भूमि अधिग्रहण कानून2013 प्रभावी, सबको आवास का लक्ष्य मुश्किल !

 टूट गए बिल्डर लॉबी के सपने !

 Mumbai: भूमि अधिग्रहण विधेयक फिलहाल राजनीतिक दबाव का शिकार हो गया। सरकार के buildingयू-टर्न को कांग्रेस सहित सभी विपक्षी राजनीति दल इसे अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं। विकास की नई इबारत लिखने का ख्वाब सजाए बिल्डर लॉबी के सपने भी टूट गए। विकास की राह की बाधाओं की वजह से अब 2022 तक सबको घर देने की योजना का पूरा होना भी मुश्किल है। हालांकि सरकार अभी भी सुधार करने का दावा करते हुए किसानों में फैलाए गए भ्रम को दूर करने की बात कर रही है।

 

सभी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए आपदा की स्थिति

constructionविवादास्पद भूमि अधिग्रहण अध्यादेश 31 सिंतबर को समाप्त होते ही 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून फिर से प्रभावी हो गया। मोदी सरकार ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में कई बदलाव करते हुए दिसंबर में एक अध्यादेश जारी किया था जिसकी समय सीमा दो बार बढ़ाई गई थी लेकिन राजनीति दबाव के चलते सरकार इस बार कोई फैसला नहीं ले सकी। नए भूमि अधिग्रहण बिल के लागू न होने से सबसे ज्यादा बिल्डर लॉबी निराश हुई है वह इसे देश के विकास में बाधा करार दे रहे हैं। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) का कहना है कि 2013 के भूमि अधिग्रहण विधेयक को जैसा है वैसा ही लिया गया है इससे सभी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए एक आपदा की स्थिति बन गई है। बीएआई के प्रवक्ता आनंद गुप्ता कहते हैं कि अब आगे से कोस्टल रोड रत्नागिरी में जैतापुर पॉवर परियोजना जैसी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करना मुश्किल होगा। देश में चल रही परियोजनाओं को अब समय पर पूरा करना मुश्किल है, यह कदम देश के आर्थिक, औद्योगिक व मूलभूत संरचना के विकास में एक बड़ी विपत्ति सिद्ध होगा।
70 फीसदी किसानों की अनिवार्य सहमति लोकतंत्रिक व्यवस्था में मुमकिन नहीं !

construction-water-wasting-collageडेवलपर बी सिनैयाह कहते हैं कि 2013 के अधिनिमय में 70 फीसदी किसानों की सहमति अनिवार्य है जो लोकतंत्रिक व्यवस्था में मुमकिन नहीं है इसीलिए राष्ट्रीय परियोजनाओं जैसे कि इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, सुरक्षा, हवाई अड्डे आदि परियोजनाओं के लिए जमीन हासिल करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। सरकार को घुटने टेकने की जगह कोई विकल्प तलाशना होगा। भारत सरकार के पर्यावरण व वन सफाई समिति के सदस्य राधाकृष्णन कहते हैं कि भूमि अधिग्रहण बिल की अनिश्चिता के कारण पहले से ही कई परियोजनाएं खटाई मे हैं जबकि इन परियोजनाओं को पर्यावरण व वन मंत्रालय ने मंजूरी दे दी अब इनको पूरा करना और मुश्किल होगा। तमिलनाडु और केरल में सबसे ज्यादा परियोजनाएं अटकी हुई है।

 

रास्ता निकालने के लिये प्रधानमंत्री से मिलेंगे बिल्डर
इंडियन कंस्ट्रक्शन के डीएल देसाई कहते हैं कि अब सन 2022 तक सबको आवास उपलब्ध कराने के लक्ष्य को हासिल करन कठिन है। डेवलपरों के लगभग सभी ग्रुप इस मुद्दे पर सरकार से जल्द ही मिलने की योजना तैयार कर रहे हैं जिससे कोई रास्ता निकल सके। सरकार इस मुद्दे पर अपनी लाचारी पहले ही बता चुकी है। भूमि अधिग्रहण बिल पर चल रहे विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी में मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से कहा कि इस विषय में सरकार का मन खुला है।

सुशील मिश्र

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