पढ़ाई , प्रशिक्षण, रोजगार बन रहा मानव तस्करी का हथियार !

भारत में नेपाली युवक-युवतियों से ठगी ?
भारत-नेपाल सम्बंध की बात जब भी होती है, दोनो देशों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक सम्बंधों का अटूट बंधन मिलता है। दोनों देश सदियों से एक दूसरे के सहोदर रहे हैं। राजनीतिक सम्बंध नरम -गरम होते रहे हैं। पर दोनों के सामाजिक सम्बंधों में कभी दरार नहीं पड़ी। इन्ही मजबूत सम्बंधों  के कारण ही दोनों देशों के बीच हजारों किमी की खुली सीमा के बावजूद सुरक्षा का खतरा इन क्षेत्रों सें कम है, लेकिन खुली सीमांओंवाले देशों में सबसें विकराल समस्या है मानव तस्करी ! नेपाल के सोनौली क्षेत्र स्थित बेलैया थाना में 17 जुलाई को 4 लड़कियों को क्रास बार्डर ह्युमन ट्ैफिकिंग मामले में पकड़ा गयां। उनसे बातचीत में नेपाल पुलिस को चैकाने वाले तथ्य सामने आये। विस्वश्त सूत्रों की मानें तो प्रशिक्षण व नौकरी का झांसा देकर इन्हें भारत ले जाया गया। साथ ही जो लोग इन्हें लाये वे ही भारत में उनके पासपोंर्ट का इंतजाम किये। यही भारतीय पासपोर्ट नेपाली महिलाओं के पास होना पुलिस के शक की वजह बना। हलांकि दलाल बच निकलनें में कामयाब हो गया। इन घटनाओं के कारण यह स्पष्ट है कि भारत में संचालित कोई भी प्रशिक्षण संस्थान विदेशी लोगों को क्या ओर क्यों पढ़ा सिखा रहा है इसका सतर्क मुल्यांकन करते रहना होगा । ये संस्थान मानव तस्करी में संदिग्ध माने जा रहे हैं !
चेली-बेटी बेंच भिखन् के संदेह पर भारत की मार्केटिंग कम्पनिया  नेपाल में प्रतिबंधति  !
दोनो देश के भोेले-भाले नागरिकों के मजबूत सामाजिक रिश्तों में जहर घोलने वाले भेड़िये अपनी कुटिल चाल चलकर समाज व देश को विभाजित करने का कुत्सित प्रयास करते हुए अपने ब्यक्तिगत स्वार्थ में देशद्रोह करने जैसा कृत्य भी कर जातें है। बीते कुछ समय से गोरखपुर शहर में नेपाली युवक-युवतियों को नेटर्वकिंग प्रशिक्षण व ब्यवसाय के बहाने भारत में 10 से 15 दिन के प्रवास दे कर ठगने का प्रयास जारी है। ऐसे ही कृत्य में संलिप्त एक कम्पनी विन-विन इण्टरप्राइजेज वर्तमान में नेपाल में प्रतिबंधित है। लुम्बिनी अंचल के एक नेपाल पुलिस अधिकारी दीपक थापा के मुताबिक नेपाल में चेली-बेटी बेंच भिखन् के संदेह मात्र पर  भारत मे पंजीकृत, मार्केटिंग कम्पनियों ं को नेपाल में प्रतिबंधति कर दिया गया है। सूत्रों की मानें तो  ठगों का एक समूह उत्तर प्रदेश के कई छोटे-बड़े शहरों में ब्यवसायिक प्रशिक्षण के नाम पर अलग-अलग नामों से भारत में कम्पनी पंजीकृत कराके नेपाली युवाओं को आकर्षित कर उन्हे ठगते रहे हैं। इसी तरह एक संस्था गोरखपुर शहर के पादरी बाजार क्षेत्र में ड्ीमडेवलपर्स  ट्ेडमार्ट प्रइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित की जा रही है। इसमें नेपाल के लोग नेपाली भाषा में ब्यवसायिक प्रशि़क्षण प्राप्त करते हंै। यहाॅ 3 वर्षों में कोई भारतीय युवक-युवती प्रशिक्षित नहीं किये गये। जबकि ज्ञात स्रोतो के मुताबिक प्रति ब्यक्ति 50हजार रुपया मात्र 15दिन के प्रशिक्षण हेतु जमा करा लिया जाता है। इस दौरान उनके ठहरने व भोजन ब्यय पर 5 हजार से 15 हजार जो जिस तरह के समूह में आये उसका सहयोग कर प्रशिक्षण संस्थान अलग से इन बेराजगारों की जेब काट रहा है। सूत्र बताते हैं कि 5- 15 -20 की संख्या में आने वाले नेपाली युवक-युवतियों को किराये के कमरेां में बेतरतीब रखा जाता है। जिस तरह से पादरी बाजार में अचानक युवक-युवतियों की भरमार इस समय हुई  है सहसा संदेह हो जाता है कि हम नेपाल में हैं या भारत में।
कम्पनी- कम्पनी का  खेल !
गोरखपुर में ड्ीमडेवलपर्स की शाखा है इसका मुख्यालय बनारस बताया जा रहा है। सूत्र बताते हैं  कि  नेपाल में  प्रतिबंधित विन-विन कम्पनी के डाइरेक्टर ही ड्ीमडेवलपर्स में भी हैं ।ं मजे कि बात ये है कि वर्तमान में कोइ्र भी कम्पनी विन-विन के नाम से उत्तर -प्रदेश में पंजीकृत नहीं है । जो इस टीम की क्रियाविधि को संदेंहास्पद बनाता  है। इस कार्यालय पर आने वाले डाइरेक्टर्स इन तीन सालों में जिस तरह पैदल चलकर एकाएक लग्जरी  गाड़ियो से यात्रा करने लगे आस-पास के लोगों को भी अचम्भित व सशंकित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक  डृीमडेवलपर्स वही काम कर रही है जो विन-विन करती थी। ड्ीमडेवलपर्स ट्ेडमार्ट प्राइवेट लिमिटेड 10 दिसम्बर 2015 को रजिस्टर्ड हुई। यहाॅ डाइरेक्टर्स खेल , खेलकर कम्पनी  को स्थपित करने का रश्ता साफ किया गया। रजिस्ट्रेशन के समय कम्पनी में 6 डाइरेक्टर थे, बाद में स्थनीय हिमांशु तिवारी को भी डाइरेक्टर बना दिया गया जो मकान मालिक का पुत्र है। ज्ञातब्य  है कि सभी 6 डारेक्टर नेपाल के रहने वाले हैं,जबकि कम्पनी,  पादरी बाजार के 107-डी, मानस विहार कालोनी,संगमचैक गोरखपुर, भारत के पते पर रजिस्टर्ड कराई गई । ड्ीमडेवलपर्स ट्ेडमार्ट कार्यालय पदरी बाजार में बात करने पर पता चला कि इस कम्पनी केा सात लोग मिलकर संचालित करते हैं इनमें से एक मकान मालिक हिमांशू तिवारी है जो गोरखपुर में ही बैंककर्मी के पुत्र हैं। पादरी बाजार स्थित इस ट्ेडमार्ट कार्यालय में बातचीत करने वाले ब्यक्ति ने अपना परिचाय नहीं दिया उल्टे यह जरुर बताया कि कार्यालय में सिर्फ नेपाली भाषा बोली जाती है। इस शाखा का कार्यभार दर्पण लाम्बा देखते हैं। इनके अलावां प्रेम बहादुर गोटाने, जीत बहादंुर रनमागर, केहरमान गुरुंग, कुशल राम चैधरी एक महिला  सुमीना लिमबू  निदेशक हैं।

50 हजार लेकर सिखाते हैं कपड़ा बेचना !
यह कार्यालय मुख्य रुप से  अपने प्रशिक्षुओं को कपड़ा बेचना सिखाता है। फिर उन्हे कुछ क्रेडिट देने पर 1 से 1.5 लाख के कपड़े उपलब्ध कराकर प्लेसमेंण्ट जैसी सुविधा भी प्रदान करता है। प्रशिक्षणोपरांत यह माल नेपाल -भारत जहां चाहे बेच सकते हैं। यह काम चेन मार्केटिंग  एमएलएम के जरिये किया जाता है। यहाॅ चेन मार्केटिंग के कारण नेपाली युवाओं की संख्या अपने आप बढ़ती रहती है। एक बार जो 15 दिन का प्रशिक्षण लिया उस पर कम्पनी से माल लेने और अपने 1-1.5 लाख रुपये छुड़ाने होते हैं जो या तो कैश में लिये जाते हैं या फिर 3 नये लोगों को जोड़कर पूरा किया जा सकता है। इस तरह मारकेटिंग के नाम पर नेपालियों को बेखौफ लूटा जा रहा है।
छोटे शहरों में  छद्म केन्द्र स्थापित कर रहे मानव तस्कर !
भारत -नेपाल मैत्री सभा के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने इस मामले को भारत में पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुुंचाने की कोशिश की है। उनका आरोप है कि यह काफी शातिर गिरोह है जो समय-समय पर अलग-अलग रुप धर कर आतें हैं। ये संगठित लुटेरे हैं।इन लोगों के तार मानव तश्करी से जुड़े हैं प्रथम दृष्टया इंकार नहीं किया जा सकता। विश्वस्त सूत्रों की बात ऐसे मामलों की पुष्टि करतीं हैं। महराजगंज जिले के फरेंदा , कोल्हुईं , बृजमनगंज के साथ-साथ सिद्धार्थनगर जिले में भी ये प्रशिक्षण केन्द्र भिन्न -भिन्न नाम से अल्प समय के लिये खोले-बंद किये गये। ये सभी उपनगर नेपाल-भारत के बार्डर क्षेत्र पर हैं। नेपाली युवतियों की ब्यवसायिक प्रशिक्षण की आड़ में तश्करी और बेरोजगार युवाओ का दोहन सोची समझी रणनीति के तहत संचालित हो रही है इसकी सम्भावना सौ फिसद् बनती है। सेफ सोसाइटि के निदेशक वैभव शर्मा ने कहा कि “ट्ैफिकिंग में लिप्त लोग विश्व भर में अलग- अलग पैतरे इस्तेमाल करते रहते हैं। खासकर धोखाधड़ी में रत रहने वाले प्रशिक्षण केन्द्र इनके मार्ग को काफी सुगम बना देते हैं। नेपाल, बिहार ,बंगाल व उत्तर -प्रदेश में ठग बेरोजगार युवक -युवतियों को निशाना बना रहे हैं। सरकार व प्रशासन को इस मामलें मे बहुत सख्त कदम अवलिम्ब उठाने की आवश्यकता है।“
महत्वपूर्ण सवाल !?
वैदम्भ मीडिया द्वारा इस प्रकरण को उठाने का उद्देश्य है कि नेपालियों की आड़ में कोई भी हमारे देश में  घुस आये प्रशिक्षण लंे , ब्यवसाय करंे वह भी अपनी शर्त व भाषा में ! आखिर ये अधिकार उन्हे किसने दिया ?
हमारे देश के युवाओं को यह प्रशिक्षण संस्थान कोई स्थान नहीं दे रहे क्यों ?

किस अधिकार से वह केवल नेपाली लोगों को ही प्रशिक्षित करते हैं ?
यह बेरोजगारों के साथ कितना बड़ा धोखा है ?
कपड़ा बेचने का लाइसेंस है तो प्रशिक्षण कैसे देते हैं ?
नेपाली लोगों के ही साथ उनकी भाषा में ही प्रशिक्षण की अनुमति कहाॅ से ली गई?
विदेशी नागरिकों को इतनी बड़ी संख्या में बंलाने के बाद उनके सुंरक्षा की जिम्मेदारी हेतु क्या कदम उठाये गये ?
क्या विदेश ब्यापार आयात -निर्यात का पंजीकरण भारत या नेपाल में कराया है ?
अंततः , यदि इनमें से कुछ भी नहीं है तो ये संस्था जो पादरी बाजार में संचालित की जा रही है उसके सुचारु संचालन व संगठित लूट में  कितने विभाग प्रत्यक्ष जिम्मेदार हैं ! जिला प्रशासन व सरकार को  इनके विरुद्ध कडे निर्णय तय करने ़होंगे । सबको अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। टाल -मटोल के रवैये ने ही इस समस्या को फलने-फूलने में मदद की है। यदि समय रहते इस तरह के स्वार्थी प्रशिक्षण संस्थानों पर  गहन निगरानी नहीं रखी गई तो ये अपने ही  देशं में  बेखैाफ विदेशी दखल काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

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