भाजपा का टिकट vs कार्यकर्ता … दिल कुछ कह रहा है, दल कुछ !

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क्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय:  भाजपा कार्यकर्ता   अब कहां जांय !
Gorakhpur : टिकट बॅटवारे को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा है । पूर्वांचल के गोरखपुर मंण्डल में सभी को इंतजार था कि भाजपा इस बार बिना किसी क्षेत्रिय दबाव में कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हुए उनके बीच से ही प्रत्याशी जनता के बीच उतारेगी । हलांकि कुछ आयातित भी लाइन में थे। इस बीच कुछ मौकापरस्त , लोकसभा 2014 का परिणाम देखकर  भाजपाई  बन गये थे और अब विधान सभा चूनाव में मनमाफिक टिकट की मांग करने लगे ।  कद्दावर क्षेत्रिय नेताओं को भी उनके पक्ष में जाता देख, कार्यकर्ता बहुत निराश हुए । विरोध प्रदर्शन भी हुआ। अब अपील शुरु हो गई कि देश हित में , प्रदेश हित में भाजपा के पक्ष में मतदान करें । वरिष्ठ नेतागण , कार्यकर्ताओं को उनका पद , दायित्व व लाभ तक समझानें से सोशल मीडिया पर नहीं चूके। फिर भी आक्रोश शंात नहीं है।
चाल, चरित्र और चेहरा !
बांसगांव -ग्रामीण – चिल्लूपार विधान सभा का पेच !
बांसगांव सुरक्षित सीट से रामलक्ष्मण का प्रयास पिछले दो चुनाव से अनवरत है। वे आशान्वित भी थे क्योकि क्षेत्रिय जनता के बीच उन्होने एक छाप बना ली थी। शायद उनका कोई रिश्तेवाला सांसद नही होना उनकी कमजोरी साबित हुआ क्योंकि जो प्रत्याशी भाजपा ने यहाॅ दिया वह बांसगांव सांसद का भाई है। यहाॅ से विमलेश पासवान को टिकट दिया गया,  कभी  यहाॅ से इनकी माता जी सुभावती देवी को सहानुभूति वोट देकर जनता नें सदन भेजा था,  पासवान परिवार इस सीट को अपनी सल्तनत बनाने की मंशा रख् टकिट की दावेदारी हासिल की।  कार्यकर्ता  यह मानने लगें हैं कि कोई रिश्तेदार या पैसा या फिर मजबूत पौवा जादा कारगर है पार्टी का  टिकट पानें के लिये। युवा वाहिनी के सुनील सिंह को भी कहीं से टिकट नहीं मिला वह भी लम्बे समय से वेटिंग में चल रहे हैं। जबकि सपा व बसपा से अलग – अलग समय में विधायक रहे अम्बिका सिंह अब चुनाव से दूर हैं। उनके पु़त्र विपिन सिंह लोकसभा चुनाव 2014 के बाद योगी सेवक के रुप में खुद को स्थपित करनें में लगे रहे। रामभुआल निषाद जो कि निषाद वोटों के मौकापरस्त सौदागर माने जातें हैं उनके भाजपा में शामिल होने से विपिन की मुश्किलें बढ़ गई। सैकड़ों अटकलों के बाद आखिरकार विपिन सिंह को योगी सेवक का लाभ मिला और उन्हे ग्रामीण विधान सभा का प्रत्याशी बनाया गया। रामभुआल जो मौकापरस्त मुसाफिर है उन्हानें सपा का दामन थाम लिया और चिल्लूपार से सपा प्रत्याशी बना दिये गये।
सहजनवाॅ में संकट -पनयिरा से उम्मीद !
सहजनावाॅ सीट से ब्राहम्ण उम्मीदवार जादा जोर देते हैं कि वो भाजपा से प्रत्याशी बनाये जायं। इस आश में यहाॅ क्षेत्र में पोस्टर बैनर की बहार है।  चुनाव का समय नजदीक आते ही सैकड़ों गाड़ियां लेकर घूमने वाले मौंकापरस्त अमीर निष्कृय कार्यकर्ता फर्राटे लगाने लगे। वो भी दावेदारी का फारम भर दिये। इसी शोर शराबे के बीच एक जमीनी कार्यकर्ता हैं अश्विनी त्रिपाठी। जनता के बीच रहकर राजनीति का ककहरा सीखने व लोगों के साथ चलते 35 बरस से उपर हो गये। कभी कोई बगावती तेवर नहीं । पार्टी के साथ पूरी निष्ठा से लगे रहे। पार्टी इन्हे दो बार विपरीत परिस्थिति में सहजनवां से मौका दे चुकी है। वह पार्टी को सम्माजनक स्थिति में पहुॅचाने में सफल  भी रहे। विपरीत परस्थिति में 40 हजार मत के पार जाने वाले प्रत्याशी रहे।  इस बार उनकी जीत पक्की बताई जा रही थी क्योंकि जिस बसपा विधायक को जनता ने चुना वह जनता की उम्मीद पर खरा नहीं उतरा, और विपरीत परिस्थिति में पूर्व चुनाव में  जी एम सिंह के मैदान छोड़ पनियरा भग जाने से जनता क्षेत्र में सदैव उपलब्ध नेता अश्विनी तिवारी की ओर देख रही थी ; कि एन मौके पर भाजपा ने अपने  एक भ्रमणकारी   बुजुर्ग कार्यकर्ता ,सदर सांसाद के प्रतिनिधि शीतल पाण्डेय को टिकट दे दिया। इससे जनता – कार्यकर्ता दोनो में दुख है। खैर कार्यकर्ता तो हर हाल में पार्टी के साथ ही जायेंगे पर यदि विरोध कर बैठै तो किसी क्षेत्रिय नेता के मनमानेपन के कारण यह सीट गवांनी पड़ जायेगी। वैसे सूत्रों पर विश्वास करें तो अश्विनी समर्थक उन्हे चुनाव लड़ने का दबाव दे रहे हैं और उनके सहयोग में 29जनवरी को सहजनवाॅ में विशाल सभा कर बागी होकर चुनाव लड़ने की घेषणा कर सकते हैं।
विरोध विहीन कैम्पियरगंज तो पिपराइच में काॅटे !
कैम्पियरगंज सीट पर कोई विरोध नही है । यहा सारी पार्टीया मानकर चल रहीं हैं कि सीट फतेहबहादुर ही जितेंगे। लेकिन आंकड़े कुछ अलग बात बयां कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी से महज 8 हजार के अंतर से जीत दर्ज करने वाले फतेह को जनता कब तक बर्दाश्त करेगी स्पष्ट कह पाना मुश्किल है। बसपा विधायक जी एम सिंह के हटने से भाजपा के लिए यह सीट निकलने की उम्मीद बढ़ गई है। इनके बीच  जीत-हार का अंतर 5 हजार का था।  कहीं-कही भाजपा का मेहमान  को नाराज करना भारी पड़ सकता है। यही हाल पिरिाइच में देखा जा सकता है। योगी आर्शिवाद की अभिलाषी अनिता जायसवाल को टिकट नहीं मिलने पर उन्होने बागी तेवर दिखाये हैं। यहाॅ से भट्ठा ब्यवसायी तथा भटहट के पूर्व ब्लाक प्रमुख रहे महेन्दरपाल सिंह सईंथवार को टिकट दिया गया। साथ ही इनको सपा के अमरेन्दर निषाद का भी सामना करना है जो निषाद वोटों के एकमेव देव बनें हुए हैं।
चै!री चै!रा में जाति को वाकओवर !
चै!री चै!रा में जातिप्रधान चुनाव अब तक देखने को मिला है। मुण्डेरा बाजार सुरक्षित से टूटकर चै!री चै!रा का आरक्षण तो खत्म हो गया पर अनुसूचित व पिछड़ी जाति बाहुल्यमत इस सीट पर उम्मीदवार के भविष्य का फैसला करता है। यहां पासी व निषाद वोट निर्णायक है। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी का सवर्ण य पिछड़ा होना बहुत असरकारी नही होगा। यहाॅ बसपा व सपा के जोर आजमाइस में भाजपा को तीन नम्बर पर फिल हाल अभी देखा जा सकता है।
कुल मिलाकर प्रत्याशी चयन में भाजपा पूर्वांचल में फेल दिखी । यहाॅ मोदी फैक्टर चल गया तो ही सीटें निकलने की उम्मीद है। यहाॅ सबसे जादा बुराहाल भाजपा के उन सिपाहियेां का है जिनका दिल कुछ और कह रहा है , दल कुछ और!

Vaidambh Media
Election Desk

 

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