भारत में, अमरीकी उद्योग जगत को नही दिखता कुछ खास बदलाव !

आज़ाद भारत के ‘सर्वश्रेष्ठ नेता नरेंद्र मोदी : मीडिया मुग़ल

New Delhi: मीडिया मुग़ल कहे जाने वाले रुपर्ट मर्डोक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज़ाद भारत rupert-murdochका ‘सर्वश्रेष्ठ नेता’ बताया है.अमरीका के न्यूयॉर्क में नरेंद्र मोदी ने जिन टॉप सीईओ से मुलाक़ात की, उनमें रुपर्ट मर्डोक भी शामिल थे. मर्डोक ने ट्वीट किया, “भारत के प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक घंटा शानदार रहा. वो आज़ादी के बाद के बेहतरीन नीतियों वाले सर्वश्रेष्ठ नेता हैं. लेकिन उनके पास एक पेचीदा मुल्क के लिए कुछ हासिल करने का बहुत बड़ा काम है.”
थोड़ी तेज़ी  कीजिए मोदी ज़ी !
Narendra_Modi_PM_न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री से मिलने पहुँचे अमरीकी कंपनियों के सीईओ ने मोदी से आर्थिक सुधारों में तेज़ी लाने के लिए और क़दम उठाने को कहा.इन अधिकारियों ने मोदी से कहा, ”आप जो भी कर रहे हैं करते रहिए, लेकिन थोड़ी तेज़ी से कीजिए.” वहीं मोदी ने भी वादा किया कि भारत की सरकार फैसले लेने में तेज़ी दिखाएगी. मोदी ने उनसे देश में निवेश के अवसरों का फायदा उठाने के लिए कहा.   मोदी भारत की ख़ूबियां गिनाने व बिज़नेस करने का न्यौता देंने ,  डिजिटल इंडिया के अपने सपने को अमरीका के सामने रखेंने और भारत-अमरीकी साझेदारी को नए मुक़ाम तक ले जाने की बात करने के लिये इन दिनों अमेरिका में हैं ।  हो सकता है कि उनके कथनी और करनी से इत्तफाक रखने वाले सवाल उनके सामने तीखी मिर्च की तरह पेश किये जाॅय।
 भारत में कुछ भी कर पाना , अभी नामुमिकन नहीं  : अमरीकी मीडिया
modi american industry ceoभारतीय मूल के जानेमाने निवेशक कंवल रेखी ने अमरीकी मीडिया को दिए बयान में कहा है कि जिससे भी बात करो, वही निराश है, क्योंकि भारत में स्थितयां नहीं बदली हैं. कंवल रेखी ने कहा है, “मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि आपने जो वादे किए थे, उनका क्या हुआ?. मेरी उम्मीद अब ख़त्म हो रही है. उन्होंने बातें बहुत की हैं, लेकिन कुछ ख़ास किया नहीं है.”   अमरीकी उद्योग जगत ने दो दिन पहले ही बयान दिया था कि भारत की नौकरशाही में कोई बदलाव नहीं दिख रहा और वहां कुछ भी कर पाना नामुमिकन सा लगता है.   यह सवाल पूछे जाने पर भारतीय अधिकारी रक्षा, आतंकवाद, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग की बात करने लगते हैं.

आम आदमी के लिए तो अभी कुछ भी नहीं !
modi obama आम भारतीयों की नज़र से देखें, तो मोदी के अमरीकी दौरे से ऐसा  क्या हुआ कि बीते साल भर में उनकी ज़िंदगी बदल गई  या बदलने वाली है ?  वाशिंगटन के बुद्धिजीवी जो भारत-अमरीका रिश्तों पर बारीक नज़र रखते हैं. उनमें से कुछ लोगों का मानना है कि रिश्तों में गर्माहट आई है, ओबामा और मोदी की केमिस्ट्री बनी है. लेकिन अभी पांच ठोस उपलब्धियां गिनाना मुश्किल है. वाशिंगटन के सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक ऐंड इंटरनैशनल स्टडीज़ में भारत-अमरीकी रिश्तों पर ख़ासी पकड़ रखनेवाले रिचर्ड रूसो ने हिंदी मीडिया के अनुरोध पर ऐसी पांच चीज़ों की सूची तैयार करने की कोशिश की. उनका कहना था कि इनमें से सीधे तौर पर आम आदमी के लिए तो कुछ भी नहीं है, फिर भी उन्हें उपलब्धियां मानना चाहिए.
            उपलब्धियां जो ओबामा- मोदी की केमिस्ट्री से निकलते दिखतीं हैं !

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PM Modi at a breakfast meeting with CEOs of American companies

1. एशिया-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए एक साझा समझौते पर हस्ताक्षर:

उनके शब्दों में, ये कागज़ के टुकड़े से ज़्यादा कुछ भी नहीं है. लेकिन अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों ही देश जो भी कर रहे हैं, उसकी बुनियाद रखता है.

   2.   रक्षा टेक्नोलॉजी और वाणिज्य समझौता:    यह एक छोटा मगर ठोस कदम है, क्योंकि

The Prime Minister, Shri Narendra Modi at the Round Table on "Media, Technology & Communications’ -Growth story for India", in New York on September 24, 2015.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi at the Round Table on “Media, Technology & Communications’ -Growth story for India”, in New York on September 24, 2015.

दौड़ने से पहले चलना ज़रूरी होता है. व्यापार: साल 2015 के पहले सात महीनों में दोतरफा व्यापार 5.7 फ़ीसदी बढ़ा है.

  3.  विदेशी निवेश: पिछले साल के पहले छह महीनों के मुक़ाबले इस साल के पहले छह महीनों में विदेशी निवेश 30 प्रतिशत बढ़ा है. लेकिन सिर्फ़ अमरीकी कंपनियों ने कितना निवेश किया है, इसके आंकड़े सामने नहीं आए हैं.

  4. आपसी अड़चनों में कमी: अमरीकी विमानन विभाग ने भारतीय विमानन विभाग को एक बार फिर कैटेगोरी-1 का दर्जा दे दिया है. अमरीकी वाणिज्य विभाग ने भी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी क़ानून के मामले पर भी भारत का दर्जा कम नहीं किया है. लेकिन उसे निगरानी रखे जानेवाले देशों की सूची से बाहर भी नहीं किया है.  अमरीकी विश्लेषकों का कहना है कि डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट में अमरीकी भागीदारी पर कुछ भी साफ़ नहीं है.
भारतीय अधिकारी इस सवाल पर चुप्पी लगा जाते हैं क्यों ?

US Deputy Secretary of State William J. Burns receives Prime Minister Narendra Modi at Andrews Air Force Base, in Washington, United States of America on Sept. 29, 2014. (Photo: IANS/PIB)

क्या भारत गूगल, फ़ेसबुक या माइक्रोसॉफ़्ट को भारत में आखिरी मील तक इंटरनेट पहुंचाने के कार्यक्रम में शामिल होने देगा ? भारतीय अधिकारी इस सवाल पर चुप्पी लगा जाते हैं. विश्लेषकों का कहना है कि मोदी इन कंपनियों को भारत से होनेवाले फ़ायदे तो गिनाते हैं. लेकिन वे यह नहीं बताते कि उनकी तकनीक का भारत इस्तेमाल करेगा या नहीं. वे यह भी नहीं बताते कि कांट्रैक्ट हासिल करने की रेस में इन कंपनियों को शामिल होने दिया जाएगा यह नहीं. प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक मोदी 27 देशों का दौरा कर चुके हैं. अब हर जगह यह उम्मीद की जा रही है कि वे अपने वादे पूरे करें.

Vaidambh Media

 

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