रक्त चंदन : दो जून की रोटी खातिर पुलिस की गोली ,

.‘‘…चंदन विष ब्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग’ , महान सुधारवादी गृहस्थ संत रहीमदास की यह बात सैा फिसद् सही होने को बावजूद आज चंदन इंसान के सम्पकर्् में आकर जहरीला बन गया। जो चंदन इतना शांतचित्त होता है उसे कमीनेपन के जहर ने अपने आगोश में लेकर उसे लोगों की नजर में हत्यारा व विषैला बना दिया है। चंद चाटुकार पुलिस अधिकारी ,मुठ्ठी भर नेता व उन पर हावी तस्कर अपने स्वार्थ के चलते गरीब असहाय मजदूरों आदिवासियांे को गाजर मूली की तरह काट रहें हैं। अफसोस ये लोग सभ्य समाज के लोग हैं। अदिवासी इनकी नजर में असभ्य है, फिर तो उसके पलटवार को हउवा नही बनाना चाहिए! जधन्य कृत्य के बाद पुलिस मेडल बाॅटे जायेंगे या देश भर की मीडिया वाह.वाह करेगी तो मजदूर व जंगली कभी देशवासी नही बन पायेगा! प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को इन मामलों का संज्ञान लेकर दूध का दूध पानी का.पानी जरुर करना चाहिए देश को अपनी स्वच्छ छवि दिखाने का इससे बढ़ियां मौका नही है। यहां कबीर को ही एक बार पुनः याद करना चाहिए ‘एकै साधे सब सधे सब साधे सब जाय’

 Bureau Office / Hyderabad:  चंदन मुख्यतः तीन प्रकार के पाये जाते हैं. सफेद, पीला व लाल । भारत में फर्नीचर व अधिकतर पूजा.पाठ मे इस्तेमाल होती है। विदेशों में इनकी मांग बहुत जादा है, जाहिर है कि कीमत भी जादा होगी। लाल चंदन के पेड़ मुख्यतः तमिलनाडु से लगे आंध्र प्रदेश के चार ज़िलों – चित्तूर, कडप्पा, कुरनूल और नेल्लोर – में फैले शेषाचलम के पहाड़ी इलाक़े में उगते हैं. लाल रंग का होने की वजह से इसे रक्त चंदन कहते हैं. रक्त चंदन का प्रयोग शैव और शाक्त मत को मानने वाले अधिक करते हैं. पीले चंदन का इस्तेमाल आम तौर वैष्णव मत, जबकि सफेद चंदन में खुशबू होने के कारण सभी को प्रिय है।
लाल चंदन क्यों है खास ?
लगभग पांच लाख वर्ग हेक्टेयर में फैले इस जंगली क्षेत्र में पाए जाने वाले इस अनोखे पेड़ की औसत उंचाई आठ से ग्यारह मीटर होती है और बहुत धीरे-धीरे बढ़ने की वजह से इसकी लकड़ी का घनत्व बहुत ज़्यादा होता है. जानकर बताते है कि लाल चंदन की लकड़ी अन्य लकड़ियों से उलट पानी में तेजी से डूब जाती हैं क्योंकि इसका घनत्व पानी से ज़्यादा होता है, यही असली रक्त चंदन की पहचान होती है. भारत के पश्चिमी घाटों में पाए जाने वाले लाल चंदन के पेड़ों को संरक्षित प्रजाति में रखा गया है और यह आंध्र प्रदेश में चार ज़िलों तक फैले हुए हैं. रक्त चंदन एक अलग जाति का पेड़ है जिसकी लकड़ी लाल होती है लेकिन उसमे सफ़ेद चंदन की तरह कोई महक नहीं होती हैं

“रक्त चंदन को वैज्ञानिक नाम टेरोकार्पस सैन्टनस है जबकि सफ़ेद चंदन को ‘सैंटलम अल्बम’ के नाम से जाना जाता है और ये दोनों अलग जाति के पेड़ हैं.” सफ़ेद चंदन की तरह रक्त चंदन का उपयोग अमूमन दवाएँ या इत्र बनाने और हवन-पूजा के लिए नहीं होता लेकिन इससे महंगे फर्नीचर और सजावट के सामान बनते हैं और इसका प्राकृतिक रंग कॉस्मेटिक उत्पाद और शराब बनाने में भी इस्तेमाल होता है. अंतराष्ट्रीय बाजार में इसकी क़ीमत तीन हज़ार रुपए प्रति किलो है
                                 बी मुरलीकृष्णा, अतिरिक्त  मुख्य संरक्षक
                                                  आंध्र प्रदेश वन विभाग

 

 

आंध्र प्रदेश सरकार के वन विभाग की वेबसाइट के मुताबिक पिछले साल दिसंबर में हुई नीलामी में चीन, जापान, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात के अलावा कुछ पश्चिमी देशों से लगभग चार सौ व्यापारियों ने बोली लगाई थी. इन चार सौ में लगभग डेढ़ सौ चीनी कारोबारी थे. वर्तमान में लाल चंदन की मांग सबसे ज़्यादा चीन में ही है क्योंकि वहां पर इसकी लोकप्रियता चौदहवी से सत्रहवीं शताब्दी के मध्य तक राज करने वाले मिंग वंश के समय से बनी हुई है. चीन में ‘रेड सैंडलवुड म्यूज़ियम’ नाम का एक विशेष संग्रहालय है जहां लाल चंदन से बने अनगिनत फर्नीचर और सजावटी सामान संजोकर रखे गए हैं.
लाल चंदन की कटाई और तस्करी का एक पूरा अवैध उद्योग फल-फूल रहा है. वह बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के चल रहा हो, असंभव है , एक दिन में 25 लोग मारे गए! अगर यह मौत किसी बम धमाके में हुई होती तो मिडीया की प्रतिक्रिया क्या यही होती ! जानकार बताते हैं कि यह सामुहिक हत्या है जो चंदन माफ़िया समूहों में प्रतिद्वंदिता के कारण दिखी है जिसमें पुलिस की संलिप्तता से इंकार नही किया जा सकता । एक समूह का राजनीतिक संरक्षक जब भारी पड़ जाए तो वह दूसरे को निशाना बनाने के लिए स्पेशल टास्क फ़ोर्स की मदद लेता है. नेशनल कैंपेन फ़ॉर डीनोटिफ़ाईड ट्राइब्स ह्यूमन राइट्स की जांच के मुताबिक़, पेड़ काटने को तमिलनाडु के क़रीबी इलाक़ों से अत्यंत दरिद्र लकड़हारे लाए जाते हैं.

ताज्जुब : तस्करों को संरक्षण
माफ़िया से जुड़े स्थानीय अमीर पकड़े भी जाते हैं तो उन्हें राजमुंदरी केन्द्रीय कारागार में रखा जाता है, जहां से उन्हें आसानी से ज़मानत मिल जाती है. दूसरी ओर, गिरफ़्तार आदिवासी लकड़हारों पर हत्या या हत्या की कोशिश के आरोप लगा दिए जाते हैं, जिससे उन्हें ज़मानत मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है.यह सब कुछ इतना खुला है फिर भी आंध्र प्रदेश की सरकार और पुलिस अभी भी अड़ी है कि यह मुठभेड़ थी.कि पुलिस ने अपनी हिफ़ाज़त में गोली चलाई जब उसपर इन ‘तस्करों’ ने हमला कर दिया.ताज्जुब की पुलिस वालों में कोई ज़ख़्मी नहीं हुआ. क्या यह भी ताज्जुब की बात है कि जो मारे गए उनमें से कम से कम सात के चेहरे पर गोली मारी गई? मुझे तो प्रधानमंत्री की दो दिन पहले सर्वौच्च न्यायलय के न्यायधीशें को दी गयी नसीहत से डर लगने लगा है कि जो उन्होने मानवाधिकार के फंदे से बचे रहने की सलाह दी है.
पूरी घटना शीशे की तरह साफ है ,!
आरोप है कि एक क़ैदी लगातार गाली दे रहा था और पुलिस वालों पर थूक रहा था. बाकी चार भी उग्र थे, घूर रहे थे और थूक रहे थे. फिर भी पुलिसवालों ने संयम बनाए रखा था. क़ैदियों में से दो रियाज़ और विकारुद्दीन ने बीच में पेशाब की इच्छा जताई. रिज़र्व सब इंस्पेक्टर उदय भास्कर ने उनकी हथकड़ी खोली और उनके साथ बाहर गया. जब वे लौटे और वह वापस उन्हें हथकड़ी लगाने लगा तो विकारुद्दीन ने उसकी एके-56 राइफल छीन ली. बाकी क़ैदी भी उनपर टूट पड़े. तब जाकर पुलिस को उनपर गोली चलानी पड़ी. सत्रह पुलिसवाले पांच ख़ूंख़ार ‘आतंकवादियों’ पर काबू पा सकते हैं? ये सवाल लेकिन राष्ट्र शायद ही पूछे! यह बात दीगर है कि जिनकी ह्त्या हुई, उनका मुक़दमा लगभग अंतिम चरण में था और एकाध महीने में फ़ैसला आ जाता.
राष्ट्र शायद ही पूछे ये सवाल !
चंदन की लकड़ियां काटने वालों पर गोलियां चलाने से पहले चेतावनी के तौर हवा में गोलियाँ क्यों नहीं चलाई गई ? उन्हें गिरफ़्तार करने के प्रयास क्यों नहीं किए गए ? ऐसा कैसे हुआ कि 20 मारे गए लोगों में से 13 को कमर ऊपर गोलियां लगी थी, और अधिकतर संदिग्ध तस्करों के पीठ पर गोली लगी थी ? शव एक किलोमीटर के फ़ासले पर दो जगहों पर मिले हैं. क्या पुलिस की दो टीमों ने गोलियां चलाई ? क्या मारे गए लोग वाकई तस्कर हैं या तस्कर गैंग के भाड़े पर लिए गए मजदूर?
आंध्र प्रदेश मानवाधिकार मंच के महासचिव वीएस कृष्णा कहते हैं, “सभी सबूत इशारा करते हैं कि मजदूरों को घेरकर गोलियों से मारा गया. ये 20 लोगों का कत्ल है.”
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने की इस घटना के जांच की मांग
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पनीरसेलवम ने इस घटना की जांच की मांग की है. उन्होने कहा कि “अगर कोई व्यक्ति पेड काटने का अवैध काम कर रहा था, तो ऐसे गंभीर कदम उठाने से पहले उन्हें पकड़ने के प्रयास होने चाहिए थे.”

 

Previous Post
Next Post
2 Comments

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher