बाल दिवस :भारत कभी उन आदर्शों को नहीं भूला जिसने इसे शक्ति दी !

पं. जवाहरलाल नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे
New Delhi : भारत में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

Ph.Studio/January,1957,A52h/A22a(i)/A57h Beating of the Retreat at Vijay Chowk, New Delhi on January 29, 1957. The Prime Minister, Shri Jawaharlal Nehru, shaking hands with one of the children who had come to see the Beating of the Retreat.

Beating of the Retreat at Vijay Chowk, New Delhi on January 29, 1957.

14 नवंबर को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन है। इसे बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि उन्हें बच्चों से बहुत प्यार था और बच्चे उन्हें चाचा नेहरू पुकारते थे। बाल दिवस बच्चों को समर्पित भारत का एक राष्ट्रीय त्योहार है। चौदह नवंबर बाल दिवस के रूप में मनाने का औचित्य यह है कि पं. जवाहरलाल नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे। उनकी यह अवधारणा सौ फीसदी सत्य है, क्योंकि आज जन्मा शिशु भविष्य में राजनीतिज्ञ, वैज्ञानिक, लेखक, शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर या मजदूर कुछ भी बने आखिर राष्ट्र निर्माण का भवन इन्हीं की नींव पर खड़ा होता है।

Tryst with Destiny ” Speech in Hindi by Pundit Jawaharal Nehru

अवसर को समझें और भविष्य की चुनौतियों को स्वीकार करें?
हमने नियति को मिलने का एक वचन दिया था, और अब समय आ गया है कि हम अपने वचन को निभाएं, पूरी तरह ना सही, लेकिन बहुत हद्द तक।Jawaharlal_Nehru_signing_Indian_Constitution आज रात बारह बजे, जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता की नयी सुबह के साथ उठेगा। एक ऐसा क्षण जो इतिहास में बहुत ही कम आता है, जब हम पुराने को छोड़ नए की तरफ जाते हैं, जब एक युग का अंत होता है, और जब वर्षों से शोषित एक देश की आत्मा, अपनी बात कह सकती है। ये एक संयोग है कि इस पवित्र मौके पर हम समर्पण के साथ खुद को भारत और उसकी जनता की सेवा, और उससे भी बढ़कर सारी मानवता की सेवा करने के लिए प्रतिज्ञा ले रहे हैं।इतिहास के आरम्भ के साथ ही भारत ने अपनी अंतहीन खोज प्रारंभ की, और ना जाने कितनी ही सदियाँ इसकी भव्य सफलताओं और असफलताओं से भरी हुई हैं। चाहे अच्छा वक़्त हो या बुरा, भारत ने कभी इस खोज से अपनी दृष्टि नहीं हटाई और कभी भी अपने उन आदर्शों को नहीं भूला जिसने इसे शक्ति दी।आज हम दुर्भाग्य के एक युग का अंत कर रहे हैं और भारत पुनः खुद को खोज पा रहा है।आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, वो महज एक कदम है, नए अवसरों के खुलने का, इससे भी बड़ी विजय और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं। क्या हममें इतनी शक्ति और बुद्धिमत्ता है कि हम इस अवसर को समझें और भविष्य की चुनौतियों को स्वीकार करें?

इस दुनिया को छोटे-छोटे हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता!

neharu with children

Charming footage of Nehru talking to kids about the need for children’s films

भविष्य में हमें विश्राम करना या चैन से नहीं बैठना है बल्कि निरंतर प्रयास करना है ताकि हम जो वचन बार-बार दोहराते रहे हैं और जिसे हम आज भी दोहराएंगे उसे पूरा कर सकें। भारत की सेवा का अर्थ है लाखों-करोड़ों पीड़ित लोगों की सेवा करना। इसका मतलब है गरीबी और अज्ञानता को मिटाना, बिमारियों और अवसर की असमानता को मिटाना।हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही महत्वाकांक्षा रही है कि हर एक आँख से आंसू मिट जाएँ। शायद ये हमारे लिए संभव न हो पर जब तक लोगों कि आँखों में आंसू हैं और वे पीड़ित हैं तब तक हमारा काम ख़त्म नहीं होगा। और इसलिए हमें परिश्रम करना होगा, और कठिन परिश्रम करना होगा ताकि हम अपने सपनो को साकार कर सकें। वो सपने भारत के लिए हैं, पर साथ ही वे पूरे विश्व के लिए भी हैं, आज कोई खुद को बिलकुल अलग नहीं सोच सकता क्योंकि सभी राष्ट्र और लोग एक दुसरे से बड़ी समीपता से जुड़े हुए हैं। शांति को अविभाज्य कहा गया है, इसी तरह से स्वतंत्रता भी अविभाज्य है, समृद्धि भी और विनाश भी, अब इस दुनिया को छोटे-छोटे हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता है। हमें स्वतंत्र भारत का महान निर्माण करना हैं जहाँ उसके सारे बच्चे रह सकें।

Vaidambh Media

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