मुद्दे की मजबूती से भारी पड़ेगी “आप “

दिल्ली । शनिवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद एग्जिल पोल्स नतीजों के जारी होने के कुछ समय बाद ही मेरे इर्द-गिर्द रहने वाले कुछ सक्रिय आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का फोन आया और उन्होंने जीत का दंभ भरा। उनके आवाज में एक भारीपन और नशा था। वह भारीपन और नशा ‌भावुकता का नहीं बल्कि आत्मविश्वास और इच्छा शक्ति का था। वह आत्मविश्वास या इच्छा शक्ति जिसको भारतीय जनता पार्टी बार-बार झूठलाने में लगी थी।  सभी एक्जिट पोल्स के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। अगर वाकई ऐसा हुआ तो यह बीजेपी के लिए किसी बड़े झटके से कम साबित नहीं होगा। यह नतीजा कहीं न कहीं कई अर्थ खड़े करती है। सबसे अहम बात कि आम आदमी पार्टी को राजनीतिक जीवनदान मिला और दिल्लीवालों ने आखिरकार केजरीवाल और उनकी पार्टी को पिछली बार दिल्ली छोड़कर जाने के लिए माफ कर दिया। ये चुनाव अगर किसी पार्टी के राजनीतिक अस्तित्व के लिए सबसे ज्यादा जरुरी थे तो वो आम आदमी पार्टी ही थी।  वहीं एक सच यह भी है कि अगर आप के पक्ष में जनता का फैसला गया तो बीजेपी विरोधी पार्टियों को एक नई लाइफलाइन मिलेगी, जो उन्हें फिर से पार्टी के खिलाफ एकजुट होने में मदद करेगी। यह भी हो सकता है कि बीजेपी के सामने खुद को असहाय महसूस कर रही क्षेत्रीय पार्टियां मसलन-तृणमूल, सपा, बसपा, जेडीयू, आरजेडी को आप के रूप में एक नेतृत्व मिल जाए। तृणमूल और जेडीयू ने तो दिल्ली चुनाव में आप को समर्थन भी किया था।  यह भी तय हो जाएगा कि पीएम मोदी की लहर कमजोर पड़ गई है। भले ही अब बीजेपी यह सफाई दे रही हो कि यह जनमत केंद्र सरकार के खिलाफ नहीं है, लेकिन बीजेपी इस बात को मानने से इनकार नहीं कर सकती कि उसने दिल्ली में पीएम मोदी समेत अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। बीते सभी राज्यों में मिली जीत का क्रेडिट पीएम मोदी के जादू को देने वाली बीजेपी अब इस हार का ठीकरा किसी और पर फोड़ना भी चाहे तो यह उसके लिए आसान नहीं होगा।  इसके अलावा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की लीडरशिप पर भी पहली बार सवाल उठेगा। दूसरी ओर दिल्ली चुनाव के नतीजों का सीधा असर जम्मू-कश्मीर में बनने वाली नई सरकार पर होगा। अगर बीजेपी हारी तो उसकी पीडीपी के साथ मोलभाव करने की हैसियत पर असर पड़ेगा। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि इस साल बिहार और उसके बाद पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के मनोबल पर दिल्ली चुनाव के नतीजों का असर पड़ने वाला है।

क्यों हुआ यह हाल : 

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने शुरू से ही गलतियां की और अरविंद केजरीवाल  को निशाने पर लेती रही। हद तो तब हुई जब प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में अपनी पहली चुनावी सभा में ही केजरीवाल को धरने में मास्टरी और न जाने क्या-क्या कह गए। मोदी ने ठीक वही गलती की जो उनके खिलाफ लोकसभा चुनाव में विरोधी पार्टियों ने की थी।  वहीं आम आदमी पार्टी ने हर वक्त जनता की बातों को तरजीह दी और  दिल्ली की 70 फीसदी आबादी के असल मुद्दों को अपना समझा। उन्होंने हर वक्त अपनी गलतियों के लिए जनता से माफी मांगी। एक सच यह भी है कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त जोश था। उन्होंने दिल्‍ल्‍ी के हर दरवाजे पर दस्तक दी। वहीं केजरीवाल ने अपने 49 दिनों के कम समय के कार्यकाल को ही शानदार तरीके से पेश किया। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि 49 दिनों की केजरी सरकार में यह एहसास हुआ कि दरअसल, सरकार जनता चला रही है। जनता असली मालिक है न की राजनीतिक दल।

दीपक कुमार

Previous Post
Next Post

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher