राजनीति का योग या योग की राजनीति !

जो योग करेगा वह सरकार का  हितैषी ! जो ना करे ..

modiramdev. New Delhi: मीडिया में आजकल दिल्ली की राजनीति और योग सुर्खियां बटोर रहे हैं। यह कहना मुश्किल होगा कि राजनीति का योग चल रहा है या योग की राजनीति हो रही है। लेकिन माहौल ऐसा बना दिया गया है, जो योग करेगा वह सरकार हितैषी है और जो नहीं करेगा वह धुर विरोधी। अपने को योगी कहने वाले, खुद योग की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं? भौतिकता के स्वाद के लिए उसकी जीभ लालायित नहीं रहती। एक  योगी आदित्यनाथ जैसे हैं जिनकी  भाषा में कटुता है, उनके शब्द समाज में जहर घोलने का काम करते हैं, लेकिन वे आदी हैं, उन्हें किसी तरह खबरों में बने रहना है।

YOGGAयोगी अवधूत की तरह जीवनयापन करता है। सांख्य दर्शन का मानना है कि मनुष्य अगर अपनी चेतना के बारे में सचेत हो जाए और उसके विभिन्न स्तरों पर जा सके तो अपने शरीर, मन और संसार की गतियों को बेहतर समझ सकता है। यह समझ अगर गहरी हो जाए तो उसे अपने दुख के कारणों को समझने में सहायता मिलती है और उन कारणों को ठीक से समझ ले तो उन्हें दूर करना आसान हो जाता है। योग का महत्त्व यह है कि मन और चेतना की इस साधना के लिए शरीर को साधना जरूरी है अन्यथा चेतना हमेशा शरीर के स्तर पर ही रह जाएगी। यम, नियम आसन, प्राणायाम, धारणा, ध्यान और समाधि; योग के ये आठ अंग हैं। आसन उसका एक छोटा-सा हिस्सा है। यह पारंपरिक अर्थों में एक तरह का विज्ञान है।

योग के बड़बोले में चरमरा गई सार्वजनिक स्वास्थ्य-व्यवस्था !

yoggaa  एक सवाल  कि क्या योग को प्रचारित करने के लिए राज्य या सरकार को कोई सर्कुलर जारी करना चाहिए। इस बात पर सहमति बनना मुश्किल है। भारत की राजनीतिक संस्कृति में ऐसे क्षेत्र में राज्य का हस्तक्षेप सराहनीय नहीं रहा है। अगर सरकार लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने का प्रयास करे। जब से भूमंडलीकरण और उदारीकरण का भूत राज्य पर सवार हुआ है, सार्वजनिक स्वास्थ्य-व्यवस्था चरमरा गई है। जिस तरह दवाएं और महंगी हो रही हैं, निजी अस्पतालों का बोलबाला हो रहा है उससे यह तो नहीं लगता कि सरकार जनता के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। लिहाजा, ऐसा लगता कि योग का इतना हंगामा एक तरह की राजनीतिक चाल है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल , उन पर अहं का भूत सवार है। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि मैं राहुल गांधी नहीं हूं, मैं अकेला हूं, उसमें अहंकार निहित हैं, केजरीवाल को ‘मैं से हम’ की राजनीति करनी चाहिए। बेशक, उनके माथे पर चिंता की लकीरें जायज हैं।   योग का अर्थ जोड़ना भी होता है। भारतीय जनता पार्टी में पार्टी का योग चल रहा है। अब देखना होगा कि क्या भाजपा योग के जरिए ललित मोदी मुद्दे से लोगों का ध्यान भटका सकती है।

सरकार का फिक्सासन योग विज्ञान !

shilpa-shettyऐसे अनेक उदाहरण मिल सकते हैं जहाॅ ज्ञान परंपराएं बनी हैं मानव कल्याण के लिए, उन्हें धर्म से बांध कर देखना आधुनिकता की समस्या है। मुंगेर के योग संस्थान और रामदेव के पतंजलि योग संस्थान का अंतर  है . पहले में योग विज्ञान है और दूसरे में यह राजनीति है। मुंगेर का यह संस्थान दुनिया भर में लोकप्रिय है, उससे किसी संप्रदाय को कोई समस्या भी नहीं है। अगर सरकार उन्हें योग-शिक्षा के लिए आगे लाती तो शायद वैसी नाराजगी नहीं होती जैसी रामदेव के आने से होती है, क्योंकि रामदेव का योग विज्ञान कम और राजनीति ज्यादा है। इसलिए सरकार की मंशा भी शक के दायरे में है। केंद्र सरकार की वेबसाइट पर 651 केंद्रों की सूची तैयार की गई है जिसमें से 24 स्थान रिक्त रहे। 191 योग शिविर रामदेव के हिस्से में आए हैं। दूसरे नंबर पर हैं श्री श्री रविशंकर की संस्था व्यक्ति विकास केंद्र जिसे 69 शिविर मिले हैं। अब श्री श्री रविशंकर के लिए 69 लाख क्या चीज़ हैं इसलिए पैसा तो कारण नहीं हो सकता है।

 

modi silpa प्रधानमंत्री ने शिल्पा शेट्टी को योग दिवस के मौके पर आमंत्रित किया, उनके पति राज कुंद्रा आई पी एल की टीम राजस्थान रायल्स के मालिक हैं। राज कुंद्रा पर सट्टेबाज़ी के आरोप   हैं ,  अदालत में मामला भी चल रहा है।  सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर एम लोढा और रिटायर जस्टिस अशोक भान और आर वी रवींद्रन की कमेटी को चेन्नई सुपरकिंग के मनियप्पन और राजस्थान रायल्स के कुंद्रा के ख़िलाफ़ सज़ा तय करनी है। कहीं ऐसा तो नहीं कि शिल्पा शेट्टी इसी बहाने कोई नया ‘फिक्सासन’ कर रही हैं।

भारतीय ज्ञान परंपराओं से जुड़ा रहा अरब

Srinagar: NCC cadets participate in a Yoga session on  International Day of Yoga at Bakshi Stadium in Srinagar on Sunday. PTI Photo by S Irfan   (PTI6_21_2015_000141B)

Srinagar: NCC cadets participate in a Yoga session on International Day of Yoga at Bakshi Stadium in Srinagar on Sunday. PTI Photo by S Irfan (PTI6_21_2015_000141B)

गौर करने की बात है कि भारतीय ज्ञान परंपराओं से अरब संसार का हमेशा से गहरा ताल्लुक रहा है। किसी समाज की ज्ञान संबंधी उपलब्धि को धर्म से जोड़ कर देखने की परंपरा अरब जगत में कभी नहीं रही है। भारत से पंचतंत्र के किस्सों के अरब में पहुंचने की कहानी तो सबको मालूम है, शायद यह भी मालूम हो कि सदियों से वहां इस पुस्तक को राजनीति की शिक्षा देने के लिए उपयोग में लाया गया है और मजे की बात यह है कि उसे उसी रूप में रखा गया है। उसका स्वरूप बदल कर उसके अपने होने का दावा नहीं किया गया। यह तो एक उदाहरण है।  इस राजनीतिक चाल का मकसद क्या हो सकता है? एक तो यह हो सकता है कि जो लोग समझते हैं कि भारतीय संस्कृति को पिछले हजार वर्षों से कभी मुसलिम शासन ने, कभी आधुनिकता का आड़ में ईसाई सत्ता ने दबाया, उसे हाशिये पर खड़ा कर दिया, भाजपा उस सम्मान को वापस लाने का प्रयास कर रही है, यह जान कर उनके मन को सुकून मिले। क्योंकि वे पारंपरिक तौर पर भाजपा के समर्थक रहे हैं उनके लिए ऐसा किया जाना जरूरी है। इनमें से बहुत-से लोगों को मुसलिम या ईसाई समुदाय से कोई रंजिश नहीं भी हो सकती है। ऐसे लोगों से ज्यादा समस्या नहीं है।   भाजपा के समर्थकों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिनके मन में मुसलमानों के प्रति रंजिश है और उनकी मानसिकता मुसलमानों को सबक सिखाने की है।

                  बॅटवारे को हवा क्यों ..?

muslim not indian  खतरा यह है कहीं योग का दुरुपयोग भाजपा अपने ऐसे समर्थकों की तसल्ली के लिए तो नहीं कर रही है। अगर ऐसा है तो समस्या गंभीर है। ज्यादातर हिंदू देश में अमन ही चाहते हैं। भाजपा की यह चाल उन अमनपसंद हिंदुओं को यह समझाने की भी हो सकती है कि मुसलमान तो होते ही ऐसे हैं। यह करना संभव है जब किसी ऐसे मुद्दे को सामने रखा जाए जिस पर हिंदुओं में आम सहमति है कि उसका हिंदू धर्म से कुछ लेना-देना नहीं है और वह भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। और फिर मुसलमान उसका विरोध करते हैं तो इस बात को प्रमाणित करना आसान होगा कि मुसलमानों का किसी और संस्कृति के साथ मिल कर रहना मुश्किल है; भारत में फिर से एक पाकिस्तान पल रहा है। जिस तरह हिंदुओं में एक छोटा-सा तबका है जो हिंदू राष्ट्र की कल्पना करता है, मुसलमानों में भी एक छोटा-सा तबका एक और पाकिस्तान की कल्पना भी कर  सकता है।

‘ब्रेन इनिशिएटिव तकनीकी क्रांति’  में अंतर्राष्टीय प्रतिस्पर्धा

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अमेरिका ने शुरू की इंसानी दिमाग के अध्ययन की योजना

 विज्ञान और तकनीकी की जो अगली क्रांति होने वाली है उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ओबामा ने घोषणा की है कि आने वाले समय में अमेरिकी पूंजी को ‘ब्रेन इनिशिएटिव’ पर खर्च करना चाहिए ताकि चीन और भारत से पहले हम इस क्षेत्र में आगे जा सकें। कई प्रयासों में एक यह भी है कि न्यूरो साइंटिस्ट, योगी, बौद्ध भिक्षु और दार्शनिकों के कई शोध-दल बनाए गए हैं; मन और बुद्धि के क्षेत्र में शोध पर काफी पैसा लगाया जा रहा है। आज की दुनिया में जो जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां और मनोरोग हैं उनके इलाज के लिए इस तरह के प्रयासों की अहमियत काफी आंका जा रही है। ऐसे में अगर आम लोगों को योग की शिक्षा दी जाए, तो इसमें किसे एतराज होना चाहिए !

अर्थोपार्जन का बड़ा माध्यम बन सकता है योग !

 

brain_hemispheres यह मानना भी अनुचित नहीं होगा कि आज ‘सॉफ्ट पॉवर’ का जमाना है। दुनिया भर के देश इस क्षेत्र में प्रयासरत हैं। कहते हैं कि जिस देश में मेक्डोनाल्ड का सुनहरे रंग में लिखा एम दिख जाए वहां अमेरिका का वर्चस्व होता है। इस सॉफ्ट पॉवर के जमाने में भारत के पास क्या स्रोत हैं जिनका उपयोग कर दुनिया भर में भारत की छवि बदली जा सकती है। और इस बात से कोई भी सहमत होगा कि सॉफ्ट पॉवर का सीधा संबंध आर्थिक संबंधों से भी है। भारत के पास न केवल इसका विकसित दर्शन है बल्कि बड़े पैमाने पर मानव संसाधन भी है और दुनिया भर में योग सिखाने के लिए इसका उपयोग हो सकता है। जहां भी योग के लिए आश्रम हैं, विदेशी अभ्यासियों की संख्या देख कर लगता है कि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के बाद योग एक बड़ा माध्यम हो सकता है अर्थोपार्जन के लिए।                                               D.J.S.

                                                                                    Vaidambh Media Team

 

 

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