार से मोदी सरकार काम कर रही है वह अटल जी की खिचड़ी सरकार से आगे नहीं निकल पाई।
अटल सरकार की उपलब्धियाॅ –
अप्रत्यक्ष कर सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई , अब वह वस्तु एवं सेवा कर के रूप में सामने है। विनिवेश के बजाय निजीकरण किया गया था। राजकोषीय उत्तरदायित्व कानून पेश किया गया, ब्याज दरों में कटौती की गई ताकि बीते दशक की आर्थिक तेजी हासिल हो सके, दूरसंचार सुधार शुरू किए गए, एक महत्त्वाकांक्षी राजमार्ग परियोजना शुरू की गई, नए निजी बैंक खोले गए और स्कूल संबंधित एक बड़ा कार्यक्रम शुरू किया गया। आपदा प्रबंधन की दृष्टि से देखें तो सन 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद थोपे गए प्रतिबंधों से तत्कालीन सरकार बखूबी निपटी थी और यह सुनिश्चित किया था कि अर्थव्यवस्था एशियाई संकट के भंवर में न उलझे। वृद्घि दर बहुत अच्छी नहीं रही क्योंकि अर्थव्यवस्था सन 1994-97 की तेजी के बाद के असर से जूझ रही थी, डॉटकॉम का बुलबुला फूट चुका था और लगातार सूखों और अल्प बारिश से कृषि प्रभावित थी। यह कहना उचित होगा कि दोनों प्रधानमंत्रियों में अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। अटल जी की सरकार में बहुत गाॅठें थीं पर यहाॅ तो कोई गाॅठ भी नहीं।
फ्रांस भी विकास की राह पर भारत से है बहुत समानता –
फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रां ने मात्र 15 महीने में जो कर दिखाया वह भारत के राजनेताओं -मुखिया लोगों के लिये एक सबक है। उन्होंने फ्रांस की कर व्यवस्था सुधारी है, राजकोषीय घाटे को कम करके दशक के निम्रतम स्तर पर ले आए हैं, जीडीपी की तुलना में कर्ज का स्तर कम किया है, श्रम बाजार को लचीला बनाया है, छोटे और मझोले उद्यमों की राह आसान की है। निजीकरण कार्यक्रम शुरू किया है जिसका लाभ नवाचार फंड को मिलेगा। आगे वह पेंशन सुधार करने वाले हैं, वेतन को योग्यता पर आधारित कियं जाने का प्रयास जारी है। सरकार के लिए तय अवधि के अनुबंध बढ़ाए जाने हैं। यहाॅ अफसरशाही का आकार छोटा किया जाएगा । शिक्षा और कौशल विकास में निवेश बढ़ाया जाएगा। इनमें से कुछ कदमों की वामपंथियों ने तो कुछ की दक्षिणपंथी धड़ों ने आलोचना की है। वृद्घि दर अभी भी धीमी है। बेरोजगारी ज्यादा है। इससे मैक्रां की लोकप्रियता पर भी असर हुआ है। उन्हें भी वहां विपक्ष ‘सूट-बूट की सरकार’ जैसी उपाधि दे रहा है। वह देश के सरकारी क्षेत्र का आकार घटाने, अर्थव्यवस्था को किफायती बनाने, कर बदलावों के जरिये निवेश जुटाने और तेजी वृद्घि लाने के लिए प्रतिबद्घ हैं। मोदी की तरह उन्हें भी दंभी माना जाता है। वह भी बहुत कम साक्षात्कार देते हैं। परंतु यह तय है कि वह अन्य नेताओं की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय हैं। आप किससे कितना सीख सकते हैं इसके लिये कोई सलाहकार नहीं आप स्व अध्ययन के स्वयं जिम्मेदार हुए ।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 Vaidambh Media

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