महिला रोजगार की तरफ एक कदम

गांव में रहने वाली कम पढ़ी- लिखी किसानों के घर की औरतें सिर्फ चैका चूल्हा तक ही सीमित रह जाती है। जिससे उन्हंे तमाम तरह की दिक्कतों से जूझना पडता है। इन्ही मुसीबतो की एक कड़ी रोजगार से जुड़ी हुई है। जिसका प्रमुख कारण रोजगार के अवसरों पर पुरूषों का वर्चस्व भी रहा है।
इसी कड़ी मंे महिलाओं को आत्मनिर्भर व स्वावलम्बी बनाने के लिए एक शख्सियत जो महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए ढृढ संकल्पित है वह है उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के छोटे से कस्बे महसों में महिलाओं तमाम तरह की रोजगार परक प्रशिक्षण देने वाले चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय। जिनसे विभिन्न तरह के रोजगार प्रशिक्षण प्राप्त कर लगभग 2000 ग्रामीण महिलाओं ने सिलाई कढाई, आचार, जैम जैली, ज्वेलरी मेकिंग, जरी जरदोजी, ब्यूटीपार्लर जैसे तमाम रोजगार से जुड़ अपने परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी उठाये हुए है। साथ ही यहां से टेªनिंग प्राप्त महिलायें महिला अधिकार सहित तमाम मुद्दो पर अच्छी खासी समझ रखती है।
50 वर्षीय इस ढृढ़ इच्छा शक्ति के धनी व्यक्ति के 12 वर्षो के इस ट्रेनिंग देने के लम्बे सफर व तमाम संघर्षो से यह सम्भव हुआ है। वैसे तो चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय रहने वाले मूलतः सन्तकबीरनगर जनपद के छोटे से गांव उमिला के है। उनका एक आदर्श परिवार है जिसमें पत्नी के साथ एक लड़का के साथ एक लड़की है। 12 वर्ष पहले गंवई समाज में महिलाआंे के ऊपर होने वाले अत्याचार व संघर्षो को देखते हुए इनके मन पर बुरा असर डाला और उन्होंने सन् 2000 मंे संकल्प लिया कि वह महिलाओं के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर देगें। इसके लिए बस्ती जनपद के छोटे से कस्बे महसों में जुलाई सन् 2000 में एक कमरा किराये पर लिया और सिलाई की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। उन्हांेने यह काम दो मशीनांे से शुरू किया लेकिन देखते ही देखते उनके पास ट्रेनिंग लेने वाली लडकियों व महिलाओं की संख्या बढ़ती गई फिर उन्हांेने मशीनांे की संख्या बढाई और साथ में अन्य रोजगार परक टेªनिंग देने का मन बनाया जिसके लिए संसाधनांे की कमी व धन आड़े आने लगा। उन्होंने हार नही मानी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निःशुल्क टेªनिंग देने वाले सरकारी विभागों व सामाजिक संस्थाओं से सम्पर्क साधा।
सबसे पहले जिले का खाद्य प्रसंस्करण विभाग आगे आया जहां से वह अपने यहां कम पढ़ी लिखी महिलाओं को जैम जैली, आचार, सहित खाद्य प्रसंस्करण से सम्बन्धित टेªनिंग निःशुल्क दिलाते है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर काम करने वाली तमाम स्वैच्छिक संस्थाओं ने समय-समय पर जरी जरदोजी, ज्वैलरी मेकिंग, ब्यूटीशियन, मेहदी आदि पर टेªनिंग देने का कार्य शुरू किया। जिसमें अछैबर ग्राम विकास सेवा संस्थान नाम की स्वैच्छिक संस्था ने युवा कल्याण विभाग के सहयोग से इनके यहां टेªनिंग लेनी वाली महिलाओं को रोजगार परक ट्रेनिंग देकर स्वयं के पैरों पर खड़ा होने का मौका उपलब्ध कराया है। 12 वर्षो के इस लम्बे सफर में सी0पी0 उपाध्याय ने तमाम महिलाओं को विभिन्न प्रकार की टेªनिंग दिया है। इसके लिए उन्होंने अपने प्रशिक्षण संस्था को अपनी पुत्री शशि के नाम पर शशि प्रशिक्षण संस्थान नाम दिया है। इस दौरान यहां से ट्रेनिंग लेकर कई महिलाआंे ने समाज में अपनी एक अलग ही पहचान बनायी है।
टेªनिंग से मिला रोजगारः- 21 वर्षीया सरिता विश्वकर्मा ने यहा ंसे प्रशिक्षण प्राप्त किया है और स्वयं के घर पर अन्य कार्यो को करते हुए सिलाई का कार्य कर रही है। जिससे प्रतिमाह डेढ़ से दो हजार रूपये तक की बचत कर लेती है।
गीता विश्वकर्मा ने चन्द्रिका उपाध्याय के यहां से सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वयं का टेनिंग सेन्टर खोल लिया है। एक किसान परिवार की इस महिला ने टेªनिंग देने के दौरान ही अपनी पढ़ाई भी बी0ए0 तक पूरी कर ली। गीता विश्वकर्मा को स्वयं ट्रेनिग देते हुए 10 वर्ष हो चुके है। वह अन्य कार्यो के साथ सिलाई से दो हजार तक बचत कर ही लेती है। अभी तक उन्हांेने लगभग 300 महिलाओ को प्रशिक्षण प्रदान करके स्वयं के पैरों पर खड़ी होने में मदद किया है। 12वीं जमात तक पढ़ी 22 वर्षीय सुनीता ने तो यहां सिलाई कढाई और जैम जैली, अचार मुरब्बा बनाने की टेªनिंग लिया आज वह उत्तर प्रदेश सरकार के परिषदीय विद्यालयो में बतौर सिलाई कढाई और अचार मुरब्बा बनाने की पार्ट टाईम टेªनिंग देेने का कार्य कर रही है। इसके साथ-साथ नीतू, सुनीता, रेनू राय, रूपा, सरिता गौड़, बुद्धिमति आदि महिलाओं ने यहां से टेªनिंग प्राप्त कर सरकारी स्कूलों की लडकियांे को रोजगार परक टेªनिंग देने का काम कर रही है और 5-10 हजार रूपये महीने कमा रही है। स्नातक तक पढ़़ी 23 वर्ष की जमीला खातून ने सी0पी0 उपाध्याय के यहां से टेªनिंग लेने के बाद स्वयं का महिला सिलाई, कढाई व ब्यूटीशियन प्रशिक्षण केन्द्र खोला है। जहां वह गवई महिलाओं को सिलाई, पेन्टिंग, ब्यूटीशियन की टेªनिंग देकर 300 से 500 रूपये प्रतिदिन कमा ही लेती है। वह इस कमाई से अपने माता-पिता की माली मदद भी कर रही है। अधिक जानकारी के लिए चन्द्रिका प्रसाद के मोबाईल न0 8543870647 या सरिता के मोबाईल नं0 8756659689, या गीता विश्वकर्मा के मो0 नं0 9984114384, पर सम्पर्क किया जा सकता है।
चन्द्रिका उपाध्याय का कहना है कि जब हमारे यहां से टेनिग लेनी वाली महिलायंे खुद के पैरों पर खड़ी होकर कार्य कर रही होती है तो बहुत ही खुशी होती है। उनके इस सफर को लेकर थोड़ी बातचीत के अंश यहा ंप्रस्तुत हैः-
प्रश्नः आपके मन में महिलाओं को इस तरह आत्मनिर्भर बनाने की बात कैसे उभरी?
उत्तरः मैंने अपने पैतृक गांव में शराबी पतियो के कारण कई महिलाओं का आर्थिक तंगी से जूझते हुए देखा, जिससे मैने सोचा की क्यांे न महिलाओं को आत्म निर्भर बनाया जाय जिससे वह खुद के पैरो पर खड़ी होकर अपने बच्चों का पालन पोषण कर सके। इसके लिए मैंने रोजगार परक प्रशिक्षण देने का निश्चय किया।
प्रश्नः आपने इसके लिए अपने गांव को छोड़कर दूसरे जगह रोजगार प्रशिक्षण देने का कार्य किया है ऐसा क्यों?
उत्तरः मेरे घर छोड़ने का प्रमुख कारण है जहां मैं रोजगार के लिए टेªनिग दे रहा हूं वहां कि महिलाओं की सामाजिक स्थिति सही नही है इसलिए मंैने इस छोटे से कस्बे महसों को चुना।
प्रश्नः प्रशिक्षुओं को निःशुल्क टेªनिंग दे रहे है तो मशीनों आदि का रख-रखाव कैसे होता है ?
उत्तरः इसके लिए प्रशिक्षुओं से नाम मात्र का शुल्क लिया जाता है जो उनके प्रशिक्षण में प्रयोग आने वाले कच्चे माल व मशीनों के रख-रखाव में लगाया जाता है।
प्रश्नः आपके इस मुहिम में कैसी-कैसी परेशानियां आई?
उत्तरः मेरे इस मुहिम सबसे बड़ी परेशानी संसाधनों कमी रही लेकिन इस मुहिम में मेरे पत्नी व बच्चांे ने सहयोग किया और रात को ये लोग पीको, सिलाई, आदि का कार्य करते है जिससे संसाधनो की कमी नही होने पाती।

प्रश्नः आप अपने इस मुहिम को लेकर क्या कहना चाहेगें?
उत्तरः मेरी इच्छा है कि देश की हर महिला पढ़ी लिखी आत्म निर्भर हो इसके लिए उन्हें खुद आगे आना होगा।

अनुसूईया को भी मिला जीने का रास्ता
बस्ती जिले की ही बहादुरपुर ब्लाक सपहा गांव की 28 वर्षीय अनुसूईयांे देवी के घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नही थी। इनके पति द्वारा कमाये गये पैसे से बडी मुश्किल से ही इनके घर का खर्चा चल पाता है। जिसको लेकर अनुसुईयों के मन में बडी कसक रहती थी कि काश वह भी अपने परिवार के भरण पोषण मे पति को सहयोग करें लेकिन कम पढी लिखी होने के कारण कही ंनौकरी भी तो नही कर सकती थी लेकिन इन्हें इनकी मंजिल तलाश करने के सहयोग किया चन्द्रिका उपाध्याय ने जहा से इन्हांेने ज्वैलरी मेकिंग, सिलाई-कटाई, ब्यूटीशियन की टेªनिंग लिया और फिर स्वयं का एक सिलाई मशीन खरीद कर घर पर ही सिलाई का कार्य शुरू कर दिया। पहले तो इनके पास काम कम ही आते थे लेकिन कार्य की गुणवत्ता को देखते हुए इनके पास काम आने लगे और अब तो आस-पास के गांवों के लोग भी इनके पास सिलाई के लिए कपड़े दे जाते है। जिससे यह प्रतिमाह 5-6 हजार तक कमा लेती है। यही नही शादी विवाह के दिनों में दुल्हन सजाना व खाली समय में ज्वैलरी बनाने का कार्य करती है। शादी विवाह के दिनांे में तो यह आठ से दस हजार रूपये तक कमा लेती है। अब इनके परिवार में आर्थिक तंगी का दौर समाप्त हो चुका है और वह अब पति के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर चल रही है। इनका कहना है कि चन्द्रिका जी ने इनको एक रास्ता दिखाया और जिस पर मैंने चल कर अपनी मुश्किलें कम कर दी। अब मैं भी गर्व से कहती हूं कि मुझे किसी के सामने हाथ नही फैलाना पडता है।

लेख-

वृहस्पति कुमार पाण्डेय
मो0- 09454309514

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