र्पूवांचल में राहुल की किसान यात्रा : खोये जनाधार की तलाश

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 Dhananjay Shukla

Gorakhpur / प्रशांत कुमार के निर्देशन में काॅग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश उन क्षेत्रों में शुरु कर दी है जहाॅ कभी उसका परचम लहराया करता था। एक से बढ़ कर एक दिग्गज काॅग्रेसी सिपाही देने वाली पूर्वांचल की उर्वरा भूमि विरान हो चली है। 90 के दशक से काॅग्रेस की नाव प्रदेश में डग- मग;  होते- होते अब नाव में हो चुके छेद भरने का भागीरथ प्रयास शुरु हो चुका है।  काॅग्रेस के खेवनहार राहुल गाॅधी बुनियादी लड़ाई में अपना भविष्य तलाशते हुए किसानों की शरण में आ चुके हैं। आाज भी यदि जाति पाॅति को गौंड रखकर प्रोफंेशनल लोगों को लक्ष्य किया जाय तो सबसे बड़ा वोट बैंक किसान है। राहुल गाॅधी को यहाॅ संजीवनी मिलने की पूरी उम्मीद है। उन्होने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के साथ गाॅव में चैपाल भी लगााई है। कई जमीनी मुद्दों पर किसानों से मुखर बातचीत राहुलगाॅधी के ब्यवहार में शामिल रहा है। जिस स्थान से देवरिया से दिल्ली 2500 किमी की राजनीतिक किसान यात्रा का आरम्भ श्री गाॅधी ने किया है वह विधान सभा सीट काॅग्रेस के पास ही है। काॅग्रेस इस क्षेत्र में एक और विधान सभा सीट नौतनवाॅ में भी जीत दर्ज कर अपनी प्रतिष्ठाा बचाये हुए है। ऐसे हालत में अन्य हिस्सों के बजाय यहाॅ से राहुल को खटिया र्चचा व किसान यात्रा थोड़ी सुखद लग रही होगी। इंसेफेलाइटिस मुद्दे से ब्यक्तिगत जुड़े रहने वाले राहुल गाॅधी नें अपने यात्रा कार्यक्रम में बी आर डी मेडिकल कालेज जाना प्राथमिकता पर रखा।

मौका है कुछ पाने का !
इस यात्रा से राहुल क्या निकाल पायेंगे , पीके काॅग्रेस को कहाॅ पहुॅचा पायेंगे ! ये भविष्य कोई मिडीया तय नही कर सकता । उत्तर प्रदेश की राजनीति में काॅग्रेस निरंतर अपनी जीवटता बनाये रखने का प्रयास कर कर रही है। अचानक दिल्ली के जंतर मंतर से निकल कर लाल किला और फिर दिल्ली विधानसभा पहुॅचने वाली 2014 की  आॅधी से भाजपा को दिब्यास्त्र मिल गया। उसने वाररुम और तकनीक का जबरदस्त इस्तेमाल कर काॅग्रेस को सत्ता से न केवल पदच्युत कर दिया बल्कि वोट व कार्यकर्ताओं के लिये संघर्ष करने के लिये मजबूर कर दिया। अब तक हुए राजनीतिक परिवर्तन में काॅग्रेस की वापसी की लोग सम्भवना ब्यक्त कर दिया करते थे और काॅग्रेस वापस भी होती रही। पर आज हालात इतने बदतर हैं कि काॅग्रेस पार्टी को सत्ता में वापस आना मजाक के लहजे में इस्तेमाल किया जाता है। एक तरह से काॅग्रेस को खेाने के लिये कुछ भी नहीं है। अब जो भी राहुल एण्ड टीम पसीना बहाकर जनता के बीच खड़ी है वह अपने बूते ही कुछ पा सकेगी पिछला सब जनता ने भुला दिया है। यहाॅ तक की दो साल से अधिक हो चुकी केन्द्र सरकार मोदी नेतृत्व में अब जनता की दिल्लगी से शनैः शनैः दूर हो रही है। प्रदेश में जातिवाद से भरपूर सरकारें भी देखी् गईं तो धर्म ध्वज ताने खड़ी सरकार भी देखने का गौरव उत्तर प्रदेश को मिल चुका है। मुस्लिम ध्रुवीकरण समय- समय पर होते देखा जा चुका है। सारे प्रयोग एक सफलता के बाद विफल रहे हैं। कटटर जाति आधारित राजनीति को सर्वजन का रास्ता पकड़ कर सत्ता तक पहुॅचना मजबूरी बन गई। वर्तमान सरकार युवा चेहरा लेकर युवाओं का उत्साह कम करती देखी जा सकती है जो पुलिसप्रशासन व भर्ती प्रक्रिया में न्याय नही कर पायी ऐसा आरोप प्रदेश के कई कोनों से समय- समय पर लगाये जाते रहे हैं। इसी बेहाल ब्यवस्था को कैस कराने के लिये सभी विपक्षी पार्टियाॅ लगी हुई है। भाजपा ने जाति समीकरण हल करते हुए कई बसपाई दिगगजों को तोड़कर अपने में मिलाने का अभियान चलाया। प्रदेश में जातिगत वोटो पर एकाधिकार वाली पार्टी के पदाधिकारी या सेनापतियों को तोड़कर भाजपा जीत एकतरफा करने की पूरी कोशिश कर रही है। हलांकि भाजपा को बिहार का परिणाम पता है ! ऐसे में काॅग्रेस को कोई प्रतिद्वदी तक नही मानने को तैयार है। यही वह मौका है जब पीके काॅग्रेस का वोटबैंक आशातीत रुप से बढ़ा सकते हैं। काॅग्रेस का बढ़ा वोट बैंक राहुल के हाथ को मजबूत करेगा। उधर धर्मिक उन्माद के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भजपा और सपा अपना वोट बैंक पक्का मान  रही हैं। उनके दावे में सच्चाई तब अधिक दिखने लगती है जब पश्चिम में जाट वोट बैंक के एक मात्र वारिस रहे चैधरी अजीत सिंह का कोई राजनीतिक जिक्र भी इस क्षेत्र में अब नहीं होता।यहाॅ काग्रेस साफट कार्नर लेती है तो कटटरता से मिली उपलब्धियों से आजिज लोग पुनः काॅग्रेस की तरफ वापस जा सकते हैं।

कांग्रेस का किसान ही सहारा !
राहुल गाॅधी हर एक से जुड़ने की कोशिश में अपनी इस यात्रा में शहर के साथ- साथ, आसपास के गाॅवों में जाकर किसानों से मिल कर बात कर रहे हैं जो आगे चलकर उनके पक्ष में कुछ जुड़ाव हो सकता है, बशर्ते कार्यकर्ताओं का समर्पण इस ओर हो । लगातार राहुल 25 दिनों तक सड़क मार्ग से चलते हुए राष्ट्ीय खबरों में बनें रहेंगे जो उनके जमीनी होने के दावे को बल देगा। किसी भी नेता का सम्बल उनके कार्यकर्ताओं में उर्जा संचरण को देखकर लगाया जा सकता है। राहुल गाॅधी लगातार युवा किसानों से मिलकर सीधी बातचीत कर रहे हैं। वह किसानों को बता रहे हैं कि किसान का कर्ज माॅफ करने का वादा सिर्फ काॅग्रेस ने ही पूरा किया बाकी लोग  कोरा आश्वासन दिये । मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 70 हजार करोड़ कर्ज माॅफ किया गया था। उत्तर प्रदेश में बीते 27 साल से रही सरकारों को कटघरे में खड़ा करते हुए उनके वादो  व इरादों में अन्तर बताते हुए किसान हित काॅग्रेस के साथ है  यह समझााने की कोशिश राहुल लगातार कर रहे हैं। धीरे -धीरे ही सही काॅग्रेस पटरी पर लैाटती दिख सकती है। इसके लिये उसने पार्टी से जुड़ने के लिये टोलफ्री न0 भी जारी कर रखा है। राहुल गोरखपुर शहर में जहाॅ पिछले कई चुनावों में काॅग्रेस की जमीन बंजर रही है , वहाॅ नुक्कड़ पर मिलते हुए काॅग्रेस उपाध्यक्ष शहर के बीचोबीच अपना कैम्पेन करने का साहस किया जो उनके मेहनत व उम्मीद दोनो को प्रमाणित करता है। किसान यात्रा वाले 2500 किमी के क्षेत्र में ही 100 बूथ कार्यकर्तांओ को निर्देशित किया गया है वे 10 हजार किसान परिवारों से मिलकर उनकी समस्या पर प्रश्नावली तेयार करें। ऐसे 10 हजार कार्यकर्ताओं के साथ राहुल गाॅधी ब्यक्तिगत मिलेंगे और बैठक करेंगे। आगामी 2 अक्टूबर को इन प्रश्नों को लेकर काॅग्रेस अपना विशाल प्रदर्शनी दिल्ली में लगायेगी।
इस तरह काॅग्रेस खेाये जनाधार का पता लेकर द्वारे – द्वारे गुहार लगाने पहुॅच रही है। काॅग्रेस के साथ हर वर्ग जाति व धर्म का जुड़ा होना उसकी सबसे बड़ी ताकत है। अभी तक किसी जाति विशेष अथवा धर्म से जोड़कर नही देखा गया ऐसे में काॅग्रेस जितना भी पसीना बहा रही है वह आगे यदि वोट बैंक में परिर्वतित हुआ तो 2017 की थेाड़ी भी मुस्कान 2019 में खुशी से झूमने का मौका दे सकती है।  पप्पू के उपनाम देने वाले लोगों में अपनी कठिन मेहनत से राहुल गाॅधी प्यार दुलार देकर उन्हे अपना बना सके और बरबस ही उनमें से कोई बोल पड़ा कि लो पप्पू पास हो गया तो समझ लिजिये कि काॅग्रेस में ताकत लौट रही है।

Vaidambh Media

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