मानव तस्कर बाजार : कब तक ऑख मूंदकर काम चलायेंगे जिम्मेदार !

कुप्रथाओं का रंगरोगन :  भिन्न-भिन्न तरीके से स्त्री – बच्चों का शोषण !

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Gorakhpur :   मानव क्या से क्या बन रहा है !  संसार के समस्त प्राणी जगत की इकलौती उत्तम कृति है मानव।  समस्त प्राणी मात्र की जिम्मेदारी का भरोसा पाकर , जिस पर पूर्ण आश्वस्त हो शायद वह सदाशिव औढरदानी उर्जा के नित प्रवाह के निमित्त भस्मांगरागाय हो समाधिस्त हो गया है वही मनुष्य अपने अल्प विवके का इस्तेमाल करते आज पशु और राक्षस सम्बोधन से हजारों कोस नींचे धंस गया है। मनुष्य का मनुष्य के लिये मनुष्य का ब्यापार करना बहुत पुरानी कुप्रथा रही है जो वैश्विक देखने को मिलती है। आज जब हम मनुष्य स्वयं को विकास के चरम पर होने का दावा करते हैं तो ऐसी कुप्रथाओं का रंगरोगन कर भिन्न-भिन्न तरीके से स्त्री बच्चों का शोषण कर रहे हैं। मानव अंग प्रत्यारोपण के दौर में इसके गलत इरादे भी सक्रिय हैं। मानव अंगों का ब्यापार चोरी छिपे जारी है । वैश्विक कानून के पाबंद होने के बावजूद मानव तस्करी बदस्तूर जारी है। सम्भव है, यह किसी आतंकवादी घटना से कम भयावह थिति नहीं है! पर जिम्मेदार लोगों को ये घटनायें दोयम लगती हैं। जो इस भयावह हालात के कोढ़ में खाज का काम कर रहा है।

दस हजार में बिक रही नेपाली महिलाओं की त्वचा !
बनाये जाते हैं मानव लिंग व स्तन !

human traffमानव तस्करी के घिनौने बाजार में रुपया कौन लगाता है ! कहॉ से आता है ! क्यों आता है ! इस पर विश्व के साथ -साथ   आम- जन को भी गम्भीर व सतर्क होना होगा ! कहीं ऐसा तो नहीं कि हम भी जाने -अनजानें उनका साथ दे रहे हैं। हाल ही में आई थामसन रायटर्स फाउण्डेशन की ओर से दी गई एक जानकारी ने मानव की सोच व समझ को झकझोर कर रख दिया है। विश्व के इस गंदे विभत्स बाजार में गरीब महिलाओं के अंग के साथ अब उनकी ईच्छा से त्वचा का भी ब्यापार किया जा रहा है। एक वेबसाइट का दावा है कि नेपाली महिलाओें का त्वचा बेचने के बाजार में उत्पाद के रुप में इस्तेमाल आसान है। यहां गरीब जरुरतमंद महिलाओं को महज 10 हजार रुपये का लालच देकर उनके शरीर के कुल्हे से 20 वर्ग इंच यानि 130 बर्ग सेण्टीमीटर त्वचा उत्तक निकाल लिये जा रहे हैं। इन त्वचा उत्तक का प्रयोग वैश्विक कास्मेटिक सर्जरी बाजार में कृत्रिम मानव लिंग व स्तन विकसित करने के लिय वैश्विक धनपशु और फैशन के मदांध करते हैं। बात कर रही नेपाल सरकार इस खबर पर काफी गहन जॉच पड़ताल करने की बात कर रही है। नेपाल सरकार के महिला बाल सामाजिक कल्याण मंत्री कुमार खड़का कहते हैं कि 6मार्च को रायटर की खबर से काफी आश्चर्य हुआ। यदि ये सही है तो सरकार इस जघन्य कृत्य अपराध को रोकने का हर सम्भव प्रयास करेगी । अपराधियों को व इस कृत्य में जिम्मेदार लोगों को दंण्डित किया जायेगा।

 जिला व प्रदेश स्तर पर  मॉनीटरिंग अथॉरिटी की जरुरत , जो हो चौबिस घण्टें सक्रिय  !

human traficभारतीय पत्रकार सोमा बसु की एक रिपोर्ट पर गौर करें तो नेपाली महिलाओं की तस्करी कर उन्हे मुम्बई जैसे भारतीय शहरों के वेश्यालयों में लाया गया था। महिलाओं की त्वचा बेचने का कारोबार यहीं से शुरु किया गया। कुछ पीडि़तों का कहना है कि उनकी त्वचा नशा कराके आपरेट की गई। रिपोर्ट बताती है कि त्वचा उत्तक भारत के पैथालॉजी में बेंचे जाते हैं। यहॉ से संसोधित कर ये पैथलैब, वैश्विक प्लास्टिक सर्जरी बाजार के लिये त्वचा और उत्तक बियुत्पन्न उत्पाद अमेरिकी कम्पनियों को निर्यात किया जा रहा है। बच्चों के अधिकार पर काम करने वाली संस्था सेफ सोसाइटी के निदेशक वैभव शर्मा के मुताबिक एण्टी हयुमन ट्ैफिकिंग पुलिस टीम बना देने से कुछ हासिल होने वाला नहीं। यह वैश्विक व भयावह मुद्दे मानवता को पतन की ओर ले जा रहे हैं। महिलाओं व बच्चों की तस्करी को सरकार की सभी इकाइयों की आंतरिक संयुक्त कमेटी को एक साथ जोड़ कर एक्टिवेट करने की जरुरत है। गॉव के चौकीदार से थानेदार व जिलाधिकारी तक को इसमें प्राथमिक भूमिका में रहकर सहयोग करना होगा। जिला व प्रदेश स्तर पर एक मॉनीटरिंग अथॉरिटी को चौबिस घण्टें सक्रिय रहना होगा। तभी कुछ अपेक्षिक परिणाम देखने को मिल सकेगा।

मानवता ही नहीं दानवता से भी कहीं आगे हो गया लोभी मानव !

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प्रतिवर्ष जिस अनुपात में ट्ैफिकिंग की घटनायें बढ़ती जा रहीं हैं कहना सहज होगा कि मानवता ही नहीं दानवता से भी कहीं आगे चले गये हम । 9 मार्च को एन सी आर बी के आंकड़े बताते हैं कि मानव तस्करी का काला कारोबार भारत में बीते एक बरस में 25 प्रतिशत बढ़ गया । महिला बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार की ओर से 2015 में जारी रिपोर्ट में ट्फिकिंग के मामले 15448 आये । वर्ष 2016 में यह आंकड़े 20,000 पहुॅच गया। सरकार मानती है कि भारत के पूर्वी राज्यों से ट्फिकिंग की घटनायें जादा हुई हैं। पश्चिम बंगाल का टृफिकिंग में प्रथम स्थान है जबकि राजस्थान दूसरे नम्बर पर है। एक वैश्विक आंकड़े पर गौर करें तों 16हजार बच्चे पूर्वी क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों पर प्रतिदिन भटक रहे हैं। 2013 की रिपोर्ट में अकेले चारबाग लखनउं स्टेशन पर प्रतिदिन 200 बच्चे आते हैं ।  जिम्मेदार विभाग व कर्मचारी सदैव आंकड़ो की बाजीगरी कर यथार्थ से कबूतर की भॅात बिल्ली रुपी समस्या से आॅख मूद  निदान करने में जुटे हुए हैं।  रेलवे सुरक्षा बल व जी आर पी की सुरक्षा दृष्टि में दावे की बात करें तो वर्ष 2013 में सुप्रिम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका खुशबू जैन बनाम रेलमंत्रालय भारत सरकार में इन सुरक्षा पुलिस की ओर से जो शपथपत्र दाखिल किया गया था उसमें कहा गया है कि प्रतिवर्ष 2615 बच्चे ही रेलवे प्लेटफॉर्म से गुजरतें हैं। कहने का तात्पर्य है कि आंकड़ों की बाजीगरी से कुछ भी धरातल पर हासिल होने वाला नही है। गॉव से शहर तक , गॉव के चौकीदार से जिले के कलेक्टर तक को एक समान सक्रियता ट्ैफिकिंग के विरुद्ध सतत् दिखानी होगी।

सड़क से सदन  तक है जागनें की जरुरत !
16 मार्च 2017 को राज्य सभा में सदन चलने के दौरान पश्चिम बंगाल की भाजपा सांसद  (राज्य सभा) रुपा गांगुली  पर आरोप लगाया गया कि वह मानव तस्करों के साथ जुड़ी हैं। इस पर गांगुली ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए साबित करने की चुनौती विपक्ष को दी । उन्होने कहा कि इस मामले  प्रदेश से हो रही बच्चों व महिलाओं की तस्करी रोकने के लिये वह सबसे आगे रहीं हैं। अतः स्पष्ट है कि राजनीति व रुतबेदार तथा रुपयाबाज लोगों के इस विभत्स कृत्य में शामिल होने से इंकार नहीं किया जा सकता । और दोपहर को राज्य सभा में पधारे प्रधानमंत्री जी ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। इस वैश्विक मामले पर सदन अथवा उच्चाधिकारियों की उदासीनता इस समस्या के समाधान नहीं होने की ओर साफ संकेत करती है।

छोटे शहरों में हे बड़ा खेल !

बात करें छोटे शहरों की तो ट्ैफिकिंग के मामले में उत्तर प्रदेश का गोरखपंुर रेलवे स्टेशन जो विश्व का सबसे लम्बा प्लेटफार्म भी है इस समय वैश्विक ट्ैफिकरों के रडार पर है इसकी सम्भवना प्रबल हो जाती है क्योंकि भरत सरकार भी यह स्वीकार करती है कि भारत में ट्फिकिंग के मामले पूर्वी क्षेत्रों मे जादा है।नेपाल व बांग्लादेश से आने और देश के किसी भी भूभाग को जाने के लिये यहॉ से ट्ेन व बस की सुविधा उपल्ब्ध है। यहॉ काम करने वाली संस्था सेफ के कोआर्डिनेटर ब्रिजेश बताते हैं कि प्रतिदिन 5 से 7 बच्चे रेलवे प्लेटफार्म पर रेस्क्यू किये जाते हैं। मानव तस्करी में इस तरह के सभी ठिकाने संदिग्ध हैं। समय -समय पर यहॉ से ट्ेफिकिंग करने वाले गिरोह के एक आध प्यांदे हाथ लगे हैं। पर प्रशासनिक छांनबीन व लीपापोती में कुछ लोगों तक ही सिमट कर रह गये।

मनुष्य हैं , तो मानव तस्करी के विरुद्ध  सदैव सतर्क व सक्रिय रहें !

अब मानव तस्करी के विरुद्ध बच्चों बूढ़ों तक को जानकारी देनीं होगी। किसी भी ब्यक्ति के गुम होने की सूचना दर्ज करवाना बहुत जरुरी होता है, इससे कभी भी बच्चों या महिलाओं के मिल जाने पर उनकी पहचांन आसान हो जाती है। किसी भी बच्चे के गुम हो जाने को बहुत महत्वपूर्ण मानते हुए एफआईआर तुरंत दर्ज किये जानें के आदेश के बावजूद लापरवाही के मामले सामने आये हैं। देश की स्थिति मानव तस्करी को लेकर भयावह है । आमजन के साथ हर खास को इस मुद्दे पर गम्भीरता से विचार करना होगा। सरकार या उसके अकेले के तंत्र पर निर्भर हो जाना नागरिक धर्म के विरुद्ध है । मनुष्य हैं तो आप सदैव सतर्क व सक्रिय रहें ऐसे किसी भी कृत्य का हिस्सा न बनें। यदि ऐसी गतिविधि कहीं है तो तुरंत सूचित करनें की जरुरत है।

      Vaidambh Media

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