वर्ल्ड कप 2011 का गुमनाम हीरो मुनाफ पटेल !

मुनाफ ने  अपनी रफ्तार से मचा दी सनसनी !

New Delhi: एक समय भारत के सबसे तेज गेंदबाज रहे मुनाफ पटेल आज अपने गांव में रहते हैं।Munaf-Patel-wins-it- इंग्लैण्ड के खिलाफ 2005 में मोहाली टेस्ट से डेब्यू करने वाले मुनाफ ने अपने पहले ही मैच में 97 रन देकर सात विकेट लिए थे और अपनी रफ्तार से सनसनी मचा दी थी। मुनाफ उस समय 145 से अधिक की रफ्तार से गेंद डालते थे। उन्हें ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों का जवाब माना गया। लेकिन एक साल के अंदर ही चोटों के चलते उन्हें अपनी रफ्तार कम करनी पड़ी और फिर वे पहले जैसे बॉलर नहीं रहे।

खाने के अभाव में भूखा सो जाता था  भारत का सबसे तेज गेंदबाज  !

मुनाफ का जन्म गुजरात के भरूच जिले के इकहर गांव में 12 जुलाई 1983 को हुआ। उनका परिवार काफी गरीब था और मुनाफ को कई बार तो भूखा सोना पड़ता था।m patel उनके पिता कपास के खेतों में मजदूरी करते थे। मुनाफ ने खेतों में खेलते -खेलते अपनी गेंदबाजी को तराशा और सबसे तेज गेंदबाज बने। उन्होंने सिर्फ 70 वनडे और 13 टेस्ट मैच खेले जिनमें क्रमश: 86 और 35 विकेट लिए। उन्होंने दो वर्ल्ड कप खेले और एक बार विजेता टीम के सदस्य भी रहे लेकिन 2011 वर्ल्ड कप के बाद बाहर होने के बाद उन्हें टीम में नहीं लिया गया।  2011 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सदस्य थे और उस समय टीम इंडिया के बॉलिंग कोच इरिक सिमंस ने उन्हें जीत का “गुमनाम हीरो” कहा था। इस वर्ल्ड कप ने जहीर खान और युवराज सिंह के बाद सबसे ज्यादा 11 विकेट लिए थे। 2009 से लेकर 2011 के बीच उनके बिना टीम इंडिया अधूरी थी। लेकिन वर्ल्ड कप के कप के बाद वे पांच-छह बार चोटिल हो गए और जब फिट होकर लौटे तो चयन समिति बदल चुकी थी। वे कहते हैं कि वे लोग मेरे और नेहरा के अलावा अन्य लोगों को सामने लाना चाहते थे। अपने बचपन के बारे में वे बताते हैं कि दुख ही दुख था लेकिन झेलने की आदत हो गई थी। पैसे नहीं थे तो क्या कर सकते हैं? अब्बू अकेले कम कर रहे थे और मैं स्कूल में था।

   आाजीविका के लिये टाइल फैक्ट्री  में काम कर 35 रोज कमाते थे  मुनाफ  !

munafin in his village

munaf in his village road

मुनाफ पटेल नौंवी कक्षा में पढ़ते थे और अपनी स्कूल के सबसे तेज गेंदबाज थे।  लेकिन वे क्रिकेटर नहीं बनना चाहते थे क्योंकि उनके पिता किसी और के खेत में काम करते थे और घर में खाने को कुछ नहीं था। इसके चलते मुनाफ टाइल फैक्ट्री में काम करने लगे और इसके बदले उन्हें रोजाना के 35 रूपये मिलते थे। उनके दोस्त ने अध्यापक को यह बात बताई तो अध्यापक ने कहाकि अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है। अभी सिर्फ खेलो। इस पर वे फिर से खेलने लगे। वे चप्पलों में ही खेलते थे। कुछ साल बाद उनके एक दोस्त युसूफ ने उन्हें 400 रूपये में जूते दिलाए और बड़ौदा खेलने के लिए ले गए। मुनाफ आज भी उस एहसान को याद रखते हैं और जब भी युसूफ ब्रिटेन से आते हैं तो मुनाफ सबसे पहले मिलने जाते हैं। लेकिन उस समय घर में पैसों की कमी के चलते उनके पिता क्रिकेट छोड़ने को कहते और अफ्रीका जाक र काम करने को कहते लेकिन उनकी मां कहती कि उसे खेलने दो। गौरतलब है कि इकहर गांव में ज्यादातर लोग अफ्रीका में ही काम करते हैं। यहां से लोग जांबिया, मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे जाते हैं और वहां पर फैक्ट्री या दुकान में काम करते हैं।

किरण मोरे जैसे जौहरी  ने तराशा  ‘ मुनाफ हीरा ‘

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munaf live in his village today

मुनाफ पर पूर्व चयनकर्ता और विकेटकीपर किरण मोरे की नजर पड़ी।  मोरे ने मुनाफ को उनके पहले ब्रांडेड क्रिकेट शूज दिलाए और बड़ौदा में अपनी एकेडमी में ट्रेनिंग दी। बाद में मोरे ने ही मुनाफ को चेन्नई में एमआरएफ पेस एके डमी में भेजा। एमआरएफ एकेडमी में मुनाफ 6-7 महीने तक रहे और वहीं पर उन्होंने दुनियादारी सिखी। एमआरएफ में मुनाफ की काबिलियत देखने के बाद स्टीव वॉ ने सचिन तेंदुलकर से कहाकि वे उन्हें मुंबई टीम में ले ले। इसके बाद मुनाफ मुंबई की ओर से खेलने लगे।मुनाफ आज अपने गांव इकहर में रहते हैं और वहां पर उनका खुद का पक्का बड़ा मकान है और गाड़ी है। वे गांववालों की मदद करते हैं। गांववाले भी मुनाफ को क ाफी सम्मान देते हैं। 2007 में जब बांग्लादेश और श्रीलंका से हारकर टीम इंडिया पहले ही दौर से बाहर हो गई थी तो खिलाडियों को काफी गुस्सा झेलना पड़ा था। इसी दौरान वेस्ट इंडीज में सचिन तेंदुलकर मुनाफ के कमरे में आए और पूछा कि, तुम्हारे घर पर भी कुछ नुकसान हुआ है क्या?

 तुमने मुझे चुना कैसे ?      …  पार्टियों में नही जाते मुनाफ !

इस पर मुनाफ ने कहा कि पाजी, जहां मैं रहता हूं ना उधर आठ हजार लोग है और सब मेरे सिक्योरिटी है। इस पर सचिन ने हंसते हुए कहा कि हम सबको तुम्हारे घर जाना चाहिए।munaf-patel-1 गौरतलब है कि हार के बाद सचिन और सौरव गांगुली के रेस्टोरेंट पर हमला हुआ था। जहीर खान के घर पर पत्थर फेंके गए और एमएस धोनी के घर की दीवार तोड़ दी गई थी।पटेल कई बार गुस्से में ऎसे फैसले ले चुके हैं जिन्होंने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी। दक्षिण अफ्रीका में आईपीएल-2 के दौरान एक मैच में शेन वार्न ने उन्हें बॉलिंग नहीं दी। इस मैच में राजस्थान रॉयल्स की टीम हार गई। गुस्साए मुनाफ पटेल टीम मालिक मनोज बदाले के पास गए और कहा, मेरा पासपोर्ट वापिस दो। मुनाफ अपने कमरे में चले गए और गेट बंद कर लिया। कुछ देर उनके गेट पर शेन वार्न आए लेकिन मुनाफ ने गेट नहीं खोला। ऎसे ही एक बार वे एक चयनकर्ता से भिड़ गए। वसीम जाफर बताते हैं कि टीम में चुने जाने के बाद एक दिन चयनकर्ता ने उनसे पूछा कि क्या तुम फिट हो ? इस पर मुनाफ भड़क गए और बोले फिर तुमने मुझे चुना कैसे ? तू खिला रहा है तो क्रिकेट ही नहीं खेलना मुझे। वे शुरू शुरू में पार्टियों में नहीं जाते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि पार्टियों में जाने पर शराब पीनी ही पड़ती है। बाद में गौतम गंभीर के समझाने के बाद वे पार्टियों में जाने लगे थे। वे आज भी शराब नहीं पीते।

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