मेक इन इंडिया:नौ महीनों में नहीं बदला जमीनी स्तर,उद्यमियों में बेचैनी

   NewDelhi:  जाने-माने बैंकर और एचडीएफसी के प्रमुख दीपक पारेख का कहना है कि देश में अब भी कारोबार के अनुकूल माहौल नहीं बन पाया है, जिससे उद्यमियों में बेचैनी पैदा होने लगी है। मोदी सरकार की यूएसपी बिजनेस फ्रेंडली वातावरण बनाने की ही रही है। इस दिशा में उसने कुछ काम भी किए हैं, लेकिन इस सरकार के पहले पूर्ण बजट से ठीक पहले पारेख जैसे तजुर्बेकार उद्यमी को अगर लगता है कि नौ महीने के कार्यकाल में वह जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं कर सकी है तो उनकी बात पर गौर किया जाना चाहिए। पारेख अर्थतंत्र की अच्छी परख रखते हैं। वे नीतियों और सुधारों से संबंधित सरकार के विभिन्न पैनलों का हिस्सा भी रहे हैं। उनका कहना है कि कारोबारी गतिविधियां सहजता से हो सकें, इसके लिए ‘प्रशासनिक बंदिशों’ में ढील देने की जरूरत है। नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सुधार के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ा था। सत्ता संभालने के बाद उन्होंने विभिन्न देशों के दौरे किए और कई ताकतवर देशों के राष्ट्राध्यक्ष यहां आए। अनिवासी भारतीयों का सम्मेलन भी हुआ।

फैसलों की रफ्तार बढ़ाई जानी चाहिएparikh

मोदी की कोशिश थी कि वे देश के विकास के लिए पूंजी जुटाएं। इस बीच उन्होंने मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रम की शुरुआत भी की। वे लगातार उद्यमियों को आश्वासन देते रहे हैं कि सरकार उनके साथ है और उन्हें हर संभव सहायता देगी। ये सारी बातें अपनी जगह ठीक हैं, लेकिन इतने भर से बात नहीं बनती। जमीनी स्तर पर, यानी लिखा-पढ़ी के मामले में भी चीजें दुरुस्त करनी होती हैं। एक कारखाना लगाने में उद्यमियों को साधारण बाबू से लेकर बड़े अफसरों और मंत्रियों तक से निपटना होता है। इस तंत्र के चरित्र में बदलाव लाए बगैर कारोबारी माहौल नहीं बनाया जा सकता। दीपक पारेख का इशारा इसी तरफ हैं। वे बताना चाहते हैं कि आर्थिक सुधार के लिए मंशा साफ होने के अलावा बड़े बदलावों की इच्छाशक्ति भी होनी चाहिए। यहीं सरकार से चूक हो रही है। उद्यमियों को नौकरशाही का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। भ्रष्टाचार की जकड़ ऊपर से कुछ नरम जरूर पड़ी है, लेकिन निचले स्तर पर उसका बाल भी बांका नहीं हुआ है। कुछ समय पहले दीपक पारेख ने ही कहा था कि कई कंपनियों के प्रमुखों ने उनसे मिलकर रिश्वतखोरी की शिकायत की थी, मगर वे औपचारिक रूप से कुछ कहने से बचते हैं। घूस देने के लिए उन दिखावटी कंपनियों का सहारा लिया जा रहा है, जिनका कोई अता-पता नहीं होता। इंफ्रास्ट्रक्चर, रीयलिटी, धातु, खनन, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में करप्शन की समस्या ज्यादा है। कई विशेषज्ञों ने सिफारिश की है कि ई-टेंडरिंग और ई-नीलामी जैसे उपाय हर जगह अपनाए जाएं ताकि भ्रष्टाचार पर रोक लग सके, मगर इन उपायों को अपनाने में सरकार सुस्त नजर आ रही है। लगता है सरकार के भीतर ही इन चीजों को लेकर एक राय नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं कि सारे निर्णय प्रधानमंत्री के हाथों में केंद्रित होने से स्थितियां गड़बड़ाई हैं। जो भी हो, सरकार का हनीमून पीरियड तेजी से खत्म हो रहा है, इसलिए फैसलों की रफ्तार बढ़ाई जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री के लिए समय बहुत भाग्यशाली रहा है। वैश्विक जिंस कीमतें अपने निम्नतम स्तर पर हैं जिसका भारत को सबसे अधिक फायदा हुआ है।’ उन्होंने कहा कि भारत एक बार फिर ऐसी स्थिति में है जहां हर कोई उसे बड़ी उम्मीद से देख रहा है। उन्होंने कहा,’मुझे नहीं लगता कि कारोबार करने में सुगमता के लिहाज से अभी कुछ बदला है।’ पारेख ने इस संबंध में एचडीएफसी बैंक को धन जुटाने के लिए मंजूरियों में देरी का उदाहरण भी दिया।

                                                                                                                        D.J.S.

Previous Post
Next Post

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher