बलात्कार के विरुद्ध अभियान 16 दिसम्बर क्रान्ति

युवाओं ने लिया बलात्कार मुक्त भारत का संकल्प

24 December 2012  से लगातार देश को जगाने का कर रहे प्रयास

नई दिल्ली । गत वर्षों से समाचार जगत में किसी खाद-पानी की तरह लगने वाली पोषक खबर यदि कोई है तो वह दुष्कर्म अथवा बलात्कार की घटना है। राजधानी दिल्ली की सड़क पर 16 दिसम्बर 2012 की रात को होने वाले क्रूर कृत्य ने देश ही नहीं विदेशों की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। दिल्ली ही नहीं पूरा देश शर्मसार हो गया। राजनीतिक हल्को में बयानबाजी की झड़ी लगा दी गयी। सिद्धान्त और व्यवहार के हजारों नमूने मूर्धन्य लोगों द्वारा प्रस्तुत किये गये। अन्ततः एक कानून पास करके और आनन-फानन में दोषियों के खिलाफ कार्यवाही कर मामले को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। क्या बलात्कार की या सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं इस खौफ से कम हो गयीं कि बलात्कार करने वाले को फांसी दे दी जायेगी! शायद बलात्कार जैसा मामला मीडिया के लिए किसी हाईप्रोफाइल घटनाक्रम व टीआरपी बढाने वाले समाचार से अधिक कुछ नही है। इलेक्ट्रानिक दुनिया के अंधे अनुयायी युवा क्या स्वयं के व्यवहार में कोई परिवर्तन ला पाएं हैं, क्या हमारी सुरक्षा के लिए बनायी गयी पुलिस इस तरह के मामले को संवेदना के साथ ग्रहण करने लायक हो गयी है? जवाब नकारात्मक ही मिलेगा। अब तो पुलिस पर बलात्कार का मामला बढ़ता देखा जा रहा है।
इन्हीं संवेदनाओं से व्यथित कुछ युवाओं ने लगातार 16 दिसम्बर की घटना को सबके मन में ताजा रखने व सावधान करने की नीयत से 16 दिसम्बर क्रान्ति के नाम से एक संगठन बनाकर लोगों को जागरूक करने का भगीरथ प्रयास शुरू कर दिया है। इन युवाओं का संकल्प है कि बलात्कार मुक्त भारत बनाएं। सोलह दिसम्बर को आहुति देकर अमर होने वाली दामिनी के संघर्ष को याद दिलाकर उसके बलिदान को व्यर्थ न जाने देने के संकल्प के साथ महिलाओं को न्याय व सुरक्षा का रास्ता दिखाने का 16 दिसम्बर क्रान्ति अभियान छेड़ चुकी है। यह एक अराजनीतिक तथा गैर सरकारी संगठनों से विरत मंच है। मंच के लोग निरन्तर दामिनी चैक, जन्तर, मन्तर रोड पर लगातार प्रदर्शन जारी रखे हैं। उनकी तरफ से जो मांग सरकार के समक्ष रखी जा रही है उसमें दामिनी केस से जुडे सभी लोगों को फांसी दिया जाना, बलात्कार तथा शरीर पर तेजाब फेकने वालों को मृत्यु दण्ड जैसा प्राविधान, बलात्कार के मामले में किसी भी किशोर अपराधी को जुवनाइल का लाभ नही दिये जाने तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर मामले का निस्तारण तीन से छ माह के भीतर निपटारा किया जाना शामिल है।
सरकार से अपील करते हुए मंच के लोगों ने मांग की है कि बलात्कार किसी भी श्रेणी की हो, किसी के द्वारा किया गया हो, सजा में कोई अन्तर नहीं रखा जाना चाहिए। बलात्कार के मुकदमों की सुनवाई खुली अदालतों में अथवा वाइस रिकार्ड वाले सीसी टीवी कैमरों के बीच किया जाना चाहिए। इसी प्रकार यदि कोई महिला जानबूझकर पुरूष पर बलात्कार का आरोप मढ़ती है तो सजा का प्राविधान सात वर्ष से कम नहीं होना चाहिए। इससे समाज में शांति व सदभाव का संदेश जायेगा। पुलिस में सुधार को लेकर 16 दिसम्बर क्रान्ति मंच के लोगों का कहना है कि यदि साबित हो जाए कि पुलिस अधिकारी द्वारा सबूतों के साथ छेड़छाड़, एफआईआर में आनाकानी किया गया है तो उसके विरूद्ध न्यायालय से बकायदा सजा का प्राविधान बनाया जाए साथ ही पुलिस स्टेशनों की सभी क्रियाविधि को सीसी टीवी कैमरे से लैस किया जाए। एफआईआर दर्ज कराने को लेकर हजारों शिकायतें रोज ही आती हैं इनके निस्तारण का सही तरीका यही है कि एफआईआर की व्यवस्था पूरे देश में केन्द्रीयकृत हो तथा उसकी मानीटरिंग का लेवल व समय निर्धारित हो जाए।

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