लव जेहाद वालों एक नजर इधर भी!

ब्यूरो कार्यालय, बरेली। औरत आज भी बाजार की वस्तु है! स्त्री के साथ पुरुष का ब्यवहार समाज में देखना हो तो जरा नुक्कड़ और चैराहों पर खड़े लोगों की घूरती निगाहों का मतलब समझने की कोशिश कीजिये। यह वही समाज है जिसने स्त्री को मंदिर में स्थापित कर पूजा। बहन बनाकर ऐसी निगरानी रखी कि उसकी संास तक पर उसकी मर्जी नही रह गई। घर की चाहरदीवारी के भीतर औरत के साथ हो रहे जुल्म शिक्षित लोगों की कृपा से निरंतर प्रगति पर है। सवाल उठना लाजमीं है कि आज समाज के पहरुये कथित लव जेहाद का अन्वेषण कर संसद में जवाब मांगते हैं पर समाज को खोखला करने वाले कई मामले इनकी बाट जोहते रह जाते हैं क्यों ? औरत आज भी वंश चलाने के लिए,हवश की पूर्ति के लिए , पति की प्रोन्नति के लिये देश के विभिन्न हिस्सों में खरीदी व बेंची जा रहीं हैं। क्या कथित लव जेहाद से जादा चिंताजनक मामला यह नही है?
उत्तराखण्ड,बिहार ,पश्चिम बंगाल व उड़ीसा में महिलाओं को खरीदने व बेचने का नेटवर्क काम करता है। ये वो लोग नही हैं जो इण्टरनेट पर डेट व सेटिंग करते हैं,बल्कि ये वो हैं जिनके लिए यह अपराध बिल्कुल नही है। ये लोग अपना वंश चलाने व शारीरिक सुख के लिये दलाल को पकड़ कर औरत खरीदतें हैं। राजनीतिक लोगों को लव जेहाद जैसी कूट रचना पर समाज के बीच खड़ा होने में मजा आता है। देश भर में ढीढोरा पीटा जाता है, संसद में सवाल उठाये जाते हैं। पर औरत खरीद-फरोख्त पर चूं तक नही कसा जाता। उत्तर प्रदेश मे मेरठ,उन्नाव,गाजियावाद ,फतेहपुर,नवाबगंज ,बरेली,आगरा क्षेत्र के गावों में इस तरह के मामले आम हैं। उत्तर प्रदेश के नवाबगंज में हाफिजगंज थाना है। इसी थाने के अंतर्गत बीजामऊ गाॅव में 5 सितम्बर को हाई प्रोफाइल मामला सामने आया। राजनीति और पुलिस के बीच प्रगाढ़ सम्बंध के कारण मामला पानी में कागज की नाव की तरह तैराकर डूबा दिया गया। बीजामऊ गाॅव मे लड़की बेचने का गिरोह काम करता है यह ग्राम प्रधान ओमकार गंगवार स्वीकार करते हैं, उनका कहना है कि गाॅव के कुछ लोग मानव तस्करी में संलिप्त हैं। वे बाहर से लड़कियाॅ लाते हैं कुछ समय गाॅव में ही पत्नी बनाकर रखते हैं फिर ग्राहक तय कर बेंच देते हैं। ग्राम प्रधान तो बेहिचक कहते हैं कि पुलिस को सब पता है। इस गाॅव में इतने बड़े स्कैंडल का खुलासा बड़े नाटकीय ढंग से हुआ। गाॅव मे सुबह से दोपहर तक एक आदमी एक दरवाजे पर इसलिए बैठा था कि उससे पूरा पैसा लेकर भी लड़की नही मिली थी। इस तुरुप के इक्के के सहारे जब केस समझने की कोशिश की गई तो पता चला कि गाॅव का सोहनलाल उत्तराखण्ड से एक लड़की खरीद कर लाया। वह 5माह तक उसे अपने साथ रखा इसी समय औरत बेचने की दलाली करने वाला नन्हेलाल उससे मिला। सोहनलाल ने मौका अच्छा जान सौदा तय कर लिया क्योंकि लड़की इस दौरान गर्भवती हो चुकी थी। मामला 10हजार में तय हुआ।नन्हे लड़की को बहड़ी के पचपेड़वा निवासी अपने एक अपंग रिश्तेदार को बेचने की बात की थी। सोहनलाल को लड़की गर्भवती होने के कारण दाम 4हजार ही दिया गया। जिस पर मामला गरमा गया। सूचना पुलिस को मिली उन्होने थोड़ा भी संज्ञान नही लिया। थनाघ्यक्ष हाफिजगंज व क्षेत्राधिकारी इसे बिना सींग पूॅछ वाला मामला बताते रहे। एक बसपा नेत्री जरुर मामले में दिलचस्पी लेती रहीं। इसी प्रकार फतेहगढ़ पूर्वी में एक मजबूर पत्नी खुद को बिकने से बचने के लिए ट्रेन से कूदकर भागी। घटना हरदोई जिले की मीना के साथ हुई। दस साल पहले उसकी शादी हरदोई के आंझी शहाबाद तहसील के पसगवां गाॅव में हुई थी। उसके 3 बच्चे हैं। माता-पिता का देहावसान हो गया। पति ही एकमात्र सहारा है। बीते बृहस्पतिवार को यह वाकया तब पेस आया जब प्रयाग पैसेन्जर बिलपुर स्टेशन पर रुकी। जब ट्रेन चलने को हुई मीना जल्दी से ट्रेन से उतर सरपट दैड़ लगाने लगी , पीछे एक ब्यक्ति कुछ दूर पीछा किया पर लोगों के तेवर देख भागकर ट्रेन मे चढ लिया। बदहवास मीना एक रेल कर्मचारी के घर में घुस गई । बहुत देर तक सबके द्वारा तसल्ली दिये जाने पर कि पीछा करने वाला भाग गया है,उसने मुॅह खोला और बताया कि वह मेरा पति है। दिल्ली बेंचने के लिये ले जा रहा था। सौदा पक्का हो गया था,कुछ पैसे एडवांस मिल गये थे। महत्वपूण यह है कि यह सौदा भी 10 हजार में ही तय हुआ तथा गाॅव का ही एक युवक जो दिल्ली में रहता है दसने ही यह सौदा किया।

नालंदा के समाजशास्त्री डीजे मधु के अनुसार 

 समाजशास्त्री मानते हैं कि इस तरह की घटनायें बढ़ती हैं तो इसमें ताज्जुब की बात नहीं है। नालंदा के डा0डीजे मधु कहते हैं- भौतिकवादी ब्यवस्था में सबसे पहले परिवार छोटा हो गया, मॅहगाई कमाई पर शिकंजा कस रही है, अवसाद बढ़ रहा है इस प्रभाव में सर्वाधिक आने वाले वे परिवार हैं जिनकी आय दो जून की रोटी से कम है। गाॅव सें रोजगार का पलायन , महिला स्वावलम्बन की कागजी खनापूर्ति तथा दूसरे से आगे निकलने की होड़ भी इन घटनाओं के लिये जिम्मेदार है। सरकार को इस क्षेत्र में बुनियादी स्तर पर बहुत ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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