मानवस्वार्थ के शिकार, बेगुनाह जीव 1.7 हजार !

समय रहते नहीं चेते,  तो पृथ्वी से विलुप्त हो जायेंगे 1700 जीव !

New Delhi : कथित विकास के लिये पागल हो चुके टेक्नोलाॅजी पसंद देशों के कारण, ईश्वर के बनाये तमाम बेगुनाह जीवों के जीवन पर पर स्वार्थी मनुष्योें ने ग्रहण लगा दिया है।  ताल-पोखरे-झील,समुद्र,जंगल,पहाण सब पर अतिक्रमण बढ़ाते हुए जलचर,थलचर और नभचर की लगभग 1700 प्रजातियों के जान -माॅल पर संकट खड़ा कर दिया है। पर्यावरणविद् इस तरह की लूट-मार और महत्वाकाॅक्षा से आनेवाले परिणामों के आंकलन से भौचक्क और ब्यथित हैं। जलवायु परिवर्तन विषय पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन की रणनीतिक योजना में  130 अध्ययनों का समीक्षा पत्र पर अध्ययन करते हुए पर्यावरणविद्ों ने सहमति जताई  कि जीवन चक्र का संतुलन बिगड़ रहा है!  इसे समय रहते नहीं रोका गया तो जीवन पर संकट आ जायेगा। इस अध्ययन से पता लगाया गया कि जलवायु परिवर्तन  हमारे प्रमुख जीव  प्रजातियों को कैसे प्रभावित कर रहा है ?

राजनीतिक एवं आर्थिक निर्णयों से उत्पन्न हुआ संकट !

पत्रिका ‘नेचर क्लाइमेट चेंज’ में प्रकाशित  अध्ययन से पता चला कि मनुष्य द्वारा लगातार बढ़ रहे भूमि इस्तेमाल का खामियाजा अन्य जीवों को जान देकर भुगतना पड़ सकता है।  इसके कारण अन्य जीवों का प्राकृतिक आवास कम हो रहा है और इसी वजह से जीवों की 1700 प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।। अमेरिका स्थित येल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ‘वाल्टर जेट्स‘बताते हैेे कि, ‘‘हमें अपने विश्लेषण से यह पता चला कि वैश्विक भूमि प्रयोग से जुड़े राजनीतिक एवं आर्थिक निर्णयों के कारण विश्वभर में जीवों का प्राकृतिक आवास बहुत हद तक कम हो जाने की आशंका है।’’ अध्ययन में यह पाया गया कि मनुष्यों द्वारा भूमि प्रयोग बढ़ाए जाने से आगामी 50 वर्ष में 1700 प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा बढ़ने की आशंका है। स्तनधारियों के लिए प्रभाव व्यापक हैं और इसमें संसाधनों का दोहन करने और नई पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने की कम क्षमता शामिल है। उदाहरण के लिए, प्राइमेट्स और मार्सुपुअल्स, जिनमें से कई स्थिर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में विकसित हुए हैं, तेजी से बदलाव और जलवायु परिवर्तन द्वारा लाए गए चरम घटनाओं के प्रति संवेदनशील हैं। इसके अलावा, प्राइमेट्स और हाथी, जो बहुत धीमी प्रजनन दरों की विशेषता रखते हैं और पर्यावरणीय परिस्थितियों में तेजी से बदलाव के अनुकूल होने की उनकी क्षमता को कम करते हैं वे भी असुरक्षित हैं।

पक्षियों के लिए, प्रजनन और गैर-प्रजनन दोनों क्षेत्रों में नकारात्मक प्रतिक्रियाएं आमतौर पर उन प्रजातियों में देखी गईं जो पिछले 60 वर्षों से तापमान में बड़े बदलाव का अनुभव करती हैं, उच्च ऊंचाई पर रहती हैं और उनके वितरण के भीतर कम तापमान का मौसम होता है। कई प्रभावित प्रजातियां जो जलीय वातावरण में निवास करती हैं, जिन्हें निवास स्थान के नुकसान, विखंडन और हानिकारक क्षारिकरण के कारण तापमान में वृद्धि के लिए संवेदनशील माना जाता है। इसके अलावा, पहले से ही निवास स्थान के क्षरण से उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय वन क्षेत्रों में जलवायु में परिवर्तन से वन-निर्भर प्रजातियों को खतरा हो रहा है।

पृथ्वी पर जीवन सुरक्षा हेतु, अनुसंधान और संरक्षण के प्रयास तेज हो !

‘वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी‘ और ‘यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड‘ के सह-लेखक ‘डॉ जेम्स वाटसन‘ कहते हैं कि पर्यावरण से प्राप्त हमारे परिणाम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि वर्तमान में स्तनधारियों और पक्षियों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बहुत कम अनुमानित है।

इन प्रजातियों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर, हमें और आकलन करने की आवश्यकता है। हमें इससे सम्बन्धित व्यापक जानकारी लोगों तक पहुॅचानी जरुरी है। हमें यह भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि विभिन्न देशों की सरकारें व उद्योगपति इस ओर ध्यान दें कि अब विलुप्त हो रही प्रजातियों को रोकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम भी उठाये जांय। जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का खतरा न होकर वर्तमान की भी गम्भीर समस्या है। नेचर क्लाइमेट चेंज नामक पत्रिका में रिपोर्ट करने वाले वैज्ञानिकों के एक दल का कहना है कि खतरे और लुप्तप्राय वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को व्यापक रूप से कम आंका गया है। एक नए विश्लेषण में, लेखकों ने पाया कि लगभग आधे स्तनधारी और लगभग एक चैथाई पक्षी वाइल्ड रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटड स्पीशीज पर जलवायु परिवर्तन से नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिससे लगभग 700 प्रजातियाँ प्रभावित होती हैं। पिछले आकलन में कहा गया है कि केवल सात प्रतिशत स्तनधारी और चार प्रतिशत पक्षी लाल सूची में थे। ये पर्यावरणविद् वैश्विक जगत को सलाह देते हैं कि पृथ्वी पर जीवन सुरक्षा हेतु, अनुसंधान और संरक्षण के प्रयास तेज होने चाहिए और जो खतरे सामने दिख रहे हैं उनका समुचित सतर्क कार्यक्रम क्रियान्वित होने चाहिये।

 Dhananajay shukla                  

                                                                                                                                                                  Vaidambh Media

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